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नई दिल्ली · 19 दिन पहले

FCRA Amendment Bill 2026: संसद में पेश होने से पहले विरोध तेज, कांग्रेस समेत विपक्ष ने जताई आपत्ति; जानिए क्या बदल सकता है

FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर विपक्ष ने विरोध तेज कर दिया है। जानिए विदेशी फंड, NGO की संपत्तियों, Designated Authority और प्रस्तावित बदलावों से जुड़ी पूरी जानकारी।

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समाचार डेस्क · 19 दिन पहले
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FCRA Amendment Bill 2026: संसद में पेश होने से पहले विरोध तेज, कांग्रेस समेत विपक्ष ने जताई आपत्ति; जानिए क्या बदल सकता है

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के प्रस्तावित फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 (FCRA Amendment Bill 2026) को लेकर संसद में पेश होने से पहले ही राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विपक्षी दलों ने बिल के उन प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं, जिनके तहत किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द होने, सरेंडर होने या उसकी अवधि समाप्त होने की स्थिति में विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है।

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कांग्रेस समेत विपक्षी दल इस विधेयक का विरोध करने की रणनीति बना रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा है कि विपक्ष की आगे की रणनीति पर सोमवार को फैसला लिया जाएगा। इसके लिए विभिन्न दलों के फ्लोर लीडर्स की बैठक बुलाई जाएगी।

हालांकि, संसदीय कार्य राज्य मंत्री की ओर से जारी अगले सप्ताह के संभावित सरकारी कामकाज की सूची में फिलहाल इस विधेयक का उल्लेख नहीं किया गया है।

कांग्रेस ने सांसदों को जारी किया व्हिप

संभावित महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को देखते हुए कांग्रेस ने राज्यसभा और लोकसभा में अपने सांसदों के लिए व्हिप जारी किया है। पार्टी ने अपने सांसदों से 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में मौजूद रहने को कहा है।

कांग्रेस ने विपक्षी I.N.D.I. गठबंधन के सहयोगी दलों से भी इन तीन दिनों के दौरान अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील की है।

विपक्ष का कहना है कि बिल के कुछ प्रस्तावित प्रावधान विदेशी फंड प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) और सामाजिक संस्थाओं के लिए गंभीर प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

सुप्रिया सुले ने बिल को JPC के पास भेजने की मांग की

एनसीपी (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी प्रस्तावित संशोधन का विरोध किया है। उनका कहना है कि विदेशी फंडिंग को हर मामले में संदेह की नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने सरकार से बिल को वापस लेने या इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजने की मांग की है, ताकि इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा हो सके।

क्या है FCRA Amendment Bill 2026?

प्रस्तावित FCRA Amendment Bill 2026 का उद्देश्य Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में संशोधन करना है। FCRA कानून भारत में व्यक्तियों, संघों और संगठनों को मिलने वाले विदेशी योगदान को नियंत्रित करता है।

15 जुलाई के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में 14,449 FCRA रजिस्ट्रेशन सक्रिय थे, जबकि 22,498 रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुके थे और 15,212 रजिस्ट्रेशन की अवधि समाप्त हो चुकी थी।

प्रस्तावित संशोधन में एक Designated Authority बनाने का प्रावधान बताया गया है। यदि किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, संस्था खुद रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर देती है या उसकी वैधता समाप्त हो जाती है, तो विदेशी योगदान और उससे जुड़ी संपत्तियों पर इस प्राधिकरण का नियंत्रण हो सकता है।

विदेशी फंड से बनी संपत्तियों पर क्या होगा?

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत विदेशी योगदान से बनाई गई संपत्तियां शुरुआत में Designated Authority के नियंत्रण में रखी जा सकती हैं।

यदि संबंधित संस्था निर्धारित अवधि के भीतर अपना FCRA रजिस्ट्रेशन दोबारा हासिल नहीं कर पाती है, तो ऐसी संपत्तियों को सरकार को हस्तांतरित किए जाने का प्रावधान प्रस्तावित बताया जा रहा है।

इसके अलावा, प्राधिकरण को इन संपत्तियों के प्रबंधन और संबंधित संस्थाओं की गतिविधियों की निगरानी से जुड़े अधिकार भी दिए जाने की बात सामने आई है।

धारा 14B, 16A और 16B पर सबसे ज्यादा विवाद

प्रस्तावित संशोधन की धारा 14B, धारा 16A और धारा 16B को लेकर विपक्ष और विभिन्न संगठनों की ओर से सबसे ज्यादा सवाल उठाए जा रहे हैं।

धारा 14B

धारा 14B FCRA सर्टिफिकेट के समाप्त होने या रद्द होने की स्थिति से संबंधित बताई जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत यदि कोई संस्था रिन्यूअल के लिए आवेदन नहीं करती, उसका आवेदन खारिज हो जाता है या निर्धारित अवधि के बाद सर्टिफिकेट का नवीनीकरण नहीं होता, तो उसके FCRA स्टेटस पर स्थायी प्रभाव पड़ सकता है।

धारा 16A

धारा 16A के तहत FCRA सर्टिफिकेशन समाप्त होने की स्थिति में संस्था को मिले विदेशी फंड और उससे संबंधित संपत्तियों को Designated Authority के नियंत्रण में लेने का प्रावधान प्रस्तावित है।

धारा 16B

विवाद का एक बड़ा कारण धारा 16B को बताया जा रहा है। विपक्ष और कुछ संगठनों की चिंता है कि इसके जरिए पहले से मौजूद कुछ संपत्तियों पर भी नई व्यवस्था लागू हो सकती है।

विरोध करने वाले संगठनों का तर्क है कि इसका प्रभाव उन संस्थाओं पर भी पड़ सकता है जिनका FCRA रजिस्ट्रेशन पहले समाप्त हो चुका है, लेकिन वे अब घरेलू स्रोतों से अपने सामाजिक कार्य चला रही हैं।

कांग्रेस ने बताया ‘असंवैधानिक’, सरकार के रुख पर नजर

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने प्रस्तावित बिल पर गंभीर आपत्ति जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे स्वैच्छिक और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रस्तावित प्रावधानों का असर अल्पसंख्यक समुदायों और विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों द्वारा संचालित NGOs पर पड़ सकता है।

वहीं, तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ'ब्रायन ने भी प्रस्तावित बिल को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि इससे शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाले NGOs पर कार्यपालिका का नियंत्रण बढ़ सकता है।

मिजोरम से तमिलनाडु तक विरोध

प्रस्तावित संशोधन को लेकर कुछ क्षेत्रीय दलों और धार्मिक संगठनों की ओर से भी विरोध सामने आया है।

मिजोरम कांग्रेस ने आइजोल में प्रदर्शन कर बिल के प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। वहीं, मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर राज्य से जुड़ी चिंताओं को सामने रखा है।

दक्षिण भारत में भी इस मुद्दे पर राजनीतिक विरोध देखने को मिला है। DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित संशोधन को वापस लेने और FCRA कानून की धारा 15 को रद्द करने की मांग की है।

केरल के कैथोलिक चर्च की ओर से भी प्रस्तावित संशोधनों को लेकर चिंता जताई गई है।

अब संसद में होगी असली तस्वीर साफ

FCRA Amendment Bill 2026 को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। सरकार की ओर से प्रस्तावित बदलावों को विदेशी फंडिंग व्यवस्था को अधिक नियंत्रित और जवाबदेह बनाने की दिशा में देखा जा सकता है, जबकि विपक्ष और कुछ सामाजिक-धार्मिक संगठनों को आशंका है कि इससे NGOs की स्वायत्तता और संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ सकता है।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार विधेयक को संसद में कब पेश करती है और विपक्ष इसे सदन में किस तरह चुनौती देता है। यदि बिल पेश होता है तो इसके प्रावधानों पर विस्तृत चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष और विपक्ष की आपत्तियां अधिक स्पष्ट हो सकती हैं।

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