भारत-नेपाल संबंधों में नई गर्माहट, आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी पर बढ़ा जोर
भारत और नेपाल के बीच व्यापार, रेल कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान, कानूनी सहयोग और आर्थिक साझेदारी को नई गति मिली। दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत मजबूत हुए।


नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच संबंधों में हाल के महीनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। दोनों देशों ने आर्थिक सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान और सीमा पार कानूनी सहयोग जैसे क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का नया नेतृत्व वैचारिक राजनीति से आगे बढ़कर आर्थिक व्यावहारिकता और क्षेत्रीय सहयोग को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे भारत-नेपाल संबंधों को नई दिशा मिल सकती है।
विवादित नक्शे की जगह सांस्कृतिक पहचान
नेपाल सरकार ने हाल ही में एक रुपये के नए सिक्के को मंजूरी दी है। इस सिक्के में पहले प्रस्तावित लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा वाले विवादित नक्शे के स्थान पर मुस्तांग जिले के प्रसिद्ध लो ग्याकर मठ की तस्वीर को शामिल किया गया है। इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
भारतीय मुद्रा पर नियमों में राहत
नेपाल ने भारतीय करेंसी को लेकर भी नियमों में ढील दी है। अब भारत और नेपाल के नागरिक ₹25,000 तक के ₹200 और ₹500 मूल्यवर्ग के भारतीय नोट अपने साथ ले जा सकेंगे। इस फैसले से दोनों देशों के बीच पर्यटन, व्यापार और आम नागरिकों की आवाजाही को सुविधा मिलने की उम्मीद है।
रेल कनेक्टिविटी से व्यापार को मिलेगा बढ़ावा
भारत-नेपाल व्यापारिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में हाल ही में कोलकाता पोर्ट से पहली सीधी व्यावसायिक मालगाड़ी नेपाल कस्टम्स यार्ड पहुंची। यह भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट फ्रेमवर्क में संशोधन के बाद शुरू हुई नई व्यवस्था का हिस्सा है।
संशोधित प्रोटोकॉल के तहत अब कोलकाता और विशाखापत्तनम बंदरगाहों से नेपाल के निर्धारित रेल टर्मिनलों तक कंटेनर और बल्क कार्गो की सीधी रेल आवाजाही संभव होगी। इससे माल ढुलाई की लागत कम होगी और नेपाल की भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच अधिक सुगम बनेगी।
चीन के साथ भी बढ़ रहा संपर्क
नेपाल ने चीन के साथ ट्रांस-हिमालयन मल्टी-डायमेंशनल कनेक्टिविटी नेटवर्क पर भी चर्चा तेज की है। इसमें सीमा पार रेलवे, ट्रांसमिशन लाइन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाएं शामिल हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल के लिए भारत के साथ रेल संपर्क आर्थिक रूप से अधिक व्यवहारिक और कम लागत वाला विकल्प है।
डिजिटल भुगतान में नई पहल
भारत और नेपाल ने सीमा पार डिजिटल भुगतान को आसान बनाने के लिए यूपीआई (UPI) और नेपाल के नेशनल पेमेंट्स इंटरफेस (NPI) को जोड़ते हुए क्रॉस-बॉर्डर पीयर-टू-पीयर रेमिटेंस सुविधा शुरू की है। इससे दोनों देशों के नागरिक मोबाइल एप के माध्यम से सुरक्षित और रियल टाइम में भुगतान तथा धन हस्तांतरण कर सकेंगे।
कानूनी और तकनीकी सहयोग मजबूत
दोनों देशों ने आपराधिक मामलों में आपसी कानूनी सहायता समझौते को लागू करने की दिशा में आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने का स्वागत किया है। इससे सीमा पार अपराधों की जांच और न्यायिक सहयोग को मजबूती मिलेगी।
इसके अलावा, भारत की डिजिटल इंडिया भाषिणी पहल और काठमांडू विश्वविद्यालय के बीच हुए समझौते के तहत नेपाल में वॉयस-आधारित डिजिटल भाषा अनुवाद प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा।
पुनर्निर्माण में भारत का सहयोग
भारत ने 2015 के भूकंप के बाद पुनर्निर्माण सहायता कार्यक्रम के तहत नेपाल में 72 स्वास्थ्य सुविधाओं और 12 सांस्कृतिक विरासत परियोजनाओं का निर्माण पूरा कर उन्हें नेपाल को सौंप दिया है। इससे दोनों देशों के विकास सहयोग को और मजबूती मिली है।
बदलते भू-राजनीतिक समीकरण
दक्षिण एशिया में बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच नेपाल भारत, चीन और अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि कनेक्टिविटी, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग आने वाले वर्षों में भारत-नेपाल संबंधों की दिशा तय करेंगे।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत नेपाल एक प्रमुख साझेदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच नियमित उच्चस्तरीय संवाद, आर्थिक सहयोग और साझा विकास परियोजनाएं भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बना सकती हैं।
