2021 से 36 देशों से 274 भगोड़े भारत लाए गए, 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी
केंद्र सरकार ने बताया कि 2021 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों का प्रत्यर्पण हुआ। पिछले तीन वर्षों में 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए और ऑपरेशन त्रिशूल के जरिए कार्रवाई तेज हुई।


नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए वर्ष 2021 से अब तक 36 देशों से 274 वांछित अपराधियों का भारत प्रत्यर्पण कराया है। सरकार के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ इंटरपोल के रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किए गए हैं। इसके साथ ही 'ऑपरेशन त्रिशूल' के तहत विदेशों में छिपे अपराधियों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए सैटेलाइट निगरानी, डिजिटल फुटप्रिंट और आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि अब भगोड़ों के खिलाफ एक खुफिया-आधारित, तकनीक-संचालित और समन्वित कार्रवाई मॉडल विकसित किया गया है, जिससे प्रत्यर्पण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
2014 से पहले धीमी थी प्रत्यर्पण प्रक्रिया
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2004 से 2013 के बीच भारत में औसतन सिर्फ चार भगोड़ों का ही प्रतिवर्ष प्रत्यर्पण हो पाता था। उस समय 110 से अधिक प्रत्यर्पण अनुरोध लंबित थे। अधूरे दस्तावेज, धीमी कानूनी प्रक्रिया, सीमित प्रत्यर्पण संधियां और एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई मामलों में विदेशी अदालतों से मंजूरी नहीं मिल पाती थी।
मोदी सरकार ने प्रत्यर्पण को बनाया राष्ट्रीय प्राथमिकता
सरकार के मुताबिक, वर्ष 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में संशोधन के बाद भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया। गृह मंत्री अमित शाह ने भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक स्थिरता और कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय बताते हुए वैश्विक सहयोग, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति पर जोर दिया।
नए आपराधिक कानूनों में गैर-हाजिरी में सुनवाई का प्रावधान
वर्ष 2024 में लागू नए आपराधिक कानूनों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 के तहत पहली बार भगोड़े आरोपियों की अनुपस्थिति में भी मुकदमा चलाने का प्रावधान किया गया। इससे ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया बाधित नहीं होगी।
भारतपोल और ऑपरेशन त्रिशूल से मिली गति
सरकार ने जनवरी 2025 में 'भारतपोल' प्लेटफॉर्म लॉन्च किया, जिसके माध्यम से सीबीआई, राज्य पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों के 1,400 से अधिक कार्यालय एकीकृत सूचना नेटवर्क से जुड़े हैं। इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय काफी कम हुआ है।
वहीं ऑपरेशन त्रिशूल के तहत इंटरपोल के सहयोग से विदेशों में नाम और पहचान बदलकर रह रहे भगोड़ों की सैटेलाइट सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट और प्रोफाइल मैपिंग के जरिए पहचान कर उन्हें ट्रैक किया जा रहा है।
रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने में बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इंटरपोल के माध्यम से जारी रेड कॉर्नर नोटिस की संख्या लगातार बढ़ी है।
2022: 40
2023: 100
2024: 107
2025: 112
2026 (अब तक): 182
पिछले तीन वर्षों में कुल 401 रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए हैं।
आर्थिक अपराधियों की हजारों करोड़ की संपत्ति जब्त
सरकार के अनुसार, मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के तहत वर्ष 2019 से 2026 के बीच भगोड़े आर्थिक अपराधियों की 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई, जबकि 18,762 करोड़ रुपये की राशि की सफल वापसी भी सुनिश्चित की गई।
कई गंभीर मामलों के आरोपी भारत लाए गए
सरकार के अनुसार, प्रत्यर्पित किए गए भगोड़ों में आतंकवाद, संगठित अपराध, आर्थिक अपराध, मादक पदार्थ तस्करी, हत्या, दुष्कर्म और पॉक्सो जैसे मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं। तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण सरकार ने जटिल आतंकवाद मामलों में कानूनी और कूटनीतिक प्रयासों का प्रमुख उदाहरण बताया है।
सरकार का कहना है कि भगोड़ों के खिलाफ अभियान केवल गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग, आधुनिक तकनीक, कानूनी मजबूती और विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के समन्वय के माध्यम से उन्हें न्याय के दायरे में लाने का प्रयास लगातार जारी है।
