MPPHC में खरीद पर सवाल: फर्में ब्लैकलिस्ट, डॉ. पंकज पराशर को फिर CGMT की जिम्मेदारी
MPPHC में लैप्रोस्कोपी उपकरण और अस्पताल फर्नीचर की खरीद को लेकर सवाल उठे हैं। दो फर्मों पर कार्रवाई के बाद अधिकारियों की जवाबदेही और डॉ. पंकज पराशर की तीसरी बार CGMT नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं।


भोपाल। मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPPHC) में सरकारी खरीद और टेंडर प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। दो अलग-अलग मामलों में संबंधित फर्मों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें ब्लैकलिस्ट किया गया, लेकिन जिन अधिकारियों की निगरानी में संबंधित टेंडर और खरीद प्रक्रिया हुई, उनकी जवाबदेही को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं है।
मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जिन प्रक्रियाओं के दौरान कथित अनियमितताएं सामने आईं, उस समय तकनीकी स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रहे डॉ. पंकज पराशर को बाद में एक बार फिर MPPHC का चीफ जनरल मैनेजर टेक्निकल (CGMT) नियुक्त कर दिया गया।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक डॉ. पराशर को मई-जून 2026 में तीसरी बार CGMT की जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले वे वर्ष 2018-19 तथा 2023 से फरवरी 2025 तक इस पद पर रह चुके हैं।
दो फर्मों पर कार्रवाई, अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
मामले में दो अलग-अलग खरीद प्रक्रियाएं सवालों के घेरे में हैं। पहला मामला वर्ष 2023 में लैप्रोस्कोपी उपकरणों की खरीद से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला वर्ष 2024 में अस्पताल फर्नीचर एवं उपकरणों की आपूर्ति से संबंधित है।
दोनों मामलों में संबंधित फर्मों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं तो उस दौरान प्रक्रिया की तकनीकी निगरानी और निरीक्षण से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की गई या नहीं?
यही सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि संबंधित दोनों टेंडरों के समय डॉ. पंकज पराशर CGMT की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
लैप्रोस्कोपी टेंडर में अधिकृत पत्रों पर उठी आपत्ति
पहला मामला वर्ष 2023 में लैप्रोस्कोपी उपकरणों की निविदा से जुड़ा है। आरोप है कि डिसेंट मेडिकल इक्विपमेंट सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से विदेशी निर्माताओं के अधिकृत पत्र प्रस्तुत किए गए थे।
इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर शिकायत सामने आई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार संबंधित विदेशी कंपनियों की ओर से भी इन अधिकृत पत्रों पर आपत्ति जताई गई थी।
इसके बावजूद कंपनी द्वारा अस्पतालों में करोड़ों रुपये के उपकरणों की सप्लाई किए जाने का मामला सामने आया। बाद में दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया में कथित अनियमितता सामने आने के बाद फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई।
इस मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन CGMT स्तर से फर्म के दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर नोटशीट में ऐसी टिप्पणी की गई थी, जिसमें सत्यापन नहीं होने की बात दर्ज थी।
हालांकि, इस पूरे मामले में तत्कालीन अधिकारियों की भूमिका और उनकी जवाबदेही क्या रही, यह विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
अस्पताल फर्नीचर की गुणवत्ता पर भी सवाल
दूसरा मामला वर्ष 2024 में भोपाल की इनलाइन मेडिकेयर को मिले टेंडर से संबंधित है।
एमपीपीएचसीएल ने कंपनी द्वारा सप्लाई किए गए अस्पताल फर्नीचर और उपकरणों का निरीक्षण सरकारी एजेंसी राइट्स लिमिटेड से कराया। निरीक्षण रिपोर्ट में कई उत्पाद निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं पाए जाने की बात सामने आई।
जिन सामानों पर आपत्तियां दर्ज की गईं, उनमें बेड-साइड स्टूल, हॉस्पिटल बेड, एग्जामिनेशन टेबल, ड्रेसिंग ट्रॉली, स्ट्रेचर और आईसीयू मोटराइज्ड बेड सहित अन्य उपकरण शामिल बताए गए हैं।
निरीक्षण के दौरान सामान की गुणवत्ता, स्टील की मोटाई, आकार, वेल्डिंग, जंग तथा आवश्यक प्रमाणपत्रों से संबंधित कमियां भी दर्ज की गईं।
इसके बाद MPPHC ने संबंधित फर्म को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी के जवाब को संतोषजनक नहीं पाए जाने के बाद निविदा की शर्तों के तहत इनलाइन मेडिकेयर को दो वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।
उसी अवधि में CGMT की थी अहम भूमिका
इन दोनों मामलों में एक महत्वपूर्ण समानता यह है कि संबंधित टेंडर और खरीद प्रक्रिया के दौरान डॉ. पंकज पराशर MPPHC में CGMT की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
यही वजह है कि अब सवाल उठ रहा है कि जब बाद में संबंधित फर्मों के खिलाफ गंभीर कार्रवाई की गई, तो उस समय खरीद प्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच क्यों नहीं की गई या उसका परिणाम सार्वजनिक क्यों नहीं हुआ?
हालांकि, केवल किसी अधिकारी के कार्यकाल के दौरान अनियमितता सामने आना अपने आप में उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी या दोष सिद्ध नहीं करता। इसके लिए दस्तावेजी जांच और सक्षम स्तर की विभागीय कार्रवाई आवश्यक है।
तीसरी बार मिली CGMT की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर डॉ. पंकज पराशर को MPPHC का CGMT तीसरी बार बनाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मई-जून 2026 में उनकी नियुक्ति दोबारा इस महत्वपूर्ण पद पर की गई। इस बार नियुक्ति के आदेश डीएमई स्तर से जारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में सवाल यह है कि पूर्व कार्यकाल के दौरान सामने आए मामलों और शिकायतों की विभागीय स्थिति क्या थी? क्या नियुक्ति से पहले उनके संबंध में कोई जांच या सतर्कता स्तर की रिपोर्ट देखी गई? यदि शिकायतें लंबित थीं तो उन्हें दोबारा इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने का आधार क्या था?
सरकारी सेवा के साथ निजी कंपनी से जुड़ाव का आरोप
डॉ. पंकज पराशर को लेकर एक अन्य शिकायत सरकारी सेवा के दौरान निजी कंपनी से कथित जुड़ाव से संबंधित भी बताई जाती है।
आरोप है कि करीब दो वर्ष पहले एक टीवी कार्यक्रम में उन्होंने स्वयं को इंदौर स्थित एक निजी मेडिकल डिवाइस कंपनी का संस्थापक बताया था। इसके बाद सरकारी सेवा के दौरान निजी कंपनी से उनके कथित संबंधों को लेकर शिकायत की गई थी।
शिकायत में सेवा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। हालांकि, इस मामले में अब तक उनके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं है।
CGMT का पद क्यों है महत्वपूर्ण?
MPPHC में CGMT का पद तकनीकी रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। मेडिकल उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य संबंधी सामग्री की खरीद में तकनीकी मानकों, निविदा प्रक्रिया, निरीक्षण और गुणवत्ता से जुड़े निर्णयों में इस स्तर के अधिकारी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।
ऐसे में यदि किसी खरीद प्रक्रिया में बाद में दस्तावेजी या गुणवत्ता संबंधी गंभीर खामियां सामने आती हैं तो संबंधित प्रक्रिया में शामिल सभी स्तरों की जिम्मेदारी की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
सरकारी खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए केवल संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई करना पर्याप्त है या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
एमपीपीएचसी के एमडी ने क्या कहा?
मामले को लेकर मध्यप्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एमडी मयंक अग्रवाल ने कहा कि फर्जी दस्तावेजों की जांच सही पाए जाने के बाद संबंधित फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
उन्होंने अधिकारियों की जवाबदेही के सवाल पर कहा कि विभागीय जांच के बाद ही कार्रवाई तय होगी। साथ ही उन्होंने बताया कि सप्लाई किए गए उपकरणों की जांच थर्ड एजेंसी से भी कराई जा रही है।
आयुक्त ने जवाब नहीं दिया, CGMT भी रहे मौन
डॉ. पंकज पराशर को तीसरी बार CGMT बनाए जाने और उनके पूर्व कार्यकाल में हुई खरीद प्रक्रियाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त धनराजू एस से सवाल पूछे गए, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला।
वहीं, डॉ. पंकज पराशर से भी इस संबंध में संपर्क किया गया और उन्हें संदेश भेजकर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। खबर लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।
यदि संबंधित अधिकारी या अन्य पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया प्राप्त होती है, तो उसे भी खबर में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।
बड़ा सवाल
दो फर्मों के खिलाफ कार्रवाई और उन्हें ब्लैकलिस्ट किए जाने के बाद अब असली सवाल यह है कि क्या सरकारी खरीद प्रक्रिया में केवल सप्लायर की जवाबदेही तय होगी या उस प्रक्रिया की निगरानी करने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होगी?
सरकारी अस्पतालों के लिए खरीदे जाने वाले करोड़ों रुपये के मेडिकल उपकरण और फर्नीचर सीधे मरीजों की सुविधाओं और सरकारी धन से जुड़े हैं। इसलिए इस पूरे मामले में दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया, तकनीकी निरीक्षण और अधिकारियों की भूमिका की पारदर्शी जांच जरूरी है।
