कृषि विभाग में रिकॉर्ड जलाने का वीडियो वायरल, विभाग ने दी सफाई
नर्मदापुरम कृषि विभाग कार्यालय में पुराने शासकीय रिकॉर्ड जलाने का वीडियो वायरल होने के बाद विभाग ने कहा कि रिकॉर्ड का विनष्टीकरण शासन के नियमों और समिति की अनुशंसा के तहत किया गया।


सीहोर । जिला मुख्यालय स्थित कृषि विभाग कार्यालय परिसर में पुराने शासकीय दस्तावेज जलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और रिकॉर्ड विनष्टीकरण की प्रक्रिया को लेकर कई तरह की आशंकाएं व्यक्त कीं। हालांकि मामला चर्चा में आने के बाद कृषि विभाग ने स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड का विनष्टीकरण शासन द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार किया गया है तथा इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है।
वीडियो वायरल होते ही उठे कई सवाल
कार्यालय परिसर में खुले स्थान पर दस्तावेज जलते दिखाई देने के बाद राहगीरों और स्थानीय लोगों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद यह सवाल उठने लगे कि आखिर कौन से दस्तावेज नष्ट किए जा रहे हैं और क्या पूरी प्रक्रिया शासन के निर्धारित नियमों के अनुरूप अपनाई गई है। कई लोगों ने मामले में पारदर्शिता बरतते हुए संबंधित दस्तावेज और आदेश सार्वजनिक करने की मांग भी की।
कलेक्टर को जानकारी थी या नहीं, बना चर्चा का विषय
घटना के बाद प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी शुरू हो गई कि क्या रिकॉर्ड विनष्टीकरण की कार्रवाई की पूर्व सूचना जिला प्रशासन अथवा कलेक्टर को दी गई थी या विभागीय स्तर पर ही पूरी प्रक्रिया संपन्न की गई। हालांकि इस संबंध में जिला प्रशासन की ओर से समाचार लिखे जाने तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
उप संचालक कृषि बोले- रिकॉर्ड संरक्षण के स्पष्ट नियम हैं
उप संचालक कृषि ए.के. उपाध्याय ने बताया कि शासकीय अभिलेखों को अनिश्चितकाल तक सुरक्षित रखने का कोई प्रावधान नहीं है। शासन द्वारा स्पष्ट रूप से निर्धारित किया गया है कि किस प्रकार के रिकॉर्ड पांच वर्ष, 15 वर्ष, 50 वर्ष अथवा अन्य निर्धारित अवधि तक संरक्षित रखे जाएंगे। निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद अनुपयोगी अभिलेखों का विनष्टीकरण शासन की स्वीकृत प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया किसी एक अधिकारी के निर्णय से नहीं बल्कि निर्धारित नियमों और रिकॉर्ड संरक्षण नीति के अनुसार संचालित होती है।
समिति की अनुशंसा के बाद ही हुआ विनष्टीकरण
कृषि विभाग के अनुसार रिकॉर्ड नष्ट करने से पहले विधिवत समिति का गठन किया जाता है। समिति प्रत्येक बस्ता एवं फाइल का परीक्षण कर यह सुनिश्चित करती है कि केवल वही अभिलेख विनष्ट किए जाएं जिनकी संरक्षण अवधि समाप्त हो चुकी हो। समिति की अनुशंसा के बाद ही शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप रिकॉर्ड विनष्टीकरण की कार्रवाई की जाती है।
'अनुपयोगी रिकॉर्ड नहीं हटेंगे तो कार्यालय भर जाएंगे'
उप संचालक कृषि ने बताया कि कई दशकों पुराने रिकॉर्ड लंबे समय तक कार्यालयों में पड़े रहते हैं। यदि समय-समय पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उनका विनष्टीकरण नहीं किया जाए तो कार्यालयों में अनावश्यक दस्तावेजों का अंबार लग जाएगा। इससे स्थान की कमी के साथ-साथ चूहे, सांप और अन्य जीव-जंतुओं का खतरा भी बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से लंबित रिकॉर्ड विनष्टीकरण की प्रक्रिया शासन के नियमों के अनुरूप पूरी की जा रही है।
अब विभागीय दस्तावेजों पर टिकी निगाहें
वायरल वीडियो के बाद कृषि विभाग ने भले ही पूरी कार्रवाई को नियमानुसार बताया हो, लेकिन अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग रिकॉर्ड विनष्टीकरण से संबंधित आदेश, समिति की अनुशंसा, विनष्टीकरण सूची और अन्य आधिकारिक अभिलेख सार्वजनिक करता है या नहीं। यदि संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक किए जाते हैं तो पूरे मामले में उठ रहे सवालों का औपचारिक रूप से जवाब भी सामने आ सकेगा और प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।