Dhar Bhojshala: भोजशाला मामले में हाईकोर्ट में तीखी बहस, मुस्लिम पक्ष ने एएसआई सर्वे पर उठाए सवाल
इंदौर। धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर सोमवार को इंदौर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid और Shobha Menon ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (…


इंदौर। धार स्थित विवादित भोजशाला परिसर को लेकर सोमवार को इंदौर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid और Shobha Menon ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पक्ष रखा और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा कराए गए सर्वे पर कई गंभीर सवाल उठाए। मामले में अब मंगलवार को अंतिम बहस प्रस्तावित है।
भोजशाला विवाद को लेकर वर्ष 2022 में Hindu Front for Justice की ओर से याचिका दायर की गई थी। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और परिसर का अधिपत्य हिंदू समाज को सौंपने की मांग की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने Archaeological Survey of India (ASI) को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। बाद में इस मामले में अन्य पक्षकार भी शामिल हुए।
मुस्लिम पक्ष ने धार्मिक स्वरूप पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष के वकीलों ने कहा कि अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि परिसर मंदिर है, मस्जिद है या जैन शाला। उनका तर्क था कि यदि यह मंदिर होता तो वहां मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा के प्रमाण मिलते, जबकि परिसर में ऐसी कोई स्थिति नहीं दिखाई देती।
वकीलों ने अदालत में कहा कि परिसर के स्वामित्व का प्रश्न अभी तय नहीं हुआ है और इस पर अंतिम अधिकार सिविल कोर्ट का है।
सलमान खुर्शीद ने वीडियोग्राफी पर जताई आपत्ति
वरिष्ठ अधिवक्ता Salman Khurshid ने अदालत में कहा कि उन्हें जो वीडियोग्राफी दिखाई गई, वह स्पष्ट नहीं थी और सर्वे से संबंधित रंगीन तस्वीरें भी उपलब्ध नहीं कराई गईं। उन्होंने अयोध्या मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां रामलला की मूर्ति स्थापित थी, जबकि भोजशाला परिसर में किसी प्रकार की मूर्ति स्थापित नहीं है।
सर्वे प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
मुस्लिम पक्ष ने आरोप लगाया कि सर्वे दोनों पक्षों की उपस्थिति में होना था, लेकिन उनके पक्षकारों को कोई औपचारिक सूचना पत्र नहीं दिया गया। वकीलों ने दावा किया कि उन्हें केवल सोशल मीडिया के माध्यम से सर्वे की जानकारी मिली।
उन्होंने यह भी कहा कि सर्वे एक साथ कई स्थानों पर किया गया, जिसके कारण सभी स्थानों पर पक्षकारों की मौजूदगी संभव नहीं हो सकी।
गौतम बुद्ध की मूर्ति का भी हुआ जिक्र
सुनवाई के दौरान यह दावा भी किया गया कि सर्वे के दौरान Gautama Buddha की एक प्रतिमा मिली थी, लेकिन उसका उल्लेख एएसआई की रिपोर्ट में नहीं किया गया। मुस्लिम पक्ष ने एएसआई की रिपोर्ट को त्रुटिपूर्ण और अधूरी बताते हुए उसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए।
प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी पर आपत्ति
अधिवक्ता तौसीफ वारसी ने दलील दी कि सर्वे के दौरान एसपी और कलेक्टर की उपस्थिति को लेकर कोई विशेष आदेश नहीं थे, इसके बावजूद दोनों अधिकारी पूरे समय मौके पर मौजूद रहे।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सर्वे नई तकनीक से किया जाना था, लेकिन सर्वे टीम को आधुनिक तकनीकों का पर्याप्त ज्ञान नहीं था और अधिकतर कार्य पुरानी पद्धति से ही किया गया।
अब इस बहुचर्चित मामले में मंगलवार को अंतिम बहस होगी, जिसके बाद हाईकोर्ट आगे की सुनवाई और आदेश को लेकर निर्णय ले सकता है।
