MP पुलिस विभाग में बड़ा फेरबदल: 15 DSP की पदोन्नति निरस्त, वापस बनाए गए निरीक्षक; विभागीय जांच और आपराधिक मामलों का असर
गृह विभाग ने जुलाई में जारी पदोन्नति आदेश की समीक्षा के बाद लिया फैसला, इससे पहले 78 उप निरीक्षकों और कार्यवाहक निरीक्षकों की पदोन्नति भी हो चुकी है निरस्त


भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई सामने आई है। राज्य के गृह विभाग ने जुलाई 2026 में निरीक्षक से उप पुलिस अधीक्षक (DSP) पद पर पदोन्नत किए गए 15 पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त कर दी है। इन अधिकारियों को वापस उनके मूल पद पर भेजने का निर्णय लिया गया है। विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरणों से संबंधित मामलों के कारण इन अधिकारियों की पदोन्नति की पात्रता प्रभावित होने की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के आधार पर पूर्व में जारी पदोन्नति आदेशों की समीक्षा की गई। समीक्षा के बाद गृह विभाग ने संबंधित अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त करने का आदेश जारी किया। इस फैसले से पुलिस महकमे में पदोन्नति प्रक्रिया और अधिकारियों की पात्रता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
12 निरीक्षकों की DSP पद पर पदोन्नति निरस्त
गृह विभाग के निर्णय से निरीक्षक संवर्ग के 12 अधिकारी प्रभावित हुए हैं। इन सभी अधिकारियों को जुलाई में डीएसपी पद पर पदोन्नत किया गया था, लेकिन अब उनकी पदोन्नति वापस ले ली गई है।
पदोन्नति निरस्त होने वाले अधिकारियों के नाम:
1. महेंद्र सिंह भदौरिया
2. विपिन बिहारी सिंह
3. योगेन्द्र सिंह जादौन
4. महेंद्र सिंह परमार
5. शैलेश कुमार मिश्रा
6. भरत सिंह ठाकुर
7. मनीष मिश्रा
8. विनय आर्य
9. सोमलता मालिक
10. सुरेश चन्द्र नागर
11. दीपक सेजवार
12. संतोष कुमार पंद्रे
इन अधिकारियों की डीएसपी पद पर पदोन्नति निरस्त कर उन्हें वापस निरीक्षक संवर्ग में लाने का निर्णय लिया गया है।
विशेष शाखा और विसबल के तीन अधिकारी भी प्रभावित
गृह विभाग की कार्रवाई केवल सामान्य निरीक्षक संवर्ग तक सीमित नहीं रही। अन्य पुलिस संवर्गों के तीन अधिकारियों की पदोन्नति भी निरस्त की गई है।
इनमें विशेष शाखा की निरीक्षक कल्पना रघुवंशी, विशेष सशस्त्र बल (विसबल) के निरीक्षक देवेंद्र दुबे और आरक्षित निरीक्षक अर्जुन सिंह पंवार शामिल हैं।
इस प्रकार कुल 15 अधिकारियों की डीएसपी पद पर पदोन्नति निरस्त की गई है। सभी को उनके पूर्व पद पर वापस भेजने का निर्णय लिया गया है।
विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरण बने पदोन्नति में बाधा
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पदोन्नति आदेशों की समीक्षा के दौरान संबंधित अधिकारियों से जुड़े विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरणों की स्थिति को ध्यान में रखा गया।
विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के बाद गृह विभाग ने पूर्व में जारी आदेशों की समीक्षा की और पदोन्नति निरस्त करने का फैसला लिया।
हालांकि, किस अधिकारी के विरुद्ध कौन-सा विभागीय या आपराधिक प्रकरण है और किस आधार पर उसकी पदोन्नति निरस्त की गई, इसकी अधिकारीवार विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि किसी अधिकारी के विरुद्ध विभागीय जांच या आपराधिक प्रकरण लंबित होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है।
सितंबर में 78 पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति भी हुई थी निरस्त
मध्यप्रदेश पुलिस विभाग में पदोन्नति निरस्त होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले पुलिस मुख्यालय भोपाल ने 1 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर जुलाई में पदोन्नत किए गए 78 उप निरीक्षकों और कार्यवाहक निरीक्षकों की पदोन्नति वापस ले ली थी।
इन अधिकारियों को निरीक्षक पद पर पदोन्नत किया गया था। बाद में सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के आधार पर पात्रता की समीक्षा की गई।
समीक्षा में विभागीय जांच और आपराधिक प्रकरणों से जुड़े कारणों के चलते संबंधित अधिकारियों को पदोन्नति के लिए अनुपयुक्त पाया गया था। इसके बाद उनकी पदोन्नति निरस्त कर दी गई थी।
दो चरणों में 93 पुलिस अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त
सितंबर में 78 और अब 15 अधिकारियों की पदोन्नति निरस्त किए जाने से दोनों कार्रवाइयों में कुल 93 पुलिस अधिकारी प्रभावित हुए हैं।
इन फैसलों से स्पष्ट है कि पुलिस विभाग में पदोन्नति की पात्रता और विभागीय रिकॉर्ड की समीक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
हालांकि, इन पदोन्नतियों को निरस्त किए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों की नई पदस्थापना और रिक्त होने वाले पदों को लेकर आगे क्या प्रशासनिक निर्णय लिए जाएंगे, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
फिलहाल गृह विभाग की इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में पदोन्नति प्रक्रिया और सेवा अभिलेखों की जांच को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

