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एशियन गेम्स 2026 · 58 मिनट पहले

सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, 44 साल बाद मैराथन में भारत को पदक

सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 की पुरुष मैराथन में 2:11:36 के समय के साथ सिल्वर मेडल जीता। भारत ने 44 साल बाद इस स्पर्धा में पदक हासिल किया।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 58 मिनट पहले
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सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में जीता सिल्वर, 44 साल बाद मैराथन में भारत को पदक

आइची-नागोया। भारतीय एथलीट सावन बरवाल ने एशियन गेम्स 2026 में पुरुषों की मैराथन स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में अपना नाम दर्ज करा लिया। शनिवार को हुई मैराथन में सावन ने 2 घंटे 11 मिनट 36 सेकंड का समय निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया।

सावन के इस प्रदर्शन के साथ ही एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत ने 44 साल बाद पदक जीता है। इस स्पर्धा में यह भारत का कुल चौथा पदक है। इससे पहले भारत को मैराथन में आखिरी पदक 1982 के एशियन गेम्स में मिला था।

सावन का यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने रेस के दौरान अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड बेहतर कर दिया।

अपने ही नेशनल रिकॉर्ड में किया सुधार

सावन बरवाल ने अप्रैल में रॉटरडैम मैराथन में शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 घंटे 12 मिनट से कम समय में मैराथन पूरी करने वाले पहले भारतीय बनने का रिकॉर्ड बनाया था।

उन्होंने उस प्रदर्शन के दौरान भारतीय मैराथन के दिग्गज धावक शिवनाथ सिंह का करीब 48 साल पुराना राष्ट्रीय रिकॉर्ड पीछे छोड़ा था। अब एशियन गेम्स में 2:11:36 का समय निकालकर सावन ने अपने ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड में एक और सुधार किया है।

खास बात यह है कि आइची-नागोया एशियन गेम्स में पदक जीतने तक सावन के नाम सिर्फ दो मैराथन रेस का अनुभव था। इसके बावजूद उन्होंने एशिया के शीर्ष धावकों के बीच शानदार प्रदर्शन किया।

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जापान के यामाशिता ने जीता गोल्ड

मैराथन में स्वर्ण पदक जापान के इचिटाका यामाशिता ने जीता। 29 वर्षीय यामाशिता ने 2 घंटे 10 मिनट 51 सेकंड का समय निकालकर रेस अपने नाम की।

यामाशिता ने घरेलू दर्शकों के सामने शुरुआत से ही सावन पर बढ़त बनाए रखी। जैसे-जैसे रेस अंतिम चरण में पहुंची, जापानी धावक ने अपनी स्थिति मजबूत बनाए रखी और स्टेडियम में प्रवेश करते ही घरेलू दर्शकों के जबरदस्त समर्थन के बीच स्वर्ण पदक हासिल कर लिया।

यामाशिता एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में स्वर्ण पदक जीतने वाले जापान के सातवें एथलीट बने। वहीं घरेलू धरती पर इस स्पर्धा में स्वर्ण जीतने वाले वह जापान के पहले एथलीट हैं।

44 साल बाद मैराथन में लौटा पदक

एशियन गेम्स के इतिहास में भारतीय पुरुष मैराथन का पदक सफर काफी पुराना है। भारत ने इस स्पर्धा में पहली बार 1951 में पदक जीता था।

उस साल छोटा सिंह ने स्वर्ण पदक और सुरत सिंह माथुर ने कांस्य पदक अपने नाम किया था। इसके बाद 1982 एशियन गेम्स में होसुर कुक्कप्पा सीतारन ने पुरुष मैराथन में कांस्य पदक जीता।

इसके बाद लंबे समय तक भारत इस स्पर्धा में पदक से दूर रहा। अब 2026 में सावन बरवाल ने रजत पदक जीतकर इस सूखे को खत्म किया है।

इस तरह 44 साल बाद एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत के खाते में पदक आया है।

दूसरी मैराथन में ही बड़ी उपलब्धि

सावन बरवाल की उपलब्धि इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैराथन में उनका अनुभव अभी शुरुआती दौर में है। एशियन गेम्स 2026 उनके करियर की सिर्फ दूसरी मैराथन थी।

रॉटरडैम में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ने के बाद उन्होंने आइची-नागोया में एशियन गेम्स का रजत पदक जीत लिया। महज दो मैराथन में राष्ट्रीय रिकॉर्ड और एशियन गेम्स पदक हासिल करना उनके करियर के तेजी से आगे बढ़ने का संकेत है।

भारतीय एथलेटिक्स के लिए बड़ा दिन

सावन बरवाल का रजत पदक एशियन गेम्स 2026 में भारतीय एथलेटिक्स के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धियों में शामिल हो गया है। 10,000 मीटर में गुलवीर सिंह के पदक के बाद मैराथन में सावन का सिल्वर भारत के लंबी दूरी के धावकों के प्रदर्शन को भी रेखांकित करता है।

सावन बरवाल ने 2:11:36 के समय के साथ न सिर्फ रजत पदक जीता, बल्कि 44 साल बाद एशियन गेम्स की पुरुष मैराथन में भारत का पदक इंतजार भी खत्म कर दिया। अब उनकी नजरें आने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में अपने राष्ट्रीय रिकॉर्ड को और बेहतर करने पर होंगी।

एशियाड में मैराथन में भारत के पदक

वर्ष खिलाड़ी पदक समय

1951 छोटा सिंह स्वर्ण 2:42:58.6

1951 सुरत सिंह माथुर कांस्य 2:53:49.8

1982 होसुर कुक्कप्पा सीतारन कांस्य 2:25:07

2026 सावन बरवाल रजत 2:11:36

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