MP में परिवहन व्यवस्था का बड़ा बदलाव: 2030 तक सड़कों पर दौड़ेंगी 15 हजार बसें, भोपाल से होगी पूरे प्रदेश की निगरानी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत सात शहरों में बनेंगे क्षेत्रीय कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, नर्मदापुरम सहित आठ जिलों की बसों का नियंत्रण भोपाल से होगा


भोपाल। मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत प्रदेश में सिटी बस, इंटरसिटी और अंतरराज्यीय बस सेवाओं को एकीकृत नेटवर्क से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके लिए राजधानी भोपाल में मुख्य कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया जा रहा है, जहां से प्रदेशभर में संचालित बसों की निगरानी और क्षेत्रीय परिवहन कंपनियों के बीच समन्वय किया जाएगा।
सरकार ने वित्तीय वर्ष 2030-31 तक प्रदेश में लगभग 15 हजार बसें संचालित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर, सागर और रीवा में सात क्षेत्रीय परिवहन कंपनियों के कार्यालय विकसित किए जा रहे हैं।
इस पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) को सौंपी गई है। इसका मुख्यालय भोपाल के स्मार्ट सिटी परिसर में स्थापित किया जा रहा है, जहां लगभग 150 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी।
भोपाल से होगी पूरे प्रदेश की बसों की निगरानी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत तैयार किए जा रहे मुख्य कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में चलने वाली बसों के संचालन, प्रबंधन और यात्री सुरक्षा से संबंधित व्यवस्थाओं पर नजर रखने की योजना है।
मुख्यालय को सात क्षेत्रीय कंपनियों से जोड़ा जाएगा। इन कंपनियों के माध्यम से जिलों में संचालित बस सेवाओं की निगरानी और समन्वय किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को अधिक व्यवस्थित बनाना है, ताकि शहरों के भीतर यात्रा करने वाले यात्रियों के साथ एक जिले से दूसरे जिले और अन्य राज्यों की यात्रा करने वाले लोगों को भी बेहतर परिवहन सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
नर्मदापुरम, हरदा और बैतूल सहित आठ जिलों का नियंत्रण भोपाल से
नर्मदापुरम संभाग के यात्रियों के लिए भी यह योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) का क्षेत्रीय कार्यालय राजधानी के आईएसबीटी भवन में स्थापित किया जा रहा है।
इस कार्यालय में लगभग 120 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। यहां से भोपाल के साथ नर्मदापुरम, राजगढ़, विदिशा, रायसेन, सीहोर, हरदा और बैतूल जिलों में संचालित बसों की निगरानी और प्रबंधन किया जाएगा।
इससे नर्मदापुरम, इटारसी, पिपरिया, सोहागपुर, माखननगर, सिवनी मालवा सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित होने वाली बस सेवाओं को प्रस्तावित क्षेत्रीय निगरानी व्यवस्था से जोड़ने का रास्ता तैयार होगा। हालांकि, इन मार्गों पर नई बसों की संख्या और संचालन समय-सारणी की अलग से पुष्टि होना बाकी है।
इंदौर और उज्जैन के क्षेत्रीय कार्यालय जनवरी 2027 तक तैयार करने की योजना
इंदौर में अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (AICTSL) के मौजूदा कार्यालय का विस्तार और आधुनिकीकरण किया जा रहा है। वहीं, उज्जैन सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (UCTSL) का कार्यालय परिवहन कार्यालय परिसर में विकसित किया जाएगा।
दोनों कार्यालयों का काम जनवरी 2027 तक पूरा होने की संभावना जताई गई है। प्रत्येक कार्यालय में लगभग 120 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
इंदौर क्षेत्रीय कंपनी धार, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, खरगोन, खंडवा और बुरहानपुर जिलों की बस सेवाओं का प्रबंधन देखेगी। वहीं उज्जैन कार्यालय से देवास, रतलाम, शाजापुर, आगर मालवा, मंदसौर और नीमच जिलों में संचालित बसों की निगरानी की जाएगी।
जबलपुर और ग्वालियर में मार्च 2027 तक तैयार होंगे कंट्रोल सेंटर
जबलपुर सिटी लिंक ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (JCTSL) का कार्यालय आईएसबीटी भवन में विकसित किया जाएगा। यहां लगभग 150 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था प्रस्तावित है। कार्यालय का काम 31 मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
जबलपुर क्षेत्रीय कंपनी नरसिंहपुर, कटनी, डिंडौरी, मंडला, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट और पांढुर्णा जिलों में बसों की निगरानी करेगी।
इसी तरह ग्वालियर-चंबल यात्री परिवहन सेवा लिमिटेड (GCYPSL) का कार्यालय ग्वालियर के राजस्व मंडल परिसर में विकसित किया जाएगा। यहां लगभग 120 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी।
ग्वालियर क्षेत्रीय कार्यालय से मुरैना, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, दतिया, गुना और अशोकनगर जिलों की बस सेवाओं का प्रबंधन किया जाएगा। इस कार्यालय को भी 31 मार्च 2027 तक तैयार करने की योजना है।
सागर और रीवा में भी बनेंगे क्षेत्रीय परिवहन केंद्र
सागर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (SCTSL) का कार्यालय स्मार्ट सिटी के इन्क्यूबेशन सेंटर भवन में स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। इसे 28 फरवरी 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यहां लगभग 125 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी।
सागर क्षेत्रीय कंपनी निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और दमोह जिलों की बस सेवाओं की निगरानी करेगी।
वहीं, रीवा सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेस लिमिटेड (RCTSL) का कार्यालय समदड़िया आदर्श भवन में प्रस्तावित है। यहां लगभग 150 अधिकारियों और कर्मचारियों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसका काम 31 मार्च 2027 तक पूरा होने की संभावना है।
रीवा क्षेत्रीय कार्यालय से रीवा, सतना, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर जिलों में बस सेवाओं की निगरानी की जाएगी।
सितंबर में हुआ था मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने 25 सितंबर 2026 को पीएम ई-बस सेवा और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ किया था।
इसके बाद मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के माध्यम से बस संचालन की व्यवस्था शुरू की गई। अब सरकार इस नेटवर्क को विस्तार देने के लिए मुख्यालय और क्षेत्रीय कार्यालयों का बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है।
यात्रियों को क्या मिलेगा फायदा?
प्रस्तावित व्यवस्था के पूरी तरह लागू होने के बाद प्रदेश में बस सेवाओं के प्रबंधन में बेहतर समन्वय की उम्मीद है। क्षेत्रीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था विकसित होने से बस संचालन से जुड़ी समस्याओं की पहचान और उनके समाधान की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।
विशेष रूप से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालयों तथा बड़े शहरों तक यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह योजना महत्वपूर्ण हो सकती है। हालांकि, यात्रियों को वास्तविक लाभ कितना मिलेगा, यह नई बसों की उपलब्धता, निर्धारित मार्गों, किराया व्यवस्था, समयबद्ध संचालन और क्षेत्रीय नेटवर्क के प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।
फिलहाल सरकार का ध्यान सात क्षेत्रीय कार्यालयों और भोपाल स्थित मुख्य नियंत्रण केंद्र को विकसित करने पर है। वर्ष 2030-31 तक 15 हजार बसों के संचालन का लक्ष्य पूरा होने पर प्रदेश की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है।

