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नर्मदापुरम · 23 दिन पहले

करीब छह माह बाद जागा विभाग! हाईकोर्ट आदेश के बावजूद हरदा में ज्वाइनिंग पर सवाल

हाईकोर्ट के 11 फरवरी के आदेश के करीब छह माह बाद लोक शिक्षण संचालनालय ने शिक्षक उमाकांत मिश्रा से वचन-पत्र लेने के निर्देश दिए। सूत्रों के अनुसार हरदा में अब तक ज्वाइनिंग नहीं।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 23 दिन पहले
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करीब छह माह बाद जागा विभाग! हाईकोर्ट आदेश के बावजूद हरदा में ज्वाइनिंग पर सवाल

नर्मदापुरम। हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में विभागीय कार्रवाई की रफ्तार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 11 फरवरी 2026 को हाईकोर्ट जबलपुर द्वारा अंतिम निर्णय सुनाए जाने के करीब छह माह बाद, लोक शिक्षण संचालनालय ने 5 अगस्त 2026 को जिला शिक्षा अधिकारी नर्मदापुरम को पत्र जारी कर संबंधित शिक्षक से वचन-पत्र लेने के निर्देश दिए हैं।

मामला शासकीय माध्यमिक शाला तिनदवाड़ा में पदस्थ माध्यमिक शिक्षक उमाकांत मिश्रा से जुड़ा है। हाईकोर्ट जबलपुर में दायर याचिका क्रमांक 31604/2025 में 11 फरवरी 2026 को अंतिम आदेश पारित हुआ था। संचालनालय के पत्र के मुताबिक न्यायालय के निर्देशानुसार शिक्षक का वचन-पत्र आवश्यक था, लेकिन संबंधित ई-फाइल में अभ्यावेदन तो संलग्न था, वचन-पत्र मौजूद नहीं था।

फरवरी में आदेश, अगस्त में विभाग को याद आया वचन-पत्र

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब हाईकोर्ट का अंतिम आदेश फरवरी में ही आ चुका था, तो उसके अनुपालन के लिए जरूरी वचन-पत्र लेने की कार्रवाई अगस्त तक क्यों लंबित रही?

लोक शिक्षण संचालनालय ने अब जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि उमाकांत मिश्रा से विधिवत हस्ताक्षरित वचन-पत्र तत्काल प्राप्त कर, स्पष्ट अभिमत के साथ संचालनालय को भेजा जाए।

सूत्रों के हवाले से एक और बड़ा सवाल

विभागीय सूत्रों की मानें तो उमाकांत मिश्रा ने अभी तक हरदा में भी कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। हालांकि, इसकी स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है।

यदि यह जानकारी सही है तो मामला और गंभीर हो जाता है। क्योंकि संचालनालय के पत्र में हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया गया है कि वचन-पत्र दिए जाने की स्थिति में संबंधित शिक्षक को स्थानांतरित शाला में अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब फरवरी में न्यायालय का आदेश आ चुका था, तो अगस्त तक वचन-पत्र और कार्यभार ग्रहण की स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हो सकी?

ई-फाइल में अभ्यावेदन मिला, वचन-पत्र गायब

संचालनालय के पत्र में साफ लिखा है कि ई-फाइल में याचिकाकर्ता का अभ्यावेदन संलग्न है, लेकिन न्यायालय के निर्देशानुसार वचन-पत्र संलग्न नहीं है।

अब विभाग ने जिला शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदारी दी है कि संबंधित शिक्षक से वचन-पत्र प्राप्त कर उसे संचालनालय भेजा जाए। यानी करीब छह माह बाद विभागीय स्तर पर एक बार फिर दस्तावेजी प्रक्रिया शुरू होती दिखाई दे रही है।

जवाबदेही किसकी?

इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं—

हाईकोर्ट का अंतिम आदेश 11 फरवरी को आया, तो अनुपालन में करीब छह माह क्यों लगे?

वचन-पत्र समय पर क्यों नहीं लिया गया?

ई-फाइल में अभ्यावेदन था, लेकिन आवश्यक वचन-पत्र क्यों नहीं था?

यदि शिक्षक ने हरदा में अब तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है, तो इसकी वजह क्या है?

आदेश के अनुपालन की निगरानी किस अधिकारी की जिम्मेदारी थी?

इतनी देरी के लिए क्या किसी स्तर पर जवाबदेही तय की गई?

फिलहाल लोक शिक्षण संचालनालय ने जिला शिक्षा अधिकारी को तत्काल वचन-पत्र लेने के निर्देश दिए हैं। अब देखना यह होगा कि विभाग इस बार कितनी तेजी दिखाता है और हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन की प्रक्रिया वास्तव में कब पूरी होती है।

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