Bankers' Books Evidence Bill 2026: अब डिजिटल रिकॉर्ड भी कोर्ट में मान्य
लोकसभा ने Bankers' Books Evidence Bill 2026 पारित किया। अब बैंकों के डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और क्लाउड रिकॉर्ड भी कोर्ट में कानूनी साक्ष्य के रूप में स्वीकार किए जा सकेंगे।


नई दिल्ली। डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते दौर में बैंकिंग कानूनों को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। लोकसभा ने बुधवार को 'बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल, 2026' (Bankers' Books Evidence Bill, 2026) को मंजूरी दे दी। नए कानून के लागू होने के बाद बैंकों के डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक, वर्चुअल और क्लाउड में सुरक्षित रिकॉर्ड भी अदालतों में कानूनी साक्ष्य (Evidence) के रूप में स्वीकार किए जा सकेंगे।
यह विधेयक 1891 के बैंकर्स बुक्स एविडेंस एक्ट की जगह लेगा, जिसे उस समय बनाया गया था जब बैंकिंग रिकॉर्ड मुख्य रूप से कागजी दस्तावेजों तक सीमित थे।
वित्त मंत्री ने पेश किया विधेयक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में यह विधेयक पेश किया। विपक्ष के हंगामे के बीच बिना चर्चा के सदन ने इसे पारित कर दिया।
अब किन रिकॉर्ड्स को मिलेगी कानूनी मान्यता?
नए कानून के तहत बैंक रिकॉर्ड की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। अब निम्नलिखित सभी प्रकार के रिकॉर्ड कानूनी रूप से मान्य होंगे—
भौतिक (Physical) रिकॉर्ड
इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड
डिजिटल रिकॉर्ड
वर्चुअल रिकॉर्ड
क्लाउड में सुरक्षित डेटा
अन्य इलेक्ट्रॉनिक प्रणालियों में संग्रहीत रिकॉर्ड
इससे बैंकिंग प्रणाली में उपयोग होने वाले आधुनिक डेटा स्टोरेज सिस्टम को भी कानूनी मान्यता मिल जाएगी।
कोर्ट में डिजिटल रिकॉर्ड होंगे स्वीकार
बिल के अनुसार, बैंक के इलेक्ट्रॉनिक या डिजिटल रिकॉर्ड की प्रमाणित कॉपी भी अदालत में साक्ष्य के रूप में पेश की जा सकेगी, यदि वह कानून में निर्धारित शर्तों को पूरा करती हो।
साथ ही, डिजिटल रिकॉर्ड के प्रमाणन (Certification) की प्रक्रिया को भी एक समान और पारदर्शी बनाया जाएगा, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में भ्रम की स्थिति न बने।
केंद्र सरकार को मिलेगी अतिरिक्त अधिकार
नए कानून में केंद्र सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर वह—
डिजिटल रिकॉर्ड के लिए अतिरिक्त प्रमाणन नियम तय कर सके।
अधिसूचना जारी कर इस कानून का दायरा अन्य बैंकिंग या वित्तीय संस्थानों तक भी बढ़ा सके।
क्यों जरूरी था नया कानून?
सरकार का कहना है कि Bankers' Books Evidence Act, 1891 उस दौर में बनाया गया था जब बैंक रिकॉर्ड केवल रजिस्टरों और कागजी फाइलों में रखे जाते थे।
हालांकि पुराने कानून में प्रमाणित प्रतियों को अदालत में स्वीकार करने का प्रावधान था, लेकिन आज अधिकांश बैंकिंग कार्य कोर बैंकिंग सिस्टम, क्लाउड सर्वर और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं। ऐसे में कानून को वर्तमान तकनीक के अनुरूप अपडेट करना आवश्यक हो गया था।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, नए कानून से बैंकिंग विवादों, ऋण मामलों, साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों की जांच में डिजिटल रिकॉर्ड का उपयोग अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इससे अदालतों में साक्ष्य प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी।
सरकार का मानना है कि यह कानून भारत की तेजी से विकसित हो रही डिजिटल बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत कानूनी आधार प्रदान करेगा और भविष्य की डिजिटल अर्थव्यवस्था के अनुरूप न्यायिक प्रक्रिया को भी अधिक सक्षम बनाएगा।
