और मध्य प्रदेश उपचुनाव में भाजपा को बड़ा झटका, बांकीपुर में प्रशांत किशोर की ऐतिहासिक जीत, दतिया में कांग्रेस ने बरकरार रखा दबदबा
बिहार की बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर ने भाजपा को हराया, मध्य प्रदेश की दतिया सीट कांग्रेस ने जीती, जबकि गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा ने बरकरार रखी।


नई दिल्ली/पटना/भोपाल। बिहार और मध्य प्रदेश के विधानसभा उपचुनावों के नतीजों ने राष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। बिहार की प्रतिष्ठित बांकीपुर विधानसभा सीट पर चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने अपने पहले ही चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मजबूत गढ़ को ध्वस्त कर दिया। वहीं, मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करते हुए भाजपा को करारा झटका दिया। हालांकि गुजरात की मंजलपुर सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा।
बांकीपुर में प्रशांत किशोर की बड़ी जीत
पटना की बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव में जन सुराज के उम्मीदवार प्रशांत किशोर ने भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार को 19,324 मतों से पराजित कर इतिहास रच दिया। इस चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की उम्मीदवार रेखा कुमारी तीसरे स्थान पर रहीं और अपनी जमानत भी नहीं बचा सकीं।
यह सीट 1995 से भाजपा के कब्जे में थी। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद यहां उपचुनाव कराया गया था। इसलिए इस सीट पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई थीं।
भाजपा के दिग्गजों के इलाकों में भी पिछड़ी पार्टी
चुनाव परिणामों ने भाजपा के लिए चिंता बढ़ा दी है। पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, वरिष्ठ नेता सी. पी. ठाकुर, मंत्री रामकृपाल यादव और अशोक चौधरी से जुड़े मतदान केंद्रों पर भी जन सुराज को बढ़त मिली।
20 राउंड की मतगणना के बाद भाजपा और राजद समर्थकों की भीड़ मतगणना केंद्र से कम होने लगी, जबकि जन सुराज के कार्यकर्ताओं ने पीले गुलाल के साथ जीत का जश्न मनाया।
वोट प्रतिशत में बड़ा बदलाव
पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा का वोट शेयर 28.26 प्रतिशत और राजद का 18.60 प्रतिशत घटा, जबकि जन सुराज का वोट शेयर 44.31 प्रतिशत बढ़ गया। वर्ष 2010 के बाद यह पहला मौका है जब विजेता उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से कम मत मिले और जीत का अंतर भी पिछले दो दशकों में सबसे कम रहा।
दतिया में कांग्रेस ने फिर दी भाजपा को मात
मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्मीदवार कुंवर घनश्याम सिंह ने भाजपा के आशुतोष तिवारी को 6,016 मतों से पराजित किया। कांग्रेस प्रत्याशी को 66,757 जबकि भाजपा उम्मीदवार को 60,741 वोट मिले। तीसरे स्थान पर आजाद समाज पार्टी के दामोदर यादव मंडल रहे, जिन्हें 22,527 मत प्राप्त हुए।
यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद कराया गया था। लगातार दूसरी बार इस सीट पर कांग्रेस की जीत को भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
नरोत्तम मिश्रा के प्रभाव वाले क्षेत्र में भी पिछड़ी भाजपा
दतिया का परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का प्रभाव क्षेत्र माना जाता है। उनके मतदान केंद्र संख्या-121 पर भी भाजपा कांग्रेस से पीछे रही।
मतगणना के शुरुआती राउंड में भाजपा आगे थी, लेकिन दूसरे राउंड से कांग्रेस ने बढ़त बनाई और अंत तक उसे कायम रखा। हार के बाद भोपाल स्थित नरोत्तम मिश्रा के सरकारी बंगले पर दिनभर सन्नाटा पसरा रहा।
कांग्रेस ने बताया बदलाव का संकेत
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने दतिया की जीत को वर्ष 2028 के विधानसभा चुनावों के लिए बदलाव का शंखनाद बताया। वहीं वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं की मेहनत और जनता के विश्वास को दिया।
गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा ने बचाई
उधर गुजरात के मंजलपुर विधानसभा उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार सतीश गोविंदभाई पटेल ने कांग्रेस के भीखाभाई रबारी को 30,630 मतों से हराकर सीट बरकरार रखी।
पटेल को 55,481 जबकि रबारी को 24,851 वोट मिले। हालांकि 2022 के विधानसभा चुनाव की तुलना में भाजपा की जीत का अंतर इस बार काफी कम रहा।
चुनाव परिणाम पर भाजपा अध्यक्ष की प्रतिक्रिया
भाजपा अध्यक्ष ने गुजरात की मंजलपुर सीट पर पार्टी को मिले जनादेश के लिए मतदाताओं का आभार व्यक्त किया। वहीं बांकीपुर और दतिया में हार स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी दोनों परिणामों का गंभीरता से आत्ममंथन करेगी और नई ऊर्जा व संकल्प के साथ जनता के बीच जाकर विश्वास मजबूत करने का प्रयास करेगी।
बिहार की बांकीपुर सीट पर प्रशांत किशोर ने भाजपा को 19,324 वोटों से हराया।
राजद तीसरे स्थान पर रही और जमानत नहीं बचा सकी।
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस ने भाजपा को 6,016 मतों से पराजित किया।
गुजरात की मंजलपुर सीट भाजपा ने बरकरार रखी।
उपचुनाव के नतीजों को आगामी विधानसभा चुनावों से पहले महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
