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भोपाल · 6 मिनट पहले

IAS नेहा मारव्या का तबादलों पर छलका दर्द, बोलीं- एक साल में चौथी बार बदली जिम्मेदारी

50 दिन में फिर बदली पोस्टिंग, IAS अधिकारियों के ग्रुप में पोस्ट कर उठाए सवाल; अधीनस्थ कर्मचारियों के व्यवहार और कार्रवाई को लेकर जताई नाराजगी

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 6 मिनट पहले
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IAS नेहा मारव्या का तबादलों पर छलका दर्द, बोलीं- एक साल में चौथी बार बदली जिम्मेदारी

भोपाल। मध्यप्रदेश की IAS अधिकारी नेहा मारव्या एक बार फिर अपने तबादले को लेकर चर्चा में हैं। 5 सितंबर 2026 को जारी तबादला सूची में उनका नाम आने के बाद उन्होंने IAS अधिकारियों के सोशल मीडिया ग्रुप में अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने दावा किया कि एक साल के भीतर यह उनका चौथा तबादला है और इस बार करीब 50 दिन में ही उनकी जिम्मेदारी बदल दी गई।

भौगोलिक संदर्भ

नेहा मारव्या ने अपनी पोस्ट में अधीनस्थ कर्मचारियों के कथित अनुशासनहीन व्यवहार, फाइलें रोके जाने और दुर्व्यवहार की शिकायत किए जाने के बावजूद कार्रवाई उनके खिलाफ होने पर सवाल उठाया।

‘क्या अधीनस्थ बगावत कर अफसर का ट्रांसफर करा सकते हैं?’

अपनी पोस्ट में नेहा मारव्या ने लिखा कि वह समझती हैं कि IAS अधिकारी होने के नाते सरकार उन्हें जहां चाहे वहां पदस्थ कर सकती है और उन्होंने हमेशा सरकारी आदेशों का सम्मान किया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बार का तबादला उन्हें बेहद हतोत्साहित करने वाला लगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अधीनस्थ कर्मचारियों ने उनके खिलाफ विरोध खड़ा किया और तबादला करवाने की धमकी तक दी। नेहा के मुताबिक, उन्होंने कर्मचारियों के कथित अनुशासनहीनता, फाइलें रोके जाने और दुर्व्यवहार की शिकायत उचित माध्यम से की थी।

इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शिकायत अधिकारी की ओर से की गई थी, तो कार्रवाई का सामना उन्हें ही क्यों करना पड़ा?

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि अधीनस्थ कर्मचारी संगठित होकर किसी अधिकारी के तबादले की स्थिति पैदा कर सकते हैं, तो इसका प्रशासनिक व्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा।

‘एक महीने में कोई अधिकारी काम कैसे समझेगा?’

नेहा मारव्या ने अपनी पोस्ट में कम अवधि की पदस्थापनाओं को लेकर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि किसी अधिकारी को नई जिम्मेदारी संभालने के बाद विभाग की कार्यप्रणाली और संबंधित काम को समझने में समय लगता है।

उनके मुताबिक, जब तक वह नई जिम्मेदारी और कामकाज को समझ पाती हैं, तब तक उनका तबादला हो जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी कम अवधि में कोई अधिकारी प्रभावी तरीके से काम कैसे कर सकता है।

लंबे समय तक पर्याप्त काम नहीं मिलने का भी जिक्र

IAS अधिकारी ने अपनी पोस्ट में अपने पूर्व कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने लंबे समय तक किनारे किए जाने और पर्याप्त काम नहीं मिलने के बावजूद धैर्य बनाए रखा।

उन्होंने दावा किया कि परिस्थितियों में सुधार की उम्मीद थी, लेकिन अब स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो गई है। पोस्ट में उन्होंने अधीनस्थ कर्मचारियों द्वारा कथित तौर पर धमकाए जाने का भी आरोप लगाया।

पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा कि हर बार षड्यंत्र करने वाले जीत जाते हैं और वह हार जाती हैं।

एक साल में चौथी बार जिम्मेदारी बदलने का दावा

5 सितंबर 2026 की तबादला सूची के बाद नेहा मारव्या की पोस्टिंग को लेकर यह मामला फिर चर्चा में आया है। उन्होंने खुद अपनी पोस्ट में एक साल के भीतर चौथी बार जिम्मेदारी बदले जाने का दावा किया है।

इससे पहले भी उनकी अलग-अलग पदस्थापनाओं के दौरान कार्यकाल और प्रशासनिक स्तर पर मतभेदों को लेकर चर्चाएं सामने आती रही हैं।

नेहा मारव्या को डिंडोरी कलेक्टर की जिम्मेदारी भी मिली थी। इससे पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी करीब 14 साल की सेवा के दौरान फील्ड पोस्टिंग नहीं मिलने को लेकर भी अपनी बात रखी थी।

राजस्व विभाग में पदस्थापना के दौरान भी उन्होंने पर्याप्त काम नहीं मिलने को लेकर वरिष्ठ स्तर पर सवाल उठाए थे।

IAS एसोसिएशन की भूमिका पर भी सवाल

नेहा मारव्या की पोस्ट में IAS अधिकारियों के संगठन की भूमिका को लेकर भी नाराजगी दिखाई दी। उन्होंने उम्मीद जताई कि संगठन अधिकारियों को शुभकामनाएं और बधाई देने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अधिकारियों की पेशेवर समस्याओं और कठिन परिस्थितियों पर भी विचार करेगा।

हालांकि, उनकी पोस्ट के बाद ग्रुप में उन्हें किस स्तर का समर्थन मिला, इसे लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं। कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों द्वारा उन्हें तबादलों के साथ अपने कामकाज और व्यवहार का भी आत्ममंथन करने की सलाह दिए जाने की बात कही जा रही है।

‘आज मैं हूं, कल कोई और अधिकारी हो सकता है’

अपनी पोस्ट के अंत में नेहा मारव्या ने इस पूरे मुद्दे को व्यक्तिगत मामले से आगे प्रशासनिक व्यवस्था से जोड़ते हुए सवाल उठाया।

उनका कहना है कि यदि अधीनस्थों के विरोध के बाद किसी अधिकारी का तबादला हो जाता है, तो यह केवल उनका मामला नहीं रहेगा। उन्होंने आशंका जताई कि आज वह ऐसी स्थिति का सामना कर रही हैं, तो भविष्य में कोई दूसरा IAS अधिकारी भी इसी तरह की परिस्थिति में आ सकता है।

अब सवाल पोस्टिंग से ज्यादा सिस्टम पर

नेहा मारव्या की सोशल मीडिया पोस्ट ने मध्यप्रदेश में IAS अधिकारियों की छोटी अवधि की पोस्टिंग, प्रशासनिक स्थिरता, वरिष्ठ-अधीनस्थ संबंध और अधिकारियों की शिकायतों के निस्तारण जैसे मुद्दों को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

भौगोलिक संदर्भ

हालांकि, अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और तबादले के वास्तविक कारणों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच या संबंधित विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।

फिलहाल, नेहा मारव्या की पोस्ट ने एक अहम सवाल जरूर खड़ा कर दिया है—क्या बार-बार होने वाले तबादलों के बीच कोई अधिकारी अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी को पर्याप्त समय देकर प्रभावी ढंग से निभा सकता है?

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