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देनवा एक्सक्लूसिव · 10 मिनट पहले

ग्राम पंचायत पथरोटा में सोलर खरीदी का बड़ा खेल! ₹12.75 लाख का भुगतान, बाजार मूल्य सिर्फ ₹5.70 लाख

सरकारी खरीद में पारदर्शिता के दावों की खुली पोल;ओपन मार्केट से ₹7 लाख से ज्यादा खर्च क्यों? अधिकारियों की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल!

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 10 मिनट पहले
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ग्राम पंचायत पथरोटा में सोलर खरीदी का बड़ा खेल! ₹12.75 लाख का भुगतान, बाजार मूल्य सिर्फ ₹5.70 लाख

नर्मदापुरम।सरकारी कार्यालयों में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं पर लगाम लगाने के लिए बनाए गए गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (GeM) पोर्टल का इस्तेमाल अब किस तरह सरकारी धन लूटने का जरिया बनाया जा रहा है, इसका एक और सनसनीखेज मामला नर्मदापुरम जिले के केसला जनपद से सामने आया है। केसला जनपद की ग्राम पंचायत पथरोटा में 5 केवी और 10 केवी सोलर सिस्टम की स्थापना के नाम पर नियमों को ताक पर रखकर 12 लाख 75 हजार 239 रुपये का भारी-भरकम भुगतान वेंडर को कर दिया गया है।

सबसे बड़ा और चौंकने वाला पहलू यह है कि यही सोलर सिस्टम ओपन मार्केट में महज 5 लाख 70 हजार रुपये के आसपास उपलब्ध है। बाजार दरों की तुलना में वेंडर को 7 लाख 5 हजार रुपये से अधिक का अतिरिक्त भुगतान क्यों और किस आधार पर किया गया? इस सीधा और गंभीर सवाल का जवाब देने के लिए न तो पंचायत सचिव के पास कोई ठोस तर्क है और न ही जिम्मेदार जनपद अधिकारी इस पर कुछ बोलने को तैयार हैं।

नर्मदापुरम में गरमाया GeM पोर्टल घोटाला

गौरतलब है कि हाल ही में नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) संजय दुबे ने प्रदेश के नगरीय निकायों में GeM पोर्टल के जरिए चल रहे वित्तीय फर्जीवाड़े और अनियमितताओं के मामलों को जिस आक्रामक तरीके से उजागर किया था, उसने पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मचा दिया था। एसीएस संजय दुबे जैसे तेज-तर्रार और बेबाक अधिकारियों की कार्यशैली से यह साफ हो चुका है कि सरकारी पोर्टलों और ऑनलाइन माध्यमों की आड़ में किस तरह सुनियोजित तरीके से बंदरबांट की जा रही है।

लेकिन विडंबना यह है कि यह बीमारी सिर्फ नगरीय निकायों तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय कार्यालयों और ग्राम पंचायतों तक पैर पसार चुकी है। याद कीजिए, कुछ वर्ष पहले ग्राम पंचायतों में 'स्वच्छता' के नाम पर GeM पोर्टल के जरिए की गई खरीदी में बड़ा खेल हुआ था, जिसे देनवापोस्ट ने प्रमुखता से उठाया था। यदि उस समय की गई खरीदारियों की निष्पक्ष और गहराई से जांच करवा ली जाए, तो राज्य में करोड़ों रुपये का घपला उजागर हो सकता है। हालांकि, इस तरह के बड़े घोटालों की परतों को उधेड़ने के लिए शासन में संजय दुबे जैसे सख्त और ईमानदार अधिकारियों की सख्त जरूरत है।

चार वाउचर, एक वेंडर और सितंबर 2026 में हुआ ताबड़तोड़ भुगतान

पथरोटा पंचायत में किए गए इस खेल के वित्तीय दस्तावेज और भुगतान के आंकड़े बेहद चौकाने वाले हैं। सितंबर 2026 के दौरान कुल चार अलग-अलग वाउचर के माध्यम से विदिशा की फर्म ECO SOLAR PANELS को कुल ₹12,75,239 (बारह लाख पचहत्तर हजार दो सौ उनतालीस रुपये) का भुगतान किया गया है।

वित्तीय विवरण के मुताबिक ये भुगतान इस प्रकार किए
वित्तीय विवरण के मुताबिक ये भुगतान इस प्रकार किए

आखिर किसकी जेब में गया जनता का पैसा?

सूत्रों और ओपन मार्केट के जानकारों के मुताबिक, बाजार में इसी क्षमता (5 केवी एवं 10 केवी) के सोलर सिस्टम की वास्तविक लागत और फिटिंग का खर्च जोड़ लें, तो यह सामान अधिकतम 5 लाख 70 हजार रुपये तक में आसानी से मिल जाता है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि:

क्या GeM पोर्टल पर बाजार से दोगुने-तिगुने दाम पर वेंडर पंजीकृत थे?

क्या पथरोटा पंचायत के जिम्मेदारों ने बाजार दरों का कोई तुलनात्मक अध्ययन (Market Survey) नहीं किया था?

क्या इस भारी-भरकम भुगतान के एवज में कमीशनखोरी का कोई बड़ा खेल खेला गया है?

क्या इस खरीद में उच्चाधिकारियों की मिलीभगत है, जिसके कारण वेंडर को नियमों के विपरीत जाकर इतना भारी भुगतान जारी किया गया?

ECO SOLAR PANELS INVOICE I
ECO SOLAR PANELS INVOICE I

जब 'देनवापोस्ट' ने की पड़ताल, तो जिम्मेदारों की बोलती बंद

इस संवेदनशील मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए जब देनवापोस्ट की टीम ने धरातल पर पड़ताल शुरू की, तो पंचायत से लेकर जनपद स्तर तक के जिम्मेदार अधिकारियों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं।

पंचायत सचिव ने झाड़ा पल्ला: जब देनवापोस्ट टीम ने ग्राम पंचायत पथरोटा के सचिव ओमकार सिंह सिसोदिया से इस वित्तीय अनियमितता और अधिक भुगतान के संबंध में पक्ष जानना चाहा, तो उनका रटा-रया जवाब था— "आप इस मामले में सीधे उच्च अधिकारियों से ही बात करें, वही इसके बारे में कुछ बता पाएंगे।" सचिव महोदय अपनी ही पंचायत में हुए लाखों के खेल से पूरी तरह पल्ला झाड़ते नजर आए।

जनपद CEO की चुप्पी दे रही बड़े इशारे: मामले की प्रामाणिकता और आधिकारिक पक्ष जानने के लिए देनवापोस्ट ने केसला जनपद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सुमन खातरकर से कई बार मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। इसके बाद जब उन्हें व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर पूरी जानकारी चाही गई, तो घंटों इंतजार के बाद सीईओ की तरफ से सिर्फ इतना संक्षिप्त जवाब आया— "मैं अभी मीटिंग में हूं।"

ECO SOLAR PANELS INVOICE II
ECO SOLAR PANELS INVOICE II

सबसे बड़ा सवाल यह है कि एक तरफ जहां सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला सामने आया है, वहीं एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी का 24 घंटे बीत जाने के बाद भी इस पर कोई ठोस प्रतिक्रिया या जवाब न देना क्या इशारा करता है? क्या अधिकारियों की यह चुप्पी इस बात की तस्दीक करती है कि इस पूरे मामले में 'दाल में कुछ काला' नहीं बल्कि पूरी दाल ही काली है और सब मिलकर पर्दा डालने की फिराक में हैं?

केसला जनपद की ग्राम पंचायत पथरोटा में सोलर खरीदी के नाम पर हुआ यह वित्तीय घालमेल ग्रामीण विकास योजनाओं में फैले भ्रष्टाचार की पोल खोलने के लिए काफी है। 15वें वित्त आयोग या अन्य योजनाओं के तहत मिलने वाले शासकीय अनुदान का इस तरह खुलेआम दुरुपयोग किया जाना बेहद चिंताजनक है।

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