सागर जहरीली शराब कांड पर उमंग सिंघार का भाजपा सरकार पर हमला, बोले- ‘जहर बांटो योजना’ की जांच हो
नेता प्रतिपक्ष ने 25 लाख रुपए मुआवजे की मांग की, बोले- छोटे आरोपियों तक सीमित न रहे जांच; पूरे नेटवर्क का हो खुलासा


सागर। सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए शराब के अवैध कारोबार और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जहरीली शराब के कारोबार की शिकायतों के बावजूद समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
सिंघार ने सरकार से मांग की कि मामले की जांच केवल शराब बेचने वाले छोटे आरोपियों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि शराब के निर्माण, रसायन की आपूर्ति, पैकिंग, लेबलिंग और दुकानों-ढाबों तक पहुंचाने वाले पूरे नेटवर्क की जांच की जाए।
सागर में 15 मौतों का दावा
उमंग सिंघार ने दावा किया कि सागर में जहरीली शराब पीने से 15 लोगों की मौत हुई है और बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हैं। उन्होंने कहा कि कई परिवारों ने अपने युवा बेटे, पिता या परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य को खो दिया है।
मौतों और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या को लेकर अलग-अलग समय पर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। ऐसे में अंतिम आधिकारिक आंकड़ा प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत पुष्टि के बाद ही स्पष्ट होगा।
सिंघार ने सरकार से सवाल किया कि इन मौतों के लिए जिम्मेदारी किसकी है और अवैध शराब का कारोबार इतने बड़े स्तर तक कैसे पहुंचा।
‘जहर बांटो योजना’ बताकर सरकार पर साधा निशाना
नेता प्रतिपक्ष ने प्रदेश की शराब व्यवस्था पर हमला बोलते हुए इसे “मोहन सरकार की जहर बांटो योजना” करार दिया। उनका आरोप है कि बंडा क्षेत्र में अवैध और नकली शराब का कारोबार लंबे समय से चल रहा था।
उन्होंने दावा किया कि कुछ स्थानों पर शराब लाइसेंसी दुकानों की तुलना में काफी कम कीमत पर शराब बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आई थीं। सिंघार ने कहा कि ऐसे मामलों की जांच में यह पता लगाया जाना चाहिए कि इतनी कम कीमत पर शराब की आपूर्ति किस नेटवर्क के जरिए हो रही थी।
‘शराब का पूरा नेटवर्क सामने आए’
उमंग सिंघार ने जांच के दायरे को व्यापक करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि जहरीला रसायन कहां से आया, शराब कहां तैयार की गई, उसे बोतलों में किसने भरा और लेबलिंग के बाद दुकानों, ढाबों या अन्य स्थानों तक किस नेटवर्क के जरिए पहुंचाया गया।
उनके मुताबिक, यदि जांच केवल शराब बेचने वाले स्थानीय लोगों तक सीमित रहती है तो अवैध कारोबार के पीछे मौजूद बड़े नेटवर्क का खुलासा नहीं हो पाएगा।
सागर गोल्ड को लेकर भी सवाल
सिंघार ने सागर गोल्ड और अन्य संदिग्ध शराब की जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले संदिग्ध शराब को रोकने और नमूने जांच के लिए भेजने की कार्रवाई की गई, लेकिन बाद में आदेश में बदलाव किया गया।
उन्होंने सरकार से पूछा कि कार्रवाई की दिशा में बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी और पूरे मामले में लिए गए प्रशासनिक निर्णयों की भी जांच क्यों नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, इन आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
शराब सप्लाई के स्रोत पर उठे सवाल
शराब की आपूर्ति को लेकर उत्तर प्रदेश के ललितपुर कनेक्शन की चर्चा के बीच सिंघार ने शराब के वास्तविक स्रोत को लेकर भी सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, उनके हवाले से एक अलग दावा सामने आया है कि शराब उत्तर प्रदेश से नहीं बल्कि मध्यप्रदेश के धार से आई थी।
इन अलग-अलग दावों के बीच शराब की वास्तविक सप्लाई चेन जांच का अहम हिस्सा बन गई है। जांच एजेंसियों के सामने अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि संदिग्ध शराब का निर्माण कहां हुआ और वह सागर के बंडा क्षेत्र तक किस माध्यम से पहुंची।
अधिकारियों पर कार्रवाई के बाद भी सवाल बरकरार
घटना के बाद आबकारी विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित करने और एक अधिकारी को मुख्यालय से संबद्ध किए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस की ओर से भी मामले में कई आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
इसके बावजूद उमंग सिंघार का कहना है कि कार्रवाई केवल स्थानीय स्तर के आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने शराब बनाने, सप्लाई करने और कथित रूप से संरक्षण देने वाले पूरे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई की मांग की है।
मृतकों के परिवारों को 25 लाख रुपए मुआवजे की मांग
उमंग सिंघार ने जहरीली शराब कांड में मृतकों के परिवारों के लिए 25 लाख रुपए मुआवजे की मांग की है। उन्होंने कहा कि मृतकों में ऐसे लोग शामिल हैं जो अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके निधन के बाद परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि मृतकों के परिवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए।
सरकार की जवाबदेही पर बड़ा सवाल
उमंग सिंघार ने सागर की घटना को केवल जहरीली शराब से हुई मौतों तक सीमित न रखते हुए इसे अवैध शराब नेटवर्क, प्रशासनिक निगरानी और सरकारी जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
अब इस पूरे मामले में जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि जहरीली शराब का स्रोत क्या था, इसकी आपूर्ति किस नेटवर्क से हुई और प्रशासनिक स्तर पर कहीं लापरवाही हुई थी या नहीं। इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।
