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गुजरात · 15 दिन पहले

गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर: 5 हफ्तों में 25 बच्चों की मौत

गुजरात में चांदीपुरा वायरस से 39  बच्चों के  संक्रमित होने और 25 की मौत की रिपोर्ट है। जानिए वायरस क्या है, कैसे फैलता है, लक्षण, इलाज और बचाव के उपाय।

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समाचार डेस्क · 15 दिन पहले
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गुजरात में चांदीपुरा वायरस का कहर: 5 हफ्तों में 25 बच्चों की मौत

अहमदाबाद। गुजरात में चांदीपुरा वायरस को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, करीब पांच सप्ताह के दौरान इस  संक्रमण से 25 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 39 बच्चों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। सबसे चिंता की बात यह है कि वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीमें अब तक यह स्पष्ट नहीं कर पाई हैं कि मौजूदा प्रकोप में वायरस का वास्तविक स्रोत या प्रमुख वाहक क्या है।

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चांदीपुरा वायरस मुख्य रूप से बच्चों में Acute Encephalitis Syndrome (AES) जैसी गंभीर स्थिति से जुड़ा है। बीमारी तेजी से गंभीर रूप ले सकती है, इसलिए शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करना बेहद महत्वपूर्ण है।

हजारों सैंपल की जांच, फिर भी नहीं मिला स्पष्ट स्रोत

चांदीपुरा वायरस के प्रसार में सैंडफ्लाई की भूमिका प्रमुख मानी जाती है। इसी वजह से स्वास्थ्य और शोध टीमों ने बड़े स्तर पर सैंडफ्लाई के नमूने एकत्र किए।

लेकिन मौजूदा प्रकोप की जांच में अब तक लिए गए नमूनों से संक्रमण के स्रोत की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए मच्छरों और अन्य संभावित कीटों के नमूनों की भी जांच की जा रही है।

यही वजह है कि वैज्ञानिकों के सामने बड़ा सवाल बना हुआ है कि यदि सामान्य रूप से पहचाने जाने वाले वाहकों में वायरस नहीं मिल रहा है, तो संक्रमण बच्चों तक किस माध्यम से पहुंच रहा है।

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2024 के प्रकोप ने भी बढ़ाई चिंता

चांदीपुरा वायरस ने इससे पहले 2024 में भी गुजरात में गंभीर प्रकोप पैदा किया था। उस दौरान बड़ी संख्या में बच्चों में संदिग्ध संक्रमण और मौत के मामले सामने आए थे। बाद में किए गए शोध में बीमारी के जोखिम को ग्रामीण इलाकों, कमजोर आवासीय परिस्थितियों और अन्य पर्यावरणीय कारकों से भी जोड़ा गया।

2025 में भी गुजरात में संदिग्ध मामलों की जांच के दौरान ICMR की टीमों ने सैंडफ्लाई, घरेलू पशुओं और प्रभावित गांवों के निवासियों के नमूने एकत्र किए थे। इससे साफ है कि वायरस के संक्रमण के स्रोत और उसके प्रसार के तरीके को लेकर वैज्ञानिक जांच लगातार जारी है।

क्या है चांदीपुरा वायरस?

चांदीपुरा वायरस Rhabdoviridae परिवार और Vesiculovirus जीनस से संबंधित वायरस है। यह भारत में खासतौर पर मानसून के दौरान बच्चों में AES के मामलों से जुड़ा रहा है।

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यह संक्रमण तेजी से न्यूरोलॉजिकल लक्षण पैदा कर सकता है। रिपोर्ट किए गए मामलों में तेज बुखार, उल्टी, दौरे, अत्यधिक नींद या चेतना में बदलाव जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। बीमारी की गति तेज होने के कारण समय पर चिकित्सकीय देखभाल बेहद महत्वपूर्ण है।

कैसे फैलता है?

चांदीपुरा वायरस के संक्रमण को मुख्य रूप से संक्रमित सैंडफ्लाई के काटने से जोड़ा जाता है। कुछ अध्ययनों और स्वास्थ्य रिपोर्टों में अन्य आर्थ्रोपोड्स की संभावित भूमिका की भी चर्चा हुई है।

इसी कारण प्रभावित इलाकों में कीट नियंत्रण, घरों और आसपास की स्वच्छता तथा काटने से बचाव को महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या इसका कोई इलाज या वैक्सीन है?

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फिलहाल चांदीपुरा वायरस के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त विशिष्ट वैक्सीन या प्रमाणित एंटीवायरल उपचार उपलब्ध नहीं है। उपचार मुख्य रूप से मरीज की स्थिति के अनुसार supportive और intensive medical care पर निर्भर करता है।

चूंकि बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है, इसलिए बच्चों में तेज बुखार के साथ उल्टी, दौरे, असामान्य नींद, व्यवहार में बदलाव या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अस्पताल ले जाना जरूरी है।

बचाव के लिए क्या करें?

चांदीपुरा वायरस से बचाव में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कीट नियंत्रण और काटने से सुरक्षा की है।

बच्चों को विशेष रूप से शाम और रात के समय कीटों के काटने से बचाएं।

पूरी बांह के कपड़े पहनाएं।

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चिकित्सकीय सलाह के अनुसार सुरक्षित insect repellent का इस्तेमाल करें।

घर और आसपास गंदगी तथा अनावश्यक पानी जमा न होने दें।

घर की दीवारों और आसपास की उन जगहों की सफाई रखें जहां कीट पनप सकते हैं।

 बच्चों में गंभीर लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार में समय न गंवाएं और तत्काल चिकित्सा सहायता लें।

सबसे बड़ा सवाल: वायरस का स्रोत आखिर कहां है?

गुजरात में मौजूदा प्रकोप ने वैज्ञानिकों के सामने एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।  संक्रमण की पुष्टि होने और बच्चों की मौत के बावजूद वायरस के वास्तविक पर्यावरणीय स्रोत और वर्तमान संक्रमण चक्र को पूरी तरह समझना अभी बाकी है।

सरकारी  स्वास्थ्य टीमें और शोधकर्ता लगातार निगरानी, नमूना संग्रह और जांच में जुटे हैं। अब विशेषज्ञों की नजर इस बात पर है कि आगे की जांच से वायरस के स्रोत और उसके प्रसार के तरीके के बारे में क्या नई जानकारी सामने आती है।

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