मध्य प्रदेश में मानसून अब भी 6% कमजोर, पूर्वी MP में तेज बारिश से सुधरी स्थिति; 11 सितंबर तक रीवा-शहडोल में बारिश
मध्य प्रदेश में मानसून अब तक 6% कमजोर, 790.8 मिमी बारिश दर्ज। रीवा-शहडोल में 11 सितंबर तक तेज बारिश के आसार, 12 सितंबर के बाद फिर सक्रिय होगा मौसम तंत्र।


भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून सीजन अब अंतिम दौर की ओर बढ़ रहा है, लेकिन प्रदेश में अब तक बारिश सामान्य आंकड़े तक नहीं पहुंच सकी है। प्रदेश में अब तक 790.8 मिलीमीटर (करीब 31.1 इंच) बारिश दर्ज की गई है, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 33.1 इंच है। इस तरह प्रदेश में बारिश सामान्य से लगभग 6 प्रतिशत कम है।
हालांकि, पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी मध्य प्रदेश के कई जिलों में हुई तेज बारिश से प्रदेश के मानसूनी आंकड़ों में सुधार हुआ है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी पूर्वी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश के आसार
मौसम केंद्र के अनुसार 11 सितंबर तक रीवा और शहडोल संभाग में तेज बारिश का असर देखने को मिल सकता है। इन संभागों के कई जिलों में भारी बारिश के साथ कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना बनी हुई है।
वहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। मौसम विभाग के अनुसार 12 सितंबर के बाद एक नया मौसम तंत्र सक्रिय होने की संभावना है। इसके प्रभाव से प्रदेश के कई हिस्सों में एक बार फिर बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
इन 12 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
मानसून के दौरान प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच चुका है। इनमें:
भोपाल
राजगढ़
शिवपुरी
निवाड़ी
मैहर
भिंड
श्योपुर
सिंगरौली
सीधी
सतना
मऊगंज
उमरिया
शामिल हैं।
इसके अलावा उमरिया, अनूपपुर, आगर-मालवा, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, ग्वालियर, गुना, दतिया, खरगोन और बुरहानपुर में सामान्य बारिश का 90 प्रतिशत से अधिक कोटा पूरा हो चुका है।
पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से ज्यादा, पश्चिमी हिस्से में 12% कमी
इस बार मानसून ने मध्य प्रदेश के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में अलग-अलग तस्वीर दिखाई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से करीब 1 प्रतिशत अधिक हो चुकी है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश सामान्य से लगभग 12 प्रतिशत कम है।
इस असमान बारिश का असर प्रदेश के अलग-अलग जिलों के आंकड़ों में भी साफ दिखाई दे रहा है।
मऊगंज में सबसे ज्यादा बारिश, आलीराजपुर सबसे पीछे
प्रदेश में अब तक सबसे ज्यादा बारिश मऊगंज में करीब 53 इंच दर्ज की गई है। इसके विपरीत आलीराजपुर में केवल 13.6 इंच बारिश हुई है।
दोनों जिलों के बीच बारिश का अंतर करीब 39 इंच है। यह अंतर बताता है कि इस मानसून में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण कितना असमान रहा है।
इन जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश के कई जिलों में अब भी सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा नहीं हुआ है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से लगभग 3 से 23 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में बारिश की कमी करीब 7 से 54 प्रतिशत तक बताई गई है।
जून की बारिश की कमी अब तक नहीं हुई पूरी
इस मानसून की शुरुआत मध्य प्रदेश के लिए कमजोर रही थी। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। इसके बाद जुलाई में मानसून ने रफ्तार पकड़ी और बारिश के आंकड़ों में सुधार हुआ।
हालांकि, मानसून के दौरान दो बार ब्रेक की स्थिति बनने से कई दिनों तक बारिश की गतिविधियां कमजोर रहीं। अगस्त में भी अच्छी बारिश हुई, लेकिन जून में हुई कमी पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी।
इंदौर में करीब 2 इंच बारिश, पेड़ गिरने से महिला की मौत
सोमवार को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश हुई। इंदौर में करीब 2 इंच बारिश दर्ज की गई। तेज बारिश के दौरान कार पर पेड़ गिरने से एक महिला की मौत हो गई।
वहीं पीथमपुर में भी कई दिनों के अंतराल के बाद तेज बारिश हुई। भिंड के अंबाह क्षेत्र में क्वारी नदी का जलस्तर बढ़ने से रूपाहटी के पास पुल क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है।
आष्टा में भी तेज बारिश दर्ज की गई, जिससे स्थानीय स्तर पर जलभराव और आवागमन पर असर देखने को मिला।
सीजन खत्म होने से पहले भरपाई की उम्मीद
मध्य प्रदेश में सामान्य मानसूनी बारिश का आंकड़ा करीब 37.3 इंच माना जाता है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख शहरों में सामान्य बारिश करीब 38 से 39 इंच के आसपास रहती है।
फिलहाल प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में अभी समय बाकी है। ऐसे में 12 सितंबर के बाद संभावित नए मौसम तंत्र और आगामी बारिश के दौर से सामान्य से कम बारिश की भरपाई होने की उम्मीद बनी हुई है।
हालांकि, बारिश का वितरण अब भी बड़ी चुनौती है। पूर्वी मध्य प्रदेश में जहां कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से ऊपर पहुंच गया है, वहीं पश्चिमी हिस्से के कई जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं।
