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मुंबई · 20-08-2026

महाराष्ट्र में खाद्य तेल पर FDA की सख्ती, खुले तेल से लेकर बार-बार इस्तेमाल तक होगी निगरानी

महाराष्ट्र FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खाद्य तेल पर सख्ती के संकेत दिए। खुले तेल, मिलावट, पैकेजिंग और बार-बार इस्तेमाल पर होगी निगरानी।

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समाचार डेस्क · 20-08-2026
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महाराष्ट्र में खाद्य तेल पर FDA की सख्ती, खुले तेल से लेकर बार-बार इस्तेमाल तक होगी निगरानी

मुंबई। महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने ‘सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के अगले चरण में खाद्य तेल को प्रमुख फोकस बनाने का फैसला किया है। FDA आयुक्त तुकाराम मुंढे ने खुले खाद्य तेल की बिक्री, तेल की पैकेजिंग, मिलावट और खाना पकाने के तेल के बार-बार इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि खाद्य तेल के उत्पादन से लेकर पैकेजिंग, वितरण और इस्तेमाल तक पूरी सप्लाई चेन में नियमों का पालन अनिवार्य होगा।

मुंढे ने नियमों का उल्लंघन करने वाले खाद्य कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी है।

खुले तेल की बिक्री पर उठे सवाल

FDA आयुक्त ने खुले खाद्य तेल की बिक्री को लेकर कहा कि ऐसे तेल में उसके निर्माण के स्रोत और निर्माण की तारीख की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं होती। ऐसे में यदि खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कोई घटना सामने आती है तो उत्पाद के स्रोत का पता लगाना और कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है।

उनके मुताबिक, खाद्य तेल की ट्रेसबिलिटी यानी उत्पाद कहां बना, कब बना और किसके जरिए बाजार तक पहुंचा, इसकी जानकारी खाद्य सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

1,247 नमूनों की जांच, 77 मानकों पर खरे नहीं उतरे

महाराष्ट्र FDA के आंकड़ों के अनुसार राज्य में 212 खाद्य तेल उत्पादकों के पास केंद्रीय लाइसेंस और 285 कारोबारियों के पास राज्य लाइसेंस हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान FDA ने खाद्य तेल के 1,247 नमूने लिए। इनमें से 1,142 नमूनों की जांच की गई। जांच में 77 नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए, जबकि 15 मामलों में गलत ब्रांडिंग सामने आई।

कार्रवाई के दौरान विभाग ने करीब 3.20 लाख किलोग्राम खाद्य तेल का स्टॉक जब्त किया, जिसकी अनुमानित कीमत 5.31 करोड़ रुपये बताई गई है।

मिलावट से लेकर अधिक ट्रांस-फैट तक गड़बड़ियां

तुकाराम मुंढे के अनुसार खाद्य तेल उद्योग में करीब 12 तरह के उल्लंघन सामने आए हैं। इनमें बिना लाइसेंस कारोबार, मिलावट, अधिक एसिडिक वैल्यू और ट्रांस-फैट का निर्धारित सीमा से अधिक होना शामिल है।

कुछ मामलों में सरसों के तेल में दूसरे तेल मिलाए जाने की जानकारी सामने आई। इसके अलावा कुछ उत्पादों के मूल स्रोत का पता लगाने में भी परेशानी हुई। उचित पैकेजिंग नियमों का पालन नहीं करने के मामले भी सामने आए हैं।

तेल की पैकेजिंग पर भी नजर

FDA ने खाद्य तेल की पैकेजिंग को भी जांच के दायरे में रखा है। मुंढे ने विशेष रूप से खाद्य तेल की पैकिंग में टिन के दोबारा इस्तेमाल पर चिंता जताई।

उनके अनुसार खाद्य तेल की पैकेजिंग के लिए निर्माताओं द्वारा टिन का पुन: उपयोग लागू नियमों के तहत अनुमत नहीं है। अभियान के अगले चरण में निर्माताओं, वितरकों, दुकानदारों और अन्य खाद्य कारोबारियों की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।

बार-बार इस्तेमाल होने वाला तेल सबसे बड़ी चिंता

FDA आयुक्त ने खाना पकाने के तेल को बार-बार इस्तेमाल करने की प्रक्रिया को गंभीर चिंता का विषय बताया है। खासकर खाद्य कारोबारियों द्वारा एक ही तेल को लगातार गर्म कर दोबारा इस्तेमाल करने की प्रक्रिया पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।

अभियान के तहत यह देखा जाएगा कि होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान खाना पकाने के तेल का किस तरह इस्तेमाल और निपटान करते हैं।

उत्पादन से बिक्री तक पूरी सप्लाई चेन की होगी निगरानी

मुंढे ने कहा कि खाद्य तेल के उत्पादन, पैकेजिंग, वितरण और इस्तेमाल से जुड़े नियमों का पालन पूरी सप्लाई चेन में होना जरूरी है। कारोबारियों के पास निर्धारित नियमों के अनुसार आवश्यक लाइसेंस होना भी अनिवार्य है।

उन्होंने कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) की ओर से खाद्य तेल के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल को लेकर नियम तय किए गए हैं। इन नियमों के उल्लंघन पर FDA कार्रवाई करेगा।

उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी

FDA आयुक्त ने कहा कि खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि गंभीर उल्लंघनों के मामलों में 10 लाख रुपये तक के जुर्माने और उम्रकैद तक के प्रावधान लागू हो सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल मिलावट या अवैध कारोबार पर कार्रवाई करना नहीं, बल्कि खाद्य तेल की पूरी व्यवस्था को सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर की चिंता

मुंढे ने खाद्य तेल से जुड़ी असुरक्षित प्रक्रियाओं को व्यापक स्वास्थ्य चिंता से जोड़ते हुए कहा कि मामला सिर्फ ब्लैक मार्केट या मिलावट तक सीमित नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि असुरक्षित खाद्य तेल और गलत इस्तेमाल से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं।

उन्होंने हृदय रोग और कैंसर के जोखिम के साथ बच्चों के संज्ञानात्मक विकास पर संभावित नकारात्मक प्रभाव की चिंता भी जताई।

‘सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र’ में अब तेल पर फोकस

‘सेफ फूड, सेफ महाराष्ट्र’ अभियान के अगले चरण में खाद्य तेल की लाइसेंसिंग, उत्पादन, पैकेजिंग, वितरण, खुदरा बिक्री और इस्तेमाल को निगरानी के दायरे में रखा जाएगा।

इसके साथ ही खाद्य कारोबारियों द्वारा तेल के बार-बार इस्तेमाल की प्रक्रिया पर भी विशेष नजर होगी। FDA का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि बाजार में पहुंचने वाले खाद्य तेल के स्रोत, निर्माण और गुणवत्ता की जानकारी स्पष्ट हो तथा उपभोक्ताओं को सुरक्षित खाद्य उत्पाद उपलब्ध हों।

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