मौतों के बाद भी नहीं थमा जहरीली शराब का कारोबार, MP में 7 साल में 60 से ज्यादा जानें गईं
मध्य प्रदेश में करीब 7 साल में जहरीली और अवैध शराब से 60 से ज्यादा मौतें सामने आईं। उज्जैन, मुरैना, मंदसौर और भिंड के बाद अब फिर अभियान की तैयारी।


भोपाल। मध्य प्रदेश में जहरीली और अवैध शराब का कारोबार लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। पिछले करीब सात वर्षों में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में जहरीली शराब से जुड़े कई मामले सामने आए, जिनमें 60 से ज्यादा लोगों की मौत होने की बात सामने आई है। हर बड़ी घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग ने कार्रवाई की, आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और कई मामलों में अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई। सरकार ने कानून को भी पहले की तुलना में सख्त किया है। इसके बावजूद अवैध शराब की सप्लाई और बिक्री पर पूरी तरह रोक नहीं लग सकी है।
सरकार ने जहरीली शराब से होने वाली मौतों के मामलों में कानून को और कठोर किया है। गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास से लेकर मृत्युदंड तक के प्रावधान किए गए हैं। इसके बावजूद अलग-अलग जिलों से सामने आने वाले मामले यह सवाल खड़ा करते हैं कि कानूनी सख्ती के साथ अवैध शराब के नेटवर्क पर प्रभावी और स्थायी नियंत्रण क्यों नहीं हो पा रहा है।
उज्जैन कांड ने हिला दिया था प्रदेश
अक्टूबर 2020 में उज्जैन में जहरीली शराब से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर खींचा था। इस घटना में 16 लोगों की मौत हुई थी। जांच के दौरान कुछ मृतकों के विसरा में एथिल और मिथाइल अल्कोहल मिलने की बात सामने आई थी।
घटना के बाद अवैध शराब के निर्माण और बिक्री के खिलाफ बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। लेकिन इसके कुछ ही समय बाद प्रदेश में एक और बड़ा शराब कांड सामने आया।
मुरैना में 24 मौतों से मचा हड़कंप
जनवरी 2021 में मुरैना जिले के छैरा और मानपुर गांवों में जहरीली शराब पीने के बाद 24 लोगों की मौत हुई थी। कई लोगों की तबीयत बिगड़ी थी और कुछ पीड़ितों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने की भी जानकारी सामने आई थी।
इस मामले में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद नवंबर 2025 में 14 आरोपियों को 10-10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई।
मंदसौर में भी सामने आया स्प्यूरियस लिकर का मामला
जुलाई 2021 में मंदसौर और आसपास के क्षेत्रों में भी जहरीली शराब का मामला सामने आया था। जांच के लिए गठित एसआईटी ने मामले को स्प्यूरियस लिकर से जुड़ा बताया था। उस समय करीब 11 मौतों की बात सामने आई थी।
पुलिस की ओर से शराब दूसरे राज्य से लाए जाने का दावा किया गया था। इस मामले ने अंतरराज्यीय अवैध शराब तस्करी और सप्लाई नेटवर्क की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए।
भिंड में चार मौत, छह लोग बीमार
जनवरी 2022 में भिंड जिले के इंदुरखी गांव में कथित अवैध शराब पीने से चार लोगों की मौत हुई थी, जबकि छह लोगों के बीमार होने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस ने अवैध शराब बनाने के एक ठिकाने का पता लगाने का दावा किया था। घटना के बाद सात पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित की गई।
कार्रवाई के बाद फिर क्यों लौट आता है नेटवर्क?
प्रदेश में सामने आए इन मामलों में एक पैटर्न दिखाई देता है। किसी बड़ी घटना के बाद पुलिस और आबकारी विभाग सक्रिय होते हैं। अवैध शराब जब्त की जाती है, आरोपियों की गिरफ्तारी होती है और कई बार संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई होती है।
इसके बावजूद कुछ समय बाद किसी दूसरे जिले से अवैध या जहरीली शराब से जुड़ा नया मामला सामने आ जाता है। ऐसे में सवाल सिर्फ कार्रवाई का नहीं, बल्कि अवैध शराब के पूरे सप्लाई नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की व्यवस्था का भी है।
गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों में अनधिकृत तरीके से शराब की बिक्री, दूसरे राज्यों से शराब की कथित तस्करी और स्थानीय स्तर पर अवैध निर्माण जैसी गतिविधियों की निगरानी चुनौती बनी हुई है।
अब फिर अभियान चलाने की तैयारी
प्रदेश के आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने कहा है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अभियान शुरू किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को इस बात पर ध्यान देने के निर्देश दिए हैं कि लोग लाइसेंसी दुकानों के बजाय गांवों में अनधिकृत लोगों से शराब क्यों खरीद रहे हैं और ये लोग शराब की बिक्री किस तरह कर रहे हैं।
सक्सेना के अनुसार, यदि इस तरह के मामले सामने आ रहे हैं तो व्यवस्था में कहीं न कहीं खामियां हैं। इन्हें दूर करने के लिए कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि नीति में कोई कमी सामने आती है तो उसे भी ठीक किया जाएगा।
कानून सख्त, लेकिन चुनौती अब भी जमीन पर
मध्य प्रदेश में जहरीली शराब के खिलाफ कानूनी प्रावधानों को सख्त किए जाने के बावजूद चुनौती केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है। असली सवाल यह है कि अवैध शराब बनाने वाले, सप्लाई करने वाले और बेचने वाले नेटवर्क तक प्रशासन कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच पाता है।
लगातार सामने आए मामलों से यह स्पष्ट है कि केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय अवैध शराब की सप्लाई चेन, स्थानीय स्तर पर होने वाली बिक्री और अंतरराज्यीय तस्करी पर लगातार निगरानी की जरूरत है। अब आबकारी विभाग द्वारा प्रस्तावित अभियान इस दिशा में कितना प्रभावी साबित होता है, यह आने वाले समय में सामने आएगा।
