एफआईआर के बाद उन्हीं केंद्रों पर फिर शुरू हुई मूंग खरीदी, अब गड़बड़ी कैसे रुकेगी? जानें 5 सवालों के जवाब
FIR के बाद उन्हीं केंद्रों पर फिर शुरू हुई मूंग खरीदी पर सवाल उठ रहे हैं। निगरानी, जिम्मेदारी और पारदर्शिता को लेकर जानें 5 अहम सवाल और जवाब।


नर्मदापुरम/माखननगर। जिन दो केंद्रों पर मूंग खरीदी में गड़बड़ी के आरोप लगे और वेयरहाउस संचालक, समिति प्रबंधक सहित सर्वेयर पर FIR दर्ज हुई, उन्हीं केंद्रों पर प्रशासन ने फिर से मूंग खरीदी शुरू करा दी है। ऐसे में किसान और आम लोग के मन में स्वाभाविक तौर पर सवाल उठ सकता है कि जिन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हुई, यदि वे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खरीदी व्यवस्था से जुड़े रहे तो अब गड़बड़ी नहीं होगी, इसकी क्या गारंटी है?
दूसरा बड़ा सवाल वेयरहाउस को लेकर है। जिन वेयरहाउस में अमानक मूंग की खरीदी के आरोप लगे, वे वही हैं। ऐसे में वहां रखे स्टैक से छेड़छाड़ न हो, इसकी निगरानी कैसे होगी?
देनवा पोस्ट के पाठकों के मन में उठ रहे इन्हीं सवालों के सिलसिलेवार जवाब जानें, इससे पहले समझते हैं कि प्रशासन ने उन्हीं केंद्रों पर दोबारा खरीदी शुरू कराने का फैसला क्यों लिया।
अब खरीदी केंद्रों पर ‘तीसरी आंख’ भी
प्रशासन अपनी जगह निगरानी कर रहा है, लेकिन इस मामले ने यह भी दिखाया कि खरीदी केंद्रों पर होने वाली गतिविधियां अब सिर्फ सरकारी रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रहेंगी। मीडिया की नजर भी वहां है और कैमरा भी।
चर्चित स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आए मामले में प्रशासनिक कार्रवाई हुई। इससे खरीदी व्यवस्था से जुड़े लोगों को यह संदेश गया कि केंद्र पर होने वाली हर गतिविधि कभी भी जांच के दायरे में आ सकती है।
कोई इसे संयोग माने या मीडिया की पड़ताल का असर, लेकिन स्टिंग के बाद कार्रवाई हुई और यही इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण पहलू है।
किसानों की चिंता या विकल्प ही नहीं?
चर्चित स्टिंग ऑपरेशन के बाद मूंग खरीदी व्यवस्था में कार्रवाई हुई। इसके बाद खरीदी प्रभावित हुई तो किसानों के सामने भी समस्या खड़ी हुई। 10 अगस्त को समिति प्रबंधकों और संबंधित लोगों ने अधिकारियों से मुलाकात कर खरीदी केंद्रों को सुचारु रूप से संचालित करने का अनुरोध किया था। ज्ञापनों में किसानों को होने वाली परेशानी का हवाला दिया गया था।
प्रशासन ने अब इन केंद्रों पर खरीदी दोबारा शुरू कर दी है। प्रशासन का तर्क है कि खरीदी प्रक्रिया खत्म होने में अब सिर्फ 9 दिन बचे हैं और किसानों को परेशान न होना पड़े, इसलिए यह व्यवस्था की गई है।
अब सवाल यह है कि क्या यह फैसला मुख्य रूप से किसानों की परेशानी को देखते हुए लिया गया या इन केंद्रों के अलावा तत्काल कोई व्यावहारिक विकल्प उपलब्ध नहीं था? प्रशासन ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
अब जानिए पूरे मामले पर उठ रहे सवाल और प्रशासन के जवाब
देनवा पोस्ट ने पूरे मामले को लेकर जिला विपणन अधिकारी (DMO) अनिल जैन से बात की। उन्होंने खरीदी दोबारा शुरू कराने, FIR के बाद संबंधित लोगों की भूमिका और स्टैक की सुरक्षा को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
सवाल: जिन केंद्रों पर गड़बड़ी के आरोप लगे, वहां अब भी खरीदी क्यों हो रही है?
जवाब: खरीदी प्रक्रिया पूरी होने में अब सिर्फ 9 दिन बचे हैं। किसानों को परेशानी न हो, इसलिए इन केंद्रों पर खरीदी जारी रखने की व्यवस्था की गई है।
सवाल: जिन लोगों पर FIR हुई है, क्या उनके रहते खरीदी व्यवस्था सुरक्षित है?
जवाब: FIR दर्ज हो चुकी है। उसकी जांच नियमानुसार चलेगी और उसके आधार पर आगे कार्रवाई होगी। लेकिन किसानों की खरीदी को रोका नहीं जा सकता।
सवाल: अब इन केंद्रों पर दोबारा गड़बड़ी नहीं होगी, इसकी क्या व्यवस्था की गई है?
जवाब: सर्वेयर बदल दिया गया है। समिति की ओर से पहले तैनात व्यक्ति को भी बदल दिया गया है। यानी जिन स्तरों पर खरीदी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका थी, वहां बदलाव किया गया है।
सवाल: जिन आरोपों के आधार पर FIR हुई, उनसे जुड़े स्टैक से छेड़छाड़ नहीं होगी, इसकी क्या गारंटी है?
जवाब: प्रशासन ने मौके पर जाकर स्टैक का निरीक्षण किया है। उन्हें अलग से चिन्हित कर दिया गया है। स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि इन स्टैक को कोई हाथ नहीं लगाएगा।
सवाल : वेयरहाउस तो वही है, फिर किसी को अनुचित लाभ लेने से कैसे रोका जाएगा?
जवाब : जो लोग वीडियो में दिखाई दिए थे, उन्हें वहां से हटा दिया गया है। उन्हें खरीदी केंद्र पर नहीं आने की हिदायत भी दी गई है।
तो आम किसान अब क्या करे?
यदि कोई अनधिकृत व्यक्ति वेयरहाउस या खरीदी केंद्र पर दिखाई देता है, या FIR में नामजद/आरोपित व्यक्ति वहां मौजूद होकर खरीदी प्रक्रिया को प्रभावित करने, अमानक मूंग के स्टैक से छेड़छाड़ करने या किसी तरह का अनुचित लाभ लेने की कोशिश करता दिखाई दे, तो किसान उसकी फोटो या वीडियो बनाकर सबूत के साथ कलेक्टर या जिला विपणन अधिकारी (DMO) को भेज सकते हैं। किसान के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ आरोप लगाने के बजाय फोटो, वीडियो, तारीख, समय और केंद्र की जानकारी के साथ शिकायत करे। इससे प्रशासन के लिए शिकायत की जांच करना आसान होगा।
अब जब उन्हीं केंद्रों पर फिर खरीदी शुरू हो गई है, तो अगले 9 दिन प्रशासन के लिए भी परीक्षा हैं और खरीदी व्यवस्था की निगरानी के लिए भी।

