रीवा के प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर पर सियासी घमासान, उमंग सिंघार ने साइट बदलने की मांग उठाई
सरई गांव में परियोजना, जमीन अधिग्रहण और ग्रामसभा की अनुमति पर सवाल; जल सत्याग्रह, विमला कोल की मौत और पर्यावरणीय प्रभावों की जांच की मांग


भोपाल। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के सरई गांव में प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने परियोजना की मंजूरी, जमीन अधिग्रहण और स्थानीय ग्रामीणों की सहमति को लेकर सवाल उठाते हुए सरकार से परियोजना की साइट बदलने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि परियोजना के कारण आदिवासी, दलित और किसान परिवारों के विस्थापन का खतरा पैदा हो सकता है तथा ग्रामीणों के विरोध और जल सत्याग्रह को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है।
सोमवार को भोपाल स्थित अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए सिंघार ने परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि परियोजना के लिए आबादी, पर्यावरण और सुरक्षा से जुड़े मानकों का आकलन किस आधार पर किया गया है।
ग्रामसभा की अनुमति और दस्तावेजों पर उठाए सवाल
उमंग सिंघार ने परियोजना से जुड़ी बोरिंग की अनुमति के दस्तावेज पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि ग्राम पंचायत की ओर से अनुमति दिए जाने संबंधी दस्तावेज की प्रामाणिकता संदिग्ध है। उनके मुताबिक, सरपंच कोमल संजय सिंह ने आयुक्त और कलेक्टर को पत्र लिखकर संबंधित दस्तावेज को फर्जी बताया है।
सिंघार ने मामले की जांच कराने की मांग करते हुए सवाल किया कि यदि ग्रामसभा ने अनुमति देने से इनकार किया था, तो परियोजना से संबंधित गतिविधियां किस आधार पर आगे बढ़ाई जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि सरकारी जमीन के अतिरिक्त बिजलीघर के लिए करीब 150 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ग्रामीण लंबे समय से जल सत्याग्रह कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हो रही। सिंघार ने प्रदर्शनकारियों को हटाने की धमकी दिए जाने का आरोप भी कलेक्टर पर लगाया। इन आरोपों पर संबंधित प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल की मौत का मामला उठाया
नेता प्रतिपक्ष ने जल सत्याग्रह के दौरान विमला कोल की मौत का मुद्दा उठाते हुए उनके परिवार को आर्थिक सहायता देने की मांग की। सिंघार ने कहा कि महिला के कई दिनों तक आंदोलन में शामिल रहने की जानकारी सामने आई थी, जबकि प्रशासन की ओर से उनकी मौत को सामान्य बताया जा रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मामले में स्थिति स्पष्ट करने और मौत से जुड़े तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। हालांकि, मौत का कारण और आंदोलन से उसका संबंध जांच एवं आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही स्पष्ट हो सकेगा।
केन-बेतवा परियोजना के मुआवजे में अनियमितताओं का आरोप
सिंघार ने पन्ना क्षेत्र में केन-बेतवा और मझगांव-रुंज परियोजनाओं से प्रभावित लोगों के मुआवजे का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अपात्र लोगों को मुआवजा मिल गया, जबकि पात्र प्रभावितों को अब तक भुगतान संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से पहले दिए गए जांच के आश्वासन का हवाला देते हुए कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार की गिरफ्तारी का मामला उठाकर उनकी रिहाई की मांग की। सिंघार के अनुसार, दिव्या 25 दिन से अधिक समय से जेल में हैं और चालान पेश नहीं किया गया है। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
ओबीसी आरक्षण पर विशेष सत्र बुलाने की मांग
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर भी उमंग सिंघार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि आरक्षण के विषय पर सदन में चर्चा होनी चाहिए और सभी दलों की सहमति से प्रस्ताव पारित किया जाना चाहिए।
इसके अलावा, महेश्वर में बड़ी संख्या में मतदाता पहचान पत्र मिलने के मामले की जांच कराने की मांग भी उन्होंने उठाई। भाजपा की ओर से कांग्रेस कार्यालय के घेराव को लेकर पूछे गए सवाल पर सिंघार ने आरोप लगाया कि इसके जरिए मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़ी कथित गड़बड़ियों के मुद्दे से ध्यान हटाने की कोशिश की जा रही है।
विधानसभा से न्यायालय तक मुद्दा उठाने की बात
प्रस्तावित परमाणु बिजलीघर को लेकर सिंघार ने कहा कि कांग्रेस इस मामले को विधानसभा में उठाएगी और आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का रुख भी करेगी।
फिलहाल परियोजना की अनुमति, जमीन अधिग्रहण, ग्रामसभा से जुड़े दस्तावेज, जल सत्याग्रह और पर्यावरणीय सुरक्षा को लेकर लगाए गए आरोपों पर सरकार तथा संबंधित प्रशासन का पक्ष महत्वपूर्ण है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और आधिकारिक जांच के बाद ही परियोजना से जुड़े विवादों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

