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नर्मदापुरम · 14-08-2026

स्वतंत्रता के 79 वर्ष: गौरव से संकल्प और विकसित भारत की ओर

नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा का विशेष संपादकीय — स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प का संदेश

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समाचार डेस्क · 14-08-2026
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स्वतंत्रता के 79 वर्ष: गौरव से संकल्प और विकसित भारत की ओर

नर्मदापुरम। स्वतंत्रता दिवस हमारे राष्ट्रीय जीवन का वह गौरवशाली अवसर है, जब हम 15 अगस्त 1947 को प्राप्त आजादी के संघर्ष, बलिदान और उपलब्धियों को स्मरण करते हैं। स्वतंत्रता के 79 वर्ष पूरे होने पर नर्मदापुरम कलेक्टर सोमेश मिश्रा ने अपने विशेष संपादकीय में स्वतंत्रता की यात्रा से लेकर विकसित भारत के लक्ष्य तक देश की प्रगति और नागरिकों की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया है।

कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि 15 अगस्त 1947 केवल सत्ता हस्तांतरण का दिन नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा के पुनर्जागरण, स्वाभिमान की पुनर्प्रतिष्ठा और नए राष्ट्र के निर्माण के संकल्प का दिन था। आजादी के समय देश के सामने गरीबी, अशिक्षा, बेरोजगारी, भुखमरी, आर्थिक विषमता तथा सीमित संसाधनों जैसी अनेक चुनौतियां थीं। इसके बावजूद भारतीयों के संकल्प, श्रम, प्रतिभा और इच्छाशक्ति ने राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव रखी।

उन्होंने कहा कि 79 वर्षों की यात्रा में भारत ने अनेक क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। खाद्यान्न संकट से जूझने वाले भारत ने कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। विज्ञान एवं तकनीक, अंतरिक्ष, चिकित्सा, रक्षा, शिक्षा, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप, खेल और कला-संस्कृति सहित अनेक क्षेत्रों में भारत ने वैश्विक पहचान बनाई है।

चंद्रयान-3 की सफलता से लेकर डिजिटल क्रांति तक भारत की बढ़ती क्षमता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान वैक्सीन निर्माण और दुनिया के अनेक देशों तक चिकित्सा सहायता पहुंचाकर भारत ने वैश्विक जिम्मेदारी का परिचय दिया। आज भारतीय युवा उद्यमिता, नवाचार, विज्ञान, खेल और अनुसंधान के क्षेत्र में देश का नाम दुनिया में रोशन कर रहे हैं।

कलेक्टर ने राष्ट्रीय सुरक्षा को भी विकास का महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि भारतीय सेना ने अपने शौर्य, पराक्रम और अनुशासन से देश की सीमाओं की रक्षा की है। भारत शांति और सहअस्तित्व का पक्षधर है, लेकिन अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और नागरिकों की रक्षा के लिए किसी भी चुनौती का दृढ़ता से सामना करने में सक्षम है।

उन्होंने कहा कि आजादी का अर्थ केवल स्वतंत्र होना नहीं, बल्कि स्वतंत्रता के मूल्यों को लगातार मजबूत करना भी है। लोकतंत्र, संविधान और विविधता में एकता भारत की पहचान हैं। संविधान की प्रस्तावना में निहित “हम, भारत के लोग” का भाव यह याद दिलाता है कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों का दायित्व नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सहभागिता और जिम्मेदारी से संभव है।

स्वतंत्रता संग्राम के बलिदानों को याद करते हुए कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि जलियांवाला बाग से लेकर असंख्य ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग ने आजाद भारत की नींव रखी। उन वीरों का सपना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि वे आत्मनिर्भर, समतामूलक, शिक्षित, समृद्ध और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण भारत चाहते थे।

नर्मदापुरम में विकास और प्रकृति का संतुलन

अपने संपादकीय में कलेक्टर ने नर्मदापुरम की विशिष्ट पहचान का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा के पावन तट पर बसा नर्मदापुरम प्राकृतिक संपदा, कृषि, सघन वनों, जैव विविधता, धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपराओं और साहित्यिक-बौद्धिक चेतना के कारण विशेष महत्व रखता है। नर्मदा के कछार से लेकर सतपुड़ा के वनांचल तक यह क्षेत्र प्रकृति और संस्कृति के अद्भुत समन्वय का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि नर्मदापुरम में विकास और प्रकृति एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी हो सकते हैं। कृषि, पर्यटन, शिक्षा, अधोसंरचना और जनसुविधाओं के विस्तार के साथ पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना सामूहिक जिम्मेदारी है। मां नर्मदा केवल आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि क्षेत्र के जीवन, संस्कृति और अर्थव्यवस्था की आधारधारा भी है।

2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य

कलेक्टर मिश्रा ने कहा कि स्वतंत्रता के 79 वर्षों की उपलब्धियां निश्चित रूप से गौरव का विषय हैं, लेकिन राष्ट्र को इन उपलब्धियों पर रुकना नहीं है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य देश के प्रत्येक नागरिक का सामूहिक संकल्प है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विकसित भारत का अर्थ केवल मजबूत अर्थव्यवस्था नहीं है। इसका वास्तविक अर्थ ऐसा राष्ट्र है, जहां प्रत्येक नागरिक को सम्मान, समान अवसर, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षित वातावरण और विकास में भागीदारी मिले।

समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना, महिलाओं को सशक्त बनाना, युवाओं को अवसर देना, किसानों की समृद्धि सुनिश्चित करना, शिक्षा और स्वास्थ्य की गुणवत्ता बढ़ाना तथा पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास को गति देना ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला है।

अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी संकल्प

कलेक्टर ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर नागरिकों से अपने अधिकारों के साथ कर्तव्यों को भी याद रखने का आह्वान किया। राष्ट्र के प्रति निष्ठा, संविधान के प्रति सम्मान, पर्यावरण की रक्षा, सामाजिक सद्भाव, सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा, कानून का पालन और अपने कार्यक्षेत्र में उत्कृष्टता के लिए निरंतर प्रयास जैसे संकल्प राष्ट्र निर्माण को मजबूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों को नमन करते हुए हमें अपनी उपलब्धियों पर गर्व करना चाहिए, कमियों को दूर करने का संकल्प लेना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा भारत बनाने में योगदान देना चाहिए, जिस पर हर भारतीय गर्व कर सके।

“भारत की स्वतंत्रता हमारी विरासत है, भारत की उपलब्धियां हमारा गौरव हैं और विकसित भारत हमारा संकल्प है।”

कलेक्टर ने मां नर्मदा की पावन धारा की तरह भारत की विकास यात्रा के निरंतर प्रवाहित होते रहने की कामना करते हुए सभी नागरिकों से राष्ट्र निर्माण की इस महान यात्रा में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान देने का आह्वान किया।

जय हिंद!

वंदे मातरम्!

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