सांगाखेड़ाकलां में ₹5 लाख के रामलीला मंच की छत ढही, सरपंच-सचिव-उपयंत्री को नोटिस
माखननगर की सांगाखेड़ाकलां पंचायत में सांसद निधि से बन रहे रामलीला मंच की छत ढलाई के दौरान ढह गई। जांच में दो कॉलम झुके मिले, तीन जिम्मेदारों को नोटिस।


माखननगर। माखननगर की ग्राम पंचायत सांगाखेड़ाकलां में राज्यसभा सांसद निधि के ₹5 लाख से बन रहे रामलीला मंच की छत ढलाई के दौरान ही ताश के पत्तों की तरह ढह गई। गनीमत रही कि कोई इंसानी जान नहीं गई, लेकिन ढही हुई छत के मलबे से उठे धूल के गुबार ने पंचायती राज और तकनीकी पर्यवेक्षण के खोखलेपन को पूरी तरह नंगा कर दिया है। जांच टीम को मौके पर छत ही नहीं, दो कॉलम भी दाईं ओर 2 इंच झुके मिले। यानी इमारत बनने से पहले ही विकलांग हो चुकी थी, बस उसे गिरने के लिए एक औपचारिकता की जरूरत थी।
यह मामला केवल एक कच्ची ढलाई या 'बल्ली टूटने' का नहीं है, जैसा कि उपयंत्री महोदय ने बड़ी आसानी से दोष लकड़ी के लट्ठे पर मढ़कर पल्ला झाड़ने की कोशिश की है।
सवाल यह है कि:जिस कार्य की तकनीकी स्वीकृति जनवरी 2025 में मिली, उसका पर्यवेक्षण ढलाई के अंतिम दिन तक किस नींद में सो रहा था?
क्या उपयंत्री ने छत ढलाई से पहले सेंटरिंग, सरिया के जाल और लोड-बेयरिंग क्षमता को प्रमाणित (certify) किया था? या फिर दफ्तर में बैठकर ही एमबी (Measurement Book) भरने की पुरानी परंपरा निभाई जा रही थी?
जब निर्माण एजेंसी खुद ग्राम पंचायत है, तो सरपंच और सचिव की नाक के नीचे तकनीकी मानकों का इतना नग्न उल्लंघन कैसे होता रहा?
हमेशा की तरह, घटना के बाद रसूखदार तंत्र ने अपना सबसे पसंदीदा हथियार निकाला है—'कारण बताओ नोटिस (SCN)'। 3 सितंबर 2026 को सीईओ द्वारा सरपंच सावित्रीबाई धुर्वे, सचिव ओमप्रकाश भदौरिया और उपयंत्री मुकेश बुबाड़े को जारी 3 दिन के नोटिस महज एक प्रशासनिक लीपापोती का जरिया बनकर न रह जाएं, इसका डर जनता को भली-भांति है।
नोटिस की आड़ में मामले को दबाने का खेल बंद होना चाहिए:
पैसों की वसूली किससे?: जनता के ₹5 लाख के सार्वजनिक धन का जो नुकसान हुआ है, उसकी पाई-पाई की भरपाई संबंधित जवाबदेह अधिकारियों और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के वेतन व निजी संपत्ति से तय की जानी चाहिए।
केवल निलंबन नहीं: घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल और झुके हुए कॉलम इस बात का सबूत हैं कि जनसुरक्षा से खिलवाड़ किया गया। अगर कल को रामलीला के दौरान यह हादसा होता तो कितने मासूमों की बलि चढ़ती?
कठोर प्रशासनिक कार्रवाई: सूत्रो की माने तो यदि जांच में तथ्य सही पाए जाते हैं तो निष्पक्ष कार्रवाई करते हुए दोषी सचिव/उपयंत्री को बर्खास्त किया जा सकता है और सरपंच के खिलाफ मध्य प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की सख्त कार्रवाई हो सकती है।
सांसद निधि हो या कोई अन्य सरकारी पैसा, यह किसी कर्मचारी की जागीर नहीं है। सांगाखेड़ाकलां की ढही छत इस बात का सबूत है कि जब तक 'कमीशनखोरी' और 'लापरवाही' के गठजोड़ पर नकेल नहीं कसेगी, तब तक सरकारी योजनाएं जमीन पर बनने से पहले ही मलबे में तब्दील होती रहेंगी। अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ कागजी नोटिसों से खानापूर्ति करता है या मिसाल कायम करने वाली कठोर कार्रवाई!
