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एक्सक्लूसिव · 27 दिन पहले

सरकारी मूंग में मिलावट: कनकधारा वेयरहाउस मामले में 3 पर FIR, एक आरोपी पर पुलिस लगाएगी खात्मा!

कनकधारा वेयरहाउस मूंग मिलावट मामले में तीन पर एफआईआर दर्ज। MPWLC जिला प्रबंधक, संचालक समेत आरोपी, मृत शाखा प्रबंधक पर पुलिस लगाएगी खात्मा। DenvaPost की खबर के बाद कार्रवाई।

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दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 27 दिन पहले
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सरकारी मूंग में मिलावट: कनकधारा वेयरहाउस मामले में 3 पर FIR, एक आरोपी पर पुलिस लगाएगी खात्मा!

DenvaPost की खबर के 6 दिन बाद प्रशासन हरकत में आया, MPWLC अधिकारियों को भी बनाया आरोपी

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नर्मदापुरम। समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी गई  सरकारी मूंग में करोड़ों रुपये की कथित मिलावट के मामले में आखिरकार प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कनकधारा वेयरहाउस प्रकरण में तीन लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया है। कलेक्टर के निर्देश पर माखननगर थाना पुलिस ने वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित, मध्यप्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम हौसले तथा जिला प्रबंधक वासुदेव दावनडे के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। प्रशासनिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

यह मामला वर्ष 2023-24 और 2024-25 में समर्थन मूल्य पर खरीदी गई मूंग से जुड़ा है। जांच में 31,298.89 क्विंटल सरकारी मूंग अमानक एवं मिलावट से प्रभावित पाई गई है। अधिकारियों के अनुसार इससे शासन को करीब 28.14 करोड़ रुपये की संभावित आर्थिक क्षति हुई है। मामला सामने आने के बाद सरकारी खरीदी, भंडारण व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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जांच में मिली मिट्टी और बाहरी पदार्थ की मिलावट

प्रशासन द्वारा गठित जांच दल ने गुराड़िया कला स्थित कनकधारा वेयरहाउस में रखी सरकारी मूंग का औचक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई बोरियों में मूंग के साथ मिट्टी और अन्य बाहरी पदार्थ पाए गए। कुछ नमूनों में गुणवत्ता निर्धारित मानकों से काफी नीचे मिली। इसके बाद जांच रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों और वेयरहाउस संचालक की भूमिका की समीक्षा की गई।

प्रथम दृष्टया लापरवाही और अनियमितताओं के आधार पर माखननगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई। अब पुलिस पूरे मामले की विवेचना करेगी और दस्तावेजों, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, भंडारण रिकॉर्ड तथा संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की जांच करेगी।

इन तीन लोगों पर दर्ज हुई एफआईआर

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पुलिस ने इस मामले में तीन लोगों को आरोपी बनाया है—वेयरहाउस संचालक तारेश पुरोहित,MPWLC के तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम हौसले,MPWLC के जिला प्रबंधक वासुदेव दावनडे

इन तीनों के खिलाफ दर्ज प्रकरण में अब पुलिस साक्ष्य जुटाने और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया में जुट गई है।

शाखा प्रबंधक पर पुलिस लगाएगी 'खात्मा'

इस मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू तत्कालीन शाखा प्रबंधक श्याम हौसले से जुड़ा है। सूत्रों के अनुसार उनका करीब तीन माह पहले आकस्मिक निधन हो चुका है।

वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत वर्मा ने बताया कि यदि किसी आरोपी की मृत्यु हो चुकी है तो उसके विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई जा सकती। ऐसी स्थिति में पुलिस मृत्यु का सत्यापन करने के बाद न्यायालय में खात्मा रिपोर्ट प्रस्तुत करती है। इसलिए श्याम हौसले के संबंध में भी पुलिस नियमानुसार यही प्रक्रिया अपनाएगी, जबकि अन्य आरोपियों के खिलाफ विवेचना जारी रहेगी।

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DenvaPost की खबर का असर, छह दिन बाद हुई बड़ी कार्रवाई

इस पूरे मामले में DenvaPost की खोजी रिपोर्ट का असर भी साफ दिखाई दिया। DenvaPost ने छह दिन पहले "माखननगर में अमानक मूंग का खेल, क्या सिर्फ संचालकों पर कार्रवाई कर पल्ला झाड़ लेगा MPWLC प्रशासन?" शीर्षक से विस्तृत  समाचार प्रकाशित किया था।

समाचार में सवाल उठाया गया था कि यदि सरकारी मूंग के भंडारण और गुणवत्ता में गड़बड़ी हुई है तो केवल वेयरहाउस संचालकों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। सरकारी खरीदी गई उपज MPWLC की निगरानी में रखी जाती है, इसलिए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।

खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने जांच तेज की और पहली बार वेयरहाउस संचालक के साथ MPWLC के अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया। इससे यह संकेत मिला कि जांच का दायरा केवल निजी पक्ष तक सीमित नहीं रखा गया।

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क्या और बढ़ेगा जांच का दायरा?

सूत्रों के अनुसार पुलिस और प्रशासन की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। विवेचना के दौरान कई दस्तावेजों की जांच की जा रही है। यदि अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

जानकारों का मानना है कि केवल वेयरहाउस स्तर पर जांच पर्याप्त नहीं होगी। सरकारी खरीदी, गुणवत्ता परीक्षण, परिवहन, भंडारण और निरीक्षण से जुड़े प्रत्येक स्तर की जिम्मेदारी तय किए बिना पूरे मामले की सच्चाई सामने आना मुश्किल होगा।

करोड़ों की  सरकारी खरीदी पर उठे गंभीर सवाल

 सरकार किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपज खरीदकर उसे सुरक्षित भंडारण के लिए वेयरहाउसों में रखती है। यदि भंडारण के दौरान गुणवत्ता से समझौता होता है या मिलावट जैसी स्थिति पैदा होती है तो इसका नुकसान केवल सरकारी खजाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी खरीद व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ता है।

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करीब 28.14 करोड़ रुपये की संभावित आर्थिक क्षति का अनुमान इस मामले की गंभीरता को दर्शाता है। ऐसे में अब निगाहें पुलिस विवेचना और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

यदि जांच निष्पक्ष और व्यापक तरीके से आगे बढ़ती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमानक मूंग के लिए वास्तविक जिम्मेदार कौन हैं और यह केवल लापरवाही का मामला था या इसके पीछे कोई संगठित अनियमितता भी थी। फिलहाल तीन लोगों पर एफआईआर दर्ज होने के साथ कार्रवाई का पहला चरण पूरा हो चुका है, जबकि सूत्रों का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस प्रकरण में कुछ और नाम भी सामने आ सकते हैं।

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