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ओडिशा · 18 मिनट पहले

ओडिशा के जंगल में मिले पांच ओरंगुटान, वन विभाग भी हैरान; भारत तक कैसे पहुंचे ये वनमानुष?

ओडिशा के बालासोर में जंगल से पांच ओरंगुटान रेस्क्यू किए गए। भारत में नहीं पाए जाने वाले इन वनमानुषों के पहुंचने की वजह और वन्यजीव तस्करी के एंगल की जांच जारी है।

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दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 18 मिनट पहले
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ओडिशा के जंगल में मिले पांच ओरंगुटान, वन विभाग भी हैरान; भारत तक कैसे पहुंचे ये वनमानुष?

बालासोर, ओडिशा। ओडिशा के बालासोर जिले में जंगल के बीच अचानक पांच ओरंगुटान दिखाई देने से वन विभाग और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया। भोगराई इलाके में ग्रामीणों ने पेड़ों पर झूलते इन दुर्लभ वनमानुषों को देखा, जिसके बाद उनके फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे।

सूचना मिलने पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पांचों ओरंगुटानों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाए जाने वाले ये वनमानुष भारत के जंगल तक पहुंचे कैसे?

भारत की प्राकृतिक प्रजाति नहीं हैं ओरंगुटान

ओरंगुटान भारत की प्राकृतिक वन्यजीव प्रजाति नहीं है। इनका प्राकृतिक आवास मुख्य रूप से इंडोनेशिया के बोर्नियो और सुमात्रा द्वीपों तथा मलेशिया के कुछ हिस्सों में है।

भारत से इनके प्राकृतिक आवास की दूरी हजारों किलोमीटर है। ऐसे में इनका किसी प्राकृतिक रास्ते से जंगलों के जरिए ओडिशा तक पहुंचना लगभग असंभव माना जा रहा है।

इसी वजह से वन विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि इन पांचों ओरंगुटानों को भारत में किस तरह लाया गया और उन्हें जंगल में किसने छोड़ा।

वन्यजीव तस्करी का कनेक्शन? जांच जारी

ओरंगुटानों के भारत में मिलने के बाद अवैध वन्यजीव व्यापार का एंगल भी जांच के दायरे में है। हालांकि, अभी तक ऐसा कोई पुख्ता प्रमाण सामने नहीं आया है जिससे यह निश्चित रूप से कहा जा सके कि पांचों जानवर वन्यजीव तस्करी के जरिए भारत लाए गए थे।

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जांच एजेंसियां इनके भारत पहुंचने के संभावित रास्ते और इनके पीछे इंसानी भूमिका की जानकारी जुटा रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) से भी सहयोग मांगा है।

Source: @ANI · View on X

पेड़ों पर रहने के लिए मशहूर हैं ओरंगुटान

ओरंगुटान को हिंदी में आमतौर पर वनमानुष कहा जाता है। ये ग्रेट एप्स यानी बड़े कपियों में शामिल हैं और इंसानों के निकटतम जैविक रिश्तेदारों में गिने जाते हैं।

लंबे हाथ, लाल-भूरे बाल और पेड़ों पर रहने की अद्भुत क्षमता इनकी प्रमुख पहचान है। ओरंगुटान अपना काफी समय पेड़ों पर बिताते हैं और जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र में बीजों के प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तीनों प्रजातियां संकट में

दुनिया में ओरंगुटान की तीन जीवित प्रजातियां मानी जाती हैं और सभी गंभीर संरक्षण संकट का सामना कर रही हैं। जंगलों की कटाई, प्राकृतिक आवास का लगातार कम होना और अवैध वन्यजीव व्यापार इनके लिए बड़े खतरे हैं।

ऐसे में पांच ओरंगुटानों का एक साथ भारत के जंगल में मिलना वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मामला माना जा रहा है। इनके भारत पहुंचने की वजह सामने आना इसलिए भी जरूरी है, ताकि वन्यजीव तस्करी या अवैध व्यापार से जुड़े किसी नेटवर्क का पता लगाया जा सके, यदि ऐसा कोई नेटवर्क मौजूद है।

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Source: @arunruby08 · View on X

रेस्क्यू के बाद अब कहां रखे जाएंगे ओरंगुटान?

रेस्क्यू किए गए पांचों ओरंगुटान फिलहाल वन विभाग की निगरानी में हैं। उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा की जांच की जा रही है। बताया जा रहा है कि उचित देखभाल के लिए उन्हें नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क ले जाने की तैयारी की जा रही है।

फिलहाल वन विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन पांचों ओरंगुटानों के भारत पहुंचने की गुत्थी सुलझाना है। जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि ये दुर्लभ वनमानुष ओडिशा के जंगल तक कैसे पहुंचे और क्या इसके पीछे किसी तरह की अवैध गतिविधि की भूमिका है।

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