थाने की 'नोटिस स्ट्राइक' से हड़कंप: क्या अब खुद ही बुने जाल में फंस गए MPWLC के प्रबंधक हेमंत चंदेल?
नर्मदापुरम के माखननगर में अमानक मूंग खरीदी कांड में नया मोड़! FIR दर्ज कराने वाले MPWLC शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल को पुलिस ने 94 BNSS का कड़ा नोटिस थमाकर 10 अहम रिकॉर्ड मांगे हैं। जानिए क्या है पूरा मामला।


नर्मदापुरम/माखननगर। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी को लेकर शुरू हुआ भ्रष्टाचार का जिन्न अब ऐसा विकराल रूप ले चुका है, जिसने समूचे प्रशासनिक तंत्र की नींद उड़ा दी है। जिस महाघोटाले की नींव व्यापारियों, दलालों और भ्रष्ट तंत्र के नापाक गठजोड़ पर रखी गई थी, उसमें अब रोज़ नए और चौंकाने वाले मोड़ आ रहे हैं।
चर्चित स्टिंग ऑपरेशन के बाद जब प्रशासनिक अमले में भगदड़ मची, तो आनन-फानन में मामला दर्ज कराकर खुद को पाक-साफ दिखाने की कोशिश की गई। मध्य प्रदेश वेयरहाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉर्पोरेशन (MPWLC) के माखननगर शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल द्वारा पुलिस के समक्ष आवेदन देकर 9 अगस्त 2026 को अपराध क्रमांक 593/26, धारा 318(4), 3(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज करवाई गई थी।
लेकिन, कानूनी चौसर का यह दांव अब खुद शाखा प्रबंधक के गले की फांस बनता दिख रहा है!
सूत्रो से प्राप्त जानकारी के अनुसार माखननगर थाना प्रभारी ने दिनांक 03 सितंबर 2026 को धारा 94 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के तहत एक ऐसा कड़ा, बिंदुवार और कड़क नोटिस MPWLC शाखा प्रबंधक को थमाया है, जिसने वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन से लेकर जिला कार्यालय तक में हड़कंप मचा दिया है। पुलिस के इस 10-बिंदु वाले 'स्ट्राइक नोटिस' ने साफ कर दिया है कि कागज़ी लीपापोती का दौर अब खत्म हो चुका है और टालमटोल करने पर सीधे जेल की सलाखें इंतज़ार कर रही हैं।
स्टिंग ऑपरेशन का सच: आरोप 'व्यापारियों' पर थे, तो कार्रवाई 'मूंग की बोरियों' पर क्यों?
इस पूरे घटनाक्रम में 'देनवापोस्ट' ने शुरुआत से ही कई तीखे और बुनियादी सवाल खड़े किए थे।
पहला बड़ा सवाल:
स्टिंग ऑपरेशन में साफ तौर पर यह उजागर हुआ था कि किस तरह बिचौलियों और बड़े व्यापारियों की घटिया और पुरानी मूंग को गरीब किसानों के नाम और उनके पंजीयन (Khasra/Samiti Registration) का गलत इस्तेमाल करके सरकारी खरीदी केंद्रों में खपाया जा रहा था। यह सीधे तौर पर 'व्यापारी-समिति-वेयरहाउस' के त्रिकोण का अरबों रुपये का घोटाला था।
दूसरा बड़ा सवाल:
जब स्टिंग में व्यापारियों के नाम, खरीदी केंद्रों की सांठगांठ और फर्जीवाड़े का पर्दाफाश हुआ, तो जांच का दायरा केवल "अमानक मूंग" और "कम वजन की बोरियों" तक ही सीमित क्यों कर दिया गया? असली गुनहगारों (व्यापारियों और सिंडिकेट के आकाओं) तक पुलिस और प्रशासन के हाथ पहुँचने से पहले ही फाइल को गुणवत्ता की आड़ में बंद करने की कोशिश क्यों हुई?
कानूनी जानकारों और जमीनी विशेषज्ञों का मानना है कि शाखा प्रबंधक द्वारा हड़बड़ी में दर्ज कराई गई FIR असल में एक 'कवर-अप' (बचाव की चाल) थी, ताकि ऊपर से नीचे तक फैले भ्रष्टाचार के बड़े चेहरों को बचाया जा सके। लेकिन, माखननगर पुलिस द्वारा जारी धारा 94 BNSS के नोटिस ने इस पूरे बुने हुए जाल को छिन्न-भिन्न कर दिया है।
05 अगस्त का पंचनामा और 45-48 किलो तौल कांड!
पुलिस द्वारा जांच में लिए गए दस्तावेजों के अनुसार, 5 अगस्त 2026 को जिला विपणन अधिकारी के जांच दल द्वारा माखननगर स्थित वेयरहाउस का औचक निरीक्षण किया गया था। इस निरीक्षण के दौरान जो पंचनामा तैयार हुआ, उसने सरकारी दावों की धज्जियां उड़ा दी थीं।
अमानक मूंग के ढेर: वेयरहाउस के स्टैक क्रमांक 19, 20 और 06 में बड़े पैमाने पर अमानक (Sub-standard) मूंग की बोरियां पाई गईं।
सरेआम कम तौल : स्टैक क्रमांक 20 की जब रैंडम चेकिंग की गई और बोरियों को तौला गया, तो उनका वजन 45 से 48 किलोग्राम के बीच मिला। जबकि नियमानुसार प्रत्येक बोरी में मानक वजन (50 किलोग्राम निर्धारित) होना अनिवार्य है।
सवाल यह उठता है कि जब बोरियां खरीदी केंद्र से वेयरहाउस में प्रवेश कर रही थीं, तब वहां के गुणवत्ता नियंत्रक (Quality Controller) और शाखा प्रबंधक क्या कर रहे थे? क्या 2 से 5 किलो प्रति बोरी का यह कम वजन सीधे तौर पर करोड़ों रुपये की चोरी नहीं है?
पुलिस का '10-पॉइंट डेथ वारंट': थानेदार के इन सवालों का क्या जवाब देंगे प्रबंधक?
माखननगर थाना प्रभारी ने दो पन्नों के अपने विस्तृत पत्र में MPWLC शाखा प्रबंधक से धारा 94 BNSS के तहत असल प्रतियां और प्रमाणीकृत ब्योरा तलब किया है। पुलिस के ये 10 सवाल सीधे तौर पर घोटाले की तह तक पहुँचने वाले हैं:
गुणवत्ता और आंकड़ों पर कड़े सवाल
जांच दल का आदेश व पहचान: जिला विपणन अधिकारी (DMO) द्वारा खरीदी केंद्रों और वेयरहाउस के औचक निरीक्षण के लिए गठित जांच दल का मूल आदेश क्या था? उसमें शामिल अधिकारियों/कर्मचारियों के नाम और पदनाम क्या हैं?
अमानक मूंग का कुल आंकड़ा: वेयरहाउस के स्टैक नंबर 19, 20 और 06 में पाई गई अमानक मूंग की कुल बोरियों की संख्या कितनी थी और उसकी कुल मात्रा (क्विंटल में) कितनी दर्ज की गई?
कम तौल का हिसाब: स्टैक क्रमांक 20 में 45 से 48 किलोग्राम वजन वाली पाई गई बोरियों की कुल संख्या कितनी थी और उनमें मूंग की कुल मात्रा कितनी निकली?
कचरा, मिट्टी और मिलावट का पैमाना: उपार्जित मूंग की कितनी बोरियों में मानक स्तर से अधिक मिट्टी, विजातीय तत्व (Foreign matter), दाल/कचरा और डिस्कलर (रंग उड़ी हुई) मूंग पाई गई? इनकी कुल मात्रा कितनी थी?
जवाबदेही और कागज़ी सबूतों की मांग
गोदाम संचालक का नोटिस व जवाब: 03 अगस्त 2026 को गोदाम संचालक को भेजे गए प्रतिवेदन की प्राप्ति रसीद और उसके द्वारा दिए गए आधिकारिक जवाब की मूल प्रति।
पंचों और गवाहों का ब्योरा: 05 अगस्त 2026 को तैयार किए गए पंचनामा में उपस्थित सभी हस्ताक्षरकर्ताओं, गवाहों और पंचों का पूरा विवरण।
खरीदी केंद्र निर्धारण का आदेश: वेयरहाउस में मूंग उपार्जन के संबंध में जिला विपणन अधिकारी द्वारा जारी किया गया आधिकारिक केंद्र निर्धारण आदेश।
स्टैक पंचनामा: वेयरहाउस में उपार्जित मूंग की बोरियां कुल कितने स्टैकों में रखी गईं, इसका प्रामाणिक पंचनामा।
स्टैक चेक रिपोर्ट: अमानक मूंग पाए जाने के संबंध में समय-समय पर किए गए 'स्टैक चेक' (Stack Check) की आधिकारिक रिपोर्ट।
सरकारी नियम व गाइडलाइन: मूंग को 'अमानक' घोषित किए जाने से संबंधित शासन द्वारा जारी पैमाना आदेश (Quality Parameters) और आधिकारिक गाइडलाइन की प्रति।
पुलिस ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि धारा 94 BNSS के तहत इन सभी पत्राचारों और जानकारियों की असल (Original) प्रतियां तत्काल थाने में जमा कराई जाएं ताकि मामले में अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा सके।
कानूनी पेंच: 94 BNSS की अवहेलना पर सीधे जेल!
माखननगर शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल के लिए स्थिति इसलिए बेहद नाजुक हो गई है क्योंकि भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के नए कठोर प्रावधानों के तहत पुलिस और अदालत के निर्देशों की अनदेखी करना भारी आपराधिक अपराध है।
इस पूरे कानूनी पेंच पर वरिष्ठ अधिवक्ता विनीत वर्मा का कहना है:
"यदि कोई सरकारी अधिकारी या व्यक्ति पुलिस अथवा अदालत द्वारा धारा 94 BNSS (पूर्व में CrPC की धारा 91) के तहत जारी किए गए समन या दस्तावेज प्रस्तुतीकरण आदेश का बिना किसी वैध कानूनी कारण के पालन नहीं करता, तो उस पर भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।"
"अदालत या जांच एजेंसी के वैध आदेश का पालन न करने या उसमें रुकावट डालने पर एक महीने तक की साधारण जेल और जुर्माने की सजा का स्पष्ट प्रावधान है। इतना ही नहीं, यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि संबंधित व्यक्ति ने किसी गंभीर आपराधिक मामले (जैसे करोड़ों के घोटाले या धोखाधड़ी) से जुड़े साक्ष्यों या दस्तावेजों को जानबूझकर छुपाया, नष्ट किया या देने से मना किया, तो उस पर धारा 238 BNS (साक्ष्य विलोपन/Evidence Tampering) जैसी गंभीर गैर-जमानती धाराएं भी लगाई जा सकती हैं, जिसमें कई सालों की कठोर जेल की सजा शामिल है।"
घोटाले की पूरी टाइमलाइन (Timeline): कैसे गहराया संकट?
जुलाई 2026:नर्मदापुरम क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन मूंग खरीदी में व्यापारियों द्वारा किसानों के नाम पर मूंग बेचने का स्टिंग ऑपरेशन वायरल हुआ।
03 अगस्त 2026:अनियमितताओं के बाद गोदाम संचालक को पहला आधिकारिक प्रतिवेदन/कारण बताओ नोटिस भेजा गया।
05 अगस्त 2026:जांच दल का औचक निरीक्षण। स्टैक 06, 19, 20 में अमानक मूंग और 45-48 किग्रा की घटतौली वाली बोरियों का पंचनामा तैयार।
09 अगस्त 2026:शाखा प्रबंधक MPWLC द्वारा माखननगर थाने में FIR दर्ज (क्र. 593/26, धारा 318(4), 3(5) BNS)।
03 सितंबर 2026:थाना प्रभारी माखननगर द्वारा धारा 94 BNSS का नोटिस जारी। 10 बिंदुओं पर असल दस्तावेज तलब।
देनवापोस्ट का कड़ा सवाल: क्या बलि का बकरा बनाए जा रहे हैं छोटे प्यादे?
नर्मदापुरम का यह मूंग घोटाला सिर्फ कुछ बोरियों में मिट्टी या 2 किलो मूंग कम होने का मामला नहीं है। यह पूरा खेल "सिंडिकेट राज" की ओर इशारा करता है:
व्यापारियों का गिरोह: मंडी से कम दाम में घटिया मूंग खरीदकर, उसे सरकारी समर्थन मूल्य (MSP) पर बेचने वाला गिरोह कौन चला रहा है?
सॉफ्टवेयर और पोर्टल की सांठगांठ: जिन किसानों के नाम पर खरीदी दर्ज की गई, क्या उन्हें इसका पता भी है या उनके खाते केवल कागजों पर इस्तेमाल हुए?
वेयरहाउसिंग की भूमिका: क्या शाखा प्रबंधक केवल ऊपर से मिले दबाव में काम कर रहे थे, या फिर वे भी इस मलाईदार खेल में बराबर के साझेदार थे?
अब जब माखननगर थाना प्रभारी ने धारा 94 BNSS का डंडा चलाया है, तो शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल के सामने दो ही रास्ते बचे हैं—या तो वे पुलिस के 10 कड़े सवालों के सही और असल दस्तावेजी सबूत देकर पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करें, या फिर जांच में असहयोग करके खुद मुख्य आरोपी की कतार में खड़े हो जाएं।

