जहरीली शराब के बाद बड़ा सवाल: बिक्री रोकने वाले आबकारी अधिकारी को ही नोटिस
सागर जहरीली शराब कांड के बीच जबलपुर में ‘सागर गोल्ड’ की बिक्री रोकने वाले सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे को नोटिस, 15 दिन में मांगा जवाब।


जबलपुर/सागर। सागर में संदिग्ध जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद मध्य प्रदेश में शराब की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच जबलपुर से सामने आया मामला विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी बहस खड़ी कर रहा है। यहां संदिग्ध शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी करने वाले सहायक आबकारी आयुक्त संजीव कुमार दुबे को ही विभाग की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
मामला ‘सागर गोल्ड’ नाम से बिक रही शराब से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार 6 सितंबर को सहायक आबकारी आयुक्त दुबे ने इस शराब की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। यह कदम सागर में इसी नाम से कथित रूप से बेची गई शराब के सेवन के बाद मौतों की खबरों के बीच उठाया गया था।
बिक्री रोकने के आदेश पर ही विभाग ने उठाए सवाल
वाणिज्यिक कर विभाग की ओर से जारी नोटिस में आरोप लगाया गया है कि सहायक आबकारी आयुक्त ने शराब का रासायनिक परीक्षण कराए बिना और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना बिक्री रोकने का आदेश जारी किया।
विभाग ने इसे मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1966 के नियम-5 के उल्लंघन से जोड़ा है। साथ ही मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियमों के नियम-10 के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
अधिकारी से 15 दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अब उनके जवाब और विभागीय जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
मौतों के बाद तत्काल रोक बनाम औपचारिक प्रक्रिया का सवाल
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि जब किसी शराब को लेकर लोगों की सेहत और जान को खतरा होने की आशंका सामने आए, तो प्रशासन की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?
एक तरफ तत्काल प्रभाव से संदिग्ध शराब की बिक्री रोकने की जरूरत दिखाई देती है, वहीं दूसरी ओर विभागीय नियमों के तहत किसी उत्पाद को विषाक्त घोषित करने और उसकी बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी जरूरी है।
यही विरोधाभास अब आबकारी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। हालांकि, नोटिस जारी होना अपने आप में अधिकारी को दोषी साबित नहीं करता। अंतिम स्थिति विभागीय जांच और उनके जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी।
सागर शराब कांड में मौतों का आंकड़ा भी चर्चा में
इधर सागर जिले में संदिग्ध जहरीली शराब मामले में कार्रवाई जारी है। एक आरोपी राम सिंह की इलाज के दौरान मौत होने की जानकारी सामने आई है। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 25 तक बताई जा रही है, जबकि जिला प्रशासन ने अब तक 15 मौतों की पुष्टि की है।
पुलिस के अनुसार राम सिंह कथित तौर पर शराब की बिक्री से जुड़ा था और उसने भी शराब का सेवन किया था। पहले उसका इलाज बंडा अस्पताल में कराया गया। हालत गंभीर होने पर उसे बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां मंगलवार को उसकी मौत हो गई।
16 आरोपी गिरफ्तार, छापेमारी जारी
सागर पुलिस ने मामले में कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस के अनुसार शराब के निर्माण, बिक्री और सप्लाई से जुड़े संदिग्ध लोगों के ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
पुलिस ने 30 नामजद आरोपियों में से दो और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इसके साथ ही गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 16 बताई गई है।
अब जांच सिर्फ आरोपियों तक सीमित नहीं
सागर की घटना के बाद पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई जारी है, लेकिन जबलपुर के अधिकारी को जारी नोटिस ने पूरे मामले का एक दूसरा पहलू सामने ला दिया है।
अब सवाल यह भी है कि संदिग्ध शराब की पहचान होने पर उसे बाजार से हटाने और बिक्री रोकने की वैधानिक प्रक्रिया क्या है? यदि तत्काल रोक लगाने के लिए निर्धारित अनुमति और परीक्षण जरूरी था, तो ऐसी परिस्थितियों में आपात स्थिति में संबंधित अधिकारी के अधिकार क्या हैं?
साथ ही यह भी जांच का विषय होगा कि ‘सागर गोल्ड’ को लेकर वास्तविक खतरे का आकलन किस आधार पर किया गया और शराब की गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई।
फिलहाल एक तरफ सागर में मौतों के लिए जिम्मेदार लोगों तक पहुंचने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी तरफ संदिग्ध शराब की बिक्री रोकने के फैसले को लेकर विभागीय प्रक्रिया की जांच शुरू हो गई है। शराब की गुणवत्ता, निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी—यह सवाल अब इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में है।
