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नर्मदापुरम/माखननगर · 18 दिन पहले

न समिति से न वेयरहाउस से... फिर मूंग खरीदी में किसके लिए सक्रिय हैं ये अनजान चेहरे?

कार्रवाई के बाद समिति प्रबंधकों का संगठन तहसील पहुंचा, अधिकारियों के सामने रखा पक्ष; साथ दिखे ऐसे कई चेहरे जिनकी खरीदी व्यवस्था में कोई स्पष्ट आधिकारिक भूमिका नहीं

देनवा पोस्ट
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समाचार डेस्क · 18 दिन पहले
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न समिति से न वेयरहाउस से... फिर मूंग खरीदी में किसके लिए सक्रिय हैं ये अनजान चेहरे?

नर्मदापुरम/माखननगर। मूंग खरीदी में कथित अनियमितताओं को लेकर सामने आए मामले और कार्रवाई के बाद सोमवार को माखननगर ब्लॉक में खरीदी कर रहे समिति प्रबंधकों का संगठन तहसील प्रांगण में एकत्र हुआ। समिति प्रबंधकों और संबंधित पक्षों ने अधिकारियों से मुलाकात कर अपना पक्ष रखा और ज्ञापन सौंपे। ज्ञापनों में कार्रवाई, खरीदी व्यवस्था और किसानों को हो रही परेशानी से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले की उचित जांच के बाद ही कार्रवाई की जानी चाहिए।

यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भास्कर के चर्चित स्टिंग ऑपरेशन के बाद मामले में कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन सोमवार को अधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखने पहुंचे लोगों के बीच एक दूसरा सवाल भी सामने आया कि इनमें कुछ ऐसे चेहरे आखिर कौन हैं, जिनकी खरीदी व्यवस्था में कोई स्पष्ट आधिकारिक भूमिका नजर नहीं आती?

न वे समिति प्रबंधक हैं, न वेयरहाउस संचालक या उनके परिजन, न सर्वेयर और न ही हम्माल। फिर मूंग खरीदी के इस विवाद में इनकी दिलचस्पी क्या है? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय स्तर पर ऐसे कई लोगों को खरीदी शुरू होने के साथ ही केंद्रों के आसपास लगातार सक्रिय देखे जाने की बात कही जा रही है।

तहसील पहुंचे समिति प्रबंधक, अधिकारियों के सामने रखा अपना पक्ष

माखननगर ब्लॉक में मूंग खरीदी कर रहे समिति प्रबंधकों का संगठन तहसील प्रांगण में जुटा। समिति प्रबंधकों ने अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी बात रखी। इस दौरान ज्ञापन भी दिए गए।

ज्ञापनों में मुख्य रूप से वेयरहाउस संचालक और समिति प्रबंधक के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर आपत्ति दर्ज कराई गई है। एक ज्ञापन में वेयरहाउस संचालक और समिति प्रबंधक के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया है कि जब तक उचित जांच न हो, तब तक वेयरहाउस बंद रखने और तुलाई नहीं कराने जैसी मांग भी रखी गई है।

ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यदि उपार्जन नीति के अनुसार मूंग अमानक पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई के तरीके और जांच को लेकर भी संबंधित पक्ष ने अपना पक्ष प्रशासन के सामने रखा है।

यानी कार्रवाई को लेकर संबंधित पक्ष की आपत्ति और उनका पक्ष अब प्रशासन के रिकॉर्ड में है।

लेकिन इसी घटनाक्रम के बीच एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब अभी सामने आना बाकी है।

सवाल उन चेहरों का... आखिर ये लोग हैं कौन?

तहसील प्रांगण में अधिकारियों से मिलने पहुंचे लोगों में कुछ ऐसे चेहरे भी नजर आए, जिनकी समिति प्रबंधक, वेयरहाउस संचालक, उनके परिजन, सर्वेयर या हम्माल के रूप में कोई स्पष्ट पहचान सामने नहीं आई।

यहां सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि उसकी भूमिका जानने का है।

यदि कोई व्यक्ति खरीदी व्यवस्था का आधिकारिक हिस्सा नहीं है तो वह इस विवाद में इतना सक्रिय क्यों है?

क्या वह किसानों के साथ आया है?

क्या किसी समिति या वेयरहाउस से उसका कोई अप्रत्यक्ष संबंध है?

क्या उसका कोई व्यापारिक हित जुड़ा है?

या फिर खरीदी केंद्र पर उसकी मौजूदगी का कोई दूसरा कारण है?

इन सवालों के जवाब अनुमान से नहीं, जांच से सामने आने चाहिए।

और बड़ा सवाल: ये वही लोग तो नहीं, जो रोज खरीदी केंद्रों पर दिखते हैं?

स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि कुछ ऐसे लोग हैं, जिन्हें मूंग उपार्जन शुरू होने के बाद से खरीदी केंद्रों के आसपास नियमित रूप से देखा जाता है। कभी कोई कार में बैठा नजर आता है, कभी बाइक पर और कभी सड़क किनारे खड़ा दिखाई देता है।

यदि कोई व्यक्ति खरीदी प्रक्रिया में अधिकृत नहीं है और इसके बावजूद सुबह से शाम तक लगातार केंद्र के आसपास मौजूद रहता है, तो स्वाभाविक रूप से यह जानना जरूरी है कि उसकी वहां मौजूदगी की वजह क्या है।

यह भी जांच का विषय होना चाहिए कि क्या तहसील में अधिकारियों से मिलने पहुंचे और खरीदी केंद्रों पर नियमित रूप से दिखाई देने वाले चेहरों में कोई समानता है।

अगर ऐसा है तो यह महज संयोग है या इसके पीछे कोई कनेक्शन?

*CCTV से मिल सकता है जवाब, प्रशासन चाहे तो शुरू हो सकती है जांच*

यदि संबंधित मूंग खरीदी केंद्रों पर CCTV कैमरे लगे हैं तो प्रशासन के पास इस सवाल का जवाब तलाशने का एक सीधा रास्ता मौजूद है।

उपार्जन शुरू होने के दिन से अब तक की CCTV रिकॉर्डिंग देखी जा सकती है। इससे पता चल सकता है कि कौन लोग रोज केंद्र पर पहुंचते हैं, कितनी देर रुकते हैं, किससे मिलते हैं और उनकी गतिविधियां क्या रहती हैं।

इसके बाद इन चेहरों की पहचान समिति प्रबंधकों, वेयरहाउस संचालकों, सर्वेयर, हम्माल और अन्य अधिकृत लोगों से अलग की जा सकती है।

जरूरी यह नहीं कि कैमरे में दिखने वाला हर व्यक्ति संदिग्ध हो। जरूरी यह है कि जिसकी कोई आधिकारिक भूमिका नहीं है, उसकी लगातार मौजूदगी का कारण भी जांच में स्पष्ट हो।

स्टिंग के बाद कार्रवाई हुई, अब जांच का दायरा और बड़ा होना चाहिए

मूंग खरीदी में सामने आए मामले में भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। अब जरूरी यह है कि मामले की जांच हर उस कड़ी तक पहुंचे, जिसका इस पूरी व्यवस्था से कोई संबंध सामने आता है।

समिति प्रबंधकों और संबंधित पक्षों ने आज ज्ञापन देकर अपना पक्ष रख दिया है। उनका पक्ष भी जांच का हिस्सा होना चाहिए। लेकिन इसके साथ यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि खरीदी केंद्रों पर नियमित रूप से सक्रिय रहने वाले वे लोग कौन हैं, जो आधिकारिक खरीदी व्यवस्था का हिस्सा दिखाई नहीं देते।

क्योंकि यदि प्रशासन इस पूरे विवाद का निष्पक्ष और अंतिम समाधान चाहता है तो जांच सिर्फ “किसके खिलाफ कार्रवाई हुई” तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह भी पता लगना चाहिए कि “कौन-कौन लोग इस व्यवस्था के आसपास सक्रिय थे और क्यों?”

पांच सवाल, जिनके जवाब अब प्रशासन को तलाशने चाहिए

1. खरीदी केंद्रों पर रोजाना मौजूद रहने वाले गैर-अधिकृत लोग कौन हैं?

2. उनका किसी समिति, वेयरहाउस, व्यापारी या अन्य संबंधित पक्ष से कोई संबंध है या नहीं?

3. खरीदी शुरू होने से लेकर अब तक वे केंद्रों पर कितनी बार और कितने समय तक मौजूद रहे?

4. CCTV रिकॉर्डिंग में उनकी मौजूदगी और गतिविधियां क्या दिखाई देती हैं?

5. आज अधिकारियों से अपना पक्ष रखने पहुंचे लोगों में क्या वही चेहरे भी शामिल थे, जो रोज खरीदी केंद्रों पर दिखाई देते हैं?

इन सवालों के जवाब सामने आए तो मूंग खरीदी विवाद की तस्वीर का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा साफ हो सकता है।

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