दतिया उपचुनाव 2026: 71.44% मतदान, 3 अगस्त को नतीजे; CM मोहन यादव, नरोत्तम मिश्रा और जीतू पटवारी की साख दांव पर
दतिया विधानसभा उपचुनाव 2026 में 71.44% मतदान हुआ। 3 अगस्त को मतगणना होगी। नतीजे CM मोहन यादव, नरोत्तम मिश्रा और जीतू पटवारी की राजनीतिक साख के लिए अहम माने जा रहे हैं।


दतिया। मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में गुरुवार को 71.44 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। यह आंकड़ा वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 9 प्रतिशत कम है। मतदान प्रतिशत में आई गिरावट ने सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब सभी की निगाहें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर टिकी हैं।
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह उपचुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके नतीजे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी की राजनीतिक साख पर भी असर डाल सकते हैं।
भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का चुनाव
दतिया उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का विषय बन गया है। पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद जिला भाजपा संगठन के कई पदाधिकारियों ने एक साथ इस्तीफा देकर नाराजगी जताई थी। इसके बावजूद पार्टी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया।
बाद में डॉ. नरोत्तम मिश्रा स्वयं चुनाव प्रचार में उतरे और भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में घर-घर जाकर मतदान की अपील की। ऐसे में यदि भाजपा यह सीट जीतती है तो इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व, संगठन की रणनीति और क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव की पुष्टि के रूप में देखा जाएगा। वहीं हार की स्थिति में टिकट चयन और स्थानीय असंतोष को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
जीतू पटवारी के लिए भी बड़ी परीक्षा
दूसरी ओर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए भी यह उपचुनाव अहम माना जा रहा है। लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरने का प्रयास कर रही है।
यदि कांग्रेस यह सीट बरकरार रखने में सफल रहती है तो इसे पटवारी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती की सफलता माना जाएगा। वहीं हार की स्थिति में कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर सवाल उठ सकते हैं।
क्यों हुआ उपचुनाव?
दतिया विधानसभा सीट पर यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की विधानसभा सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया। एक आपराधिक मामले में अदालत द्वारा तीन वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत उनकी सदस्यता समाप्त हो गई थी।
इस उपचुनाव में कांग्रेस ने दतिया राजघराने से जुड़े घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा ने आशुतोष तिवारी पर भरोसा जताया है।
3 अगस्त को आएगा फैसला
मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होने के बाद अब सभी की नजरें 3 अगस्त को होने वाली मतगणना पर हैं। चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि दतिया की जनता ने भाजपा की रणनीति पर भरोसा जताया है या कांग्रेस अपना गढ़ बचाने में सफल रही है। साथ ही, यह नतीजा मध्य प्रदेश की आगामी राजनीतिक दिशा और दोनों प्रमुख दलों की संगठनात्मक ताकत का भी महत्वपूर्ण संकेत देगा।