सीहोर की आंगनवाड़ियों में ‘कागजी उपस्थिति’ का खेल! कमिश्नर के निरीक्षण में खुली पोल, परियोजना अधिकारी निलंबित
पोषण ट्रैकर में दर्ज बच्चों की संख्या और मौके पर मौजूद बच्चों में भारी अंतर, वजन के आंकड़ों में गड़बड़ी से लेकर घटिया भोजन तक मिलीं कई अनियमितताएं


सीहोर। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग की कमिश्नर निधि निवेदिता के औचक निरीक्षण ने सीहोर ग्रामीण क्षेत्र की आंगनवाड़ी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। निरीक्षण के दौरान पोषण ट्रैकर में दर्ज बच्चों की उपस्थिति और केंद्रों पर वास्तविक मौजूदगी में बड़ा अंतर मिला। इसके अलावा बच्चों के वजन के आंकड़ों में विसंगतियां, पोषण संबंधी रिकॉर्ड में अंतर, भोजन की गुणवत्ता में कमी और बुनियादी सुविधाओं की बदहाली जैसी कई अनियमितताएं सामने आईं।
मामले को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने सीहोर ग्रामीण बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रियंका राय दीवान को निलंबित कर दिया है।
कागजों में 29 बच्चे, मौके पर मिले सिर्फ 11
निरीक्षण के दौरान पचामा आंगनवाड़ी केंद्र में पोषण ट्रैकर ऐप पर 29 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन मौके पर सिर्फ 11 बच्चे मौजूद मिले। इसी तरह रायपुरा नयाखेड़ा केंद्र में ऐप पर 24 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी, जबकि निरीक्षण के दौरान केवल 9 बच्चे मिले।
नौनीखेड़ी गुसाई केंद्र में भी पोषण ट्रैकर पर 20 बच्चों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन मौके पर सिर्फ 9 बच्चे मौजूद पाए गए। रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में इस बड़े अंतर ने पोषण ट्रैकर में दर्ज आंकड़ों और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
वजन के आंकड़ों में भी मिली विसंगति
पचामा केंद्र में कनक नामक बच्चे के वजन का रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में आया। निरीक्षण में पाया गया कि एक ही सप्ताह में बच्चे का वजन बिना स्पष्ट कारण के लगभग दोगुना दर्ज किया गया था।
इसी केंद्र के पोषण ट्रैकर पर 7 एमएएम बच्चे दर्ज थे, जबकि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता को केवल 3 बच्चों की जानकारी थी।
पडली केंद्र में भी इसी तरह की विसंगति सामने आई। कार्यकर्ता ने कुपोषित बच्चों की संख्या शून्य बताई, जबकि पोषण ट्रैकर में 1 सैम और 13 एमएएम बच्चे दर्ज पाए गए।
मीनू में दाल, थाली से गायब
नौनीखेड़ी गुसाई आंगनवाड़ी केंद्र में बच्चों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता भी सवालों के घेरे में रही। निर्धारित मीनू के अनुसार बच्चों को दाल, सब्जी और रोटी दिया जाना था, लेकिन निरीक्षण के दौरान सिर्फ 14 रोटियां और नाममात्र की आलू की सब्जी मिली। दाल नहीं मिली।
निरीक्षण में भोजन की गुणवत्ता और स्वाद भी संतोषजनक नहीं पाया गया। वहीं, स्व-सहायता समूहों द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे टीएचआर पैकेटों पर निर्माण तिथि अंकित नहीं थी। सामग्री का मिश्रण भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया।
कहीं मशीन खराब तो कहीं बिजली कनेक्शन ही नहीं
निरीक्षण में आंगनवाड़ी केंद्रों की बुनियादी व्यवस्थाओं की भी पोल खुली। नौनीखेड़ी गुसाई केंद्र में बच्चों का वजन और ऊंचाई मापने वाली डिजिटल मशीनें खराब मिलीं।
यहां पर्यवेक्षक का अंतिम निरीक्षण अगस्त 2025 में होना बताया गया, जिससे नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठे।
पडली केंद्र में टीवी और वॉटर प्यूरीफायर उपलब्ध थे, लेकिन बिजली कनेक्शन नहीं था। वहीं थूनाकलां केंद्र में साफ-सफाई की स्थिति खराब मिली। परिसर में झाड़ियां उगी थीं और नल-हैंडपंप भी खराब पाया गया।
भुगतान प्रक्रिया में भी सामने आई लापरवाही
सांझा चूल्हा योजना के तहत स्व-सहायता समूहों को किए जाने वाले भुगतान से संबंधित फाइलों को निर्धारित समय यानी 15 तारीख के बाद प्रस्तुत किए जाने की बात सामने आई। इसके अलावा काम नहीं करने वाले स्व-सहायता समूहों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं किए जाने की बात भी निरीक्षण में सामने आई।
विभाग ने इन सभी कमियों को परियोजना अधिकारी की मॉनिटरिंग और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही माना।
14 अगस्त के निरीक्षण के बाद 24 दिन में कार्रवाई
महिला एवं बाल विकास विभाग की कमिश्नर निधि निवेदिता ने 14 अगस्त को सीहोर जिले की ग्रामीण आंगनवाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान मिली अनियमितताओं की जांच और विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद करीब 24 दिन में निलंबन की कार्रवाई की गई।
निलंबन अवधि में प्रियंका राय दीवान का मुख्यालय जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय निर्धारित किया गया है।
महिला एवं बाल विकास अधिकारी ज्ञानेश खरे ने कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि महिला एवं बाल विकास विभाग की कमिश्नर निधि निवेदिता के आदेश पर सीहोर ग्रामीण बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रियंका राय दीवान को निलंबित किया गया है।
सवालों के घेरे में निगरानी व्यवस्था
आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों की वास्तविक उपस्थिति, पोषण ट्रैकर के आंकड़ों, कुपोषित बच्चों की पहचान और पोषण आहार की गुणवत्ता में सामने आई विसंगतियों ने विभागीय निगरानी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि निलंबन की कार्रवाई के बाद विभाग इन केंद्रों के रिकॉर्ड और पोषण संबंधी व्यवस्थाओं में सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाता है।
