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मेरठ · 6 मिनट पहले

सौरभ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, फैसला सुनाते समय जज ने महाभारत के श्लोक का किया जिक्र

: मेरठ के सौरभ हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड सुनाया गया। जानिए महाभारत के श्लोक, 22 गवाहों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से जुड़े मामले की पूरी जानकारी।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 6 मिनट पहले
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सौरभ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड, फैसला सुनाते समय जज ने महाभारत के श्लोक का किया जिक्र

मेरठ: उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ हत्याकांड में जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। सजा सुनाते समय जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत के श्लोक का उल्लेख करते हुए कानून और न्याय के महत्व को रेखांकित किया। 163 पन्नों के आदेश में अदालत ने अपराध की गंभीरता, हत्या की सुनियोजित प्रकृति और शव के साथ की गई क्रूरता को सजा के निर्धारण में महत्वपूर्ण माना।

जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे के मुताबिक, पुलिस ने 54 दिन की जांच के बाद करीब 1,000 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया था। मुकदमे के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। करीब 590 दिन बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया।

जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा
जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा

जज ने महाभारत के श्लोक का किया उल्लेख

फैसले में जिला जज ने महाभारत के विदुर नीति से जुड़े इस श्लोक का उल्लेख किया:

निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्।

तस्माद्व्याघ्रो वनं रक्षेद्वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥

इसका भावार्थ है कि जंगल के बिना बाघ सुरक्षित नहीं रह सकता और बाघ के बिना जंगल भी नष्ट हो सकता है। इसलिए दोनों की रक्षा आवश्यक है। इसी संदर्भ में न्यायाधीश ने कानून और समाज के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस प्रकार बाघ जंगल की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार कानून मनुष्य को सुरक्षा प्रदान करता है।

अदालत ने माना कि न्याय का उद्देश्य अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप दंड देना है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने इस मामले में अपराध की क्रूरता को देखते हुए मृत्युदंड को उचित माना।

सौरभ के वकील।
सौरभ के वकील।

लंदन में नौकरी कर परिवार का भविष्य संवारना चाहता था सौरभ

अदालत के आदेश में सौरभ के पारिवारिक जीवन और हत्या से पहले की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। आदेश के अनुसार, सौरभ अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी के बेहतर भविष्य के लिए लंदन में नौकरी करने गया था। वह वहां से परिवार के लिए पैसे भेजता था।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि मुस्कान ने सौरभ को धोखा दिया और साहिल के साथ संबंध बना लिए। इसके बाद दोनों ने सौरभ की हत्या की। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से बंद कर दिया गया। इसके बाद दोनों के हिमाचल प्रदेश घूमने जाने का भी मामला सामने आया था।

अभियोजन पक्ष ने इन परिस्थितियों को अपराध की गंभीरता और उसकी सुनियोजित प्रकृति के समर्थन में अदालत के सामने रखा।

बचाव पक्ष की वकील।
बचाव पक्ष की वकील।

दोनों बेटियों का हवाला देकर मुस्कान ने मांगी राहत

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने मुस्कान और साहिल से पूछा कि वे अपने बचाव में कुछ कहना चाहते हैं या नहीं। इस दौरान मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए रहम की अपील की।

बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने भी मुस्कान के बुजुर्ग माता-पिता और उसकी दोनों बेटियों की परिस्थितियों का उल्लेख किया। सजा के प्रश्न पर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच करीब 45 मिनट तक बहस हुई।

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर सजा में राहत नहीं दी जानी चाहिए। सरकारी पक्ष के मुताबिक, दोनों दोषियों ने जेल में रहने के दौरान अपराध के प्रति पश्चाताप या सुधार के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाए।

मुस्कान और सौरभ। भाई बबलू और मां रेनू।
मुस्कान और सौरभ। भाई बबलू और मां रेनू।

अभियोजन ने बताया सुनियोजित और क्रूर हत्या का मामला

जिला शासकीय अधिवक्ता के अनुसार, साहिल शुक्ला की उम्र करीब 28 वर्ष है और वह स्नातक है। वहीं मुस्कान रस्तोगी की उम्र भी करीब 28 वर्ष बताई गई है और उसकी शिक्षा आठवीं कक्षा तक है। अभियोजन ने दोनों की आय और रोजगार से संबंधित जानकारी भी अदालत के सामने रखी।

सरकारी पक्ष ने दलील दी कि हत्या के बाद शव के साथ की गई क्रूरता और साक्ष्यों से सामने आई परिस्थितियां अपराध को अत्यंत गंभीर बनाती हैं। अभियोजन ने यह भी कहा कि दोनों के कृत्य को देखते हुए समाज की सुरक्षा और न्याय की दृष्टि से कठोरतम सजा जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का दिया हवाला

मृत्युदंड की मांग के समर्थन में अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का उल्लेख किया। इनमें महेश बनाम मध्य प्रदेश राज्य, बाबू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, धनंजय चटर्जी, खुशविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य और बंटू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से जुड़े मामले शामिल बताए गए।

अभियोजन ने इन फैसलों के आधार पर तर्क दिया कि अत्यंत क्रूर और दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी के अपराधों में कठोर दंड दिया जा सकता है। अदालत ने मामले के तथ्यों और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।

सौरभ और मुस्कान की फाइल फोटो।
सौरभ और मुस्कान की फाइल फोटो।

चश्मदीद गवाह नहीं, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से साबित हुआ मामला

इस हत्याकांड में कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं था। पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ी तैयार की। अभियोजन के अनुसार, अदालत ने साक्ष्यों की श्रृंखला और गवाहियों पर विचार करने के बाद दोनों को दोषी माना।

जांच में मनाली, शिमला और कसौली के होटलों के प्रबंधकों ने आरोपियों के ठहरने से संबंधित रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जानकारी दी। इस दौरान दोनों के घूमने और मौज-मस्ती करने से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए थे।

इसके अलावा, मेडिकल स्टोर संचालक, ड्रम विक्रेता और सीमेंट विक्रेता के बयान दर्ज किए गए। टेलीकॉम कंपनियों के अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल टावर लोकेशन से संबंधित जानकारी भी पेश की।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च की रात मुस्कान और साहिल के मोबाइल फोन ब्रह्मपुरी स्थित उस मकान के आसपास की लोकेशन में दर्ज हुए, जहां हत्या हुई थी। एक गवाह ने भी वारदात की रात साहिल को सौरभ और मुस्कान के घर जाते देखने की बात कही।

बचाव पक्ष ने चश्मदीद गवाह न होने का उठाया मुद्दा

मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। वकील ने पड़ोसियों से सौरभ की चीखें सुनाई नहीं देने, ड्रम विक्रेता से बिल और दुकान के सीसीटीवी फुटेज तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े पहलुओं पर सवाल किए।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से शव की अत्यधिक सड़न के कारण मृत्यु के समय के अनुमान में संभावित अंतर को लेकर भी जिरह की गई। इसके अलावा, कैब चालक और होटल प्रबंधकों से आरोपियों के व्यवहार तथा उनके शरीर पर चोट के निशान नहीं होने जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए।

हालांकि, अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों का मूल्यांकन करने के बाद दोनों को दोषी करार दिया और मृत्युदंड की सजा सुनाई।

फैसले ने फिर चर्चा में लाया परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का महत्व

सौरभ हत्याकांड का फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि किसी आपराधिक मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के बावजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत और परस्पर जुड़ी श्रृंखला के आधार पर दोषसिद्धि हो सकती है।

इस मामले में डिजिटल रिकॉर्ड, होटल के दस्तावेज, मोबाइल लोकेशन और विभिन्न गवाहों के बयानों को अभियोजन ने अपनी दलीलों का आधार बनाया। अदालत के फैसले में अपराध की गंभीरता और सजा के औचित्य पर विस्तार से चर्चा की गई है।: उत्तर प्रदेश के चर्चित सौरभ हत्याकांड में जिला अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। सजा सुनाते समय जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने महाभारत के श्लोक का उल्लेख करते हुए कानून और न्याय के महत्व को रेखांकित किया। 163 पन्नों के आदेश में अदालत ने अपराध की गंभीरता, हत्या की सुनियोजित प्रकृति और शव के साथ की गई क्रूरता को सजा के निर्धारण में महत्वपूर्ण माना।

जिला शासकीय अधिवक्ता कृष्ण कुमार चौबे के मुताबिक, पुलिस ने 54 दिन की जांच के बाद करीब 1,000 पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल किया था। मुकदमे के दौरान 22 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। करीब 590 दिन बाद अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड सुनाया।

जज ने महाभारत के श्लोक का किया उल्लेख

फैसले में जिला जज ने महाभारत के विदुर नीति से जुड़े इस श्लोक का उल्लेख किया:

निर्वनो वध्यते व्याघ्रो निर्व्याघ्रं छिद्यते वनम्।

तस्माद्व्याघ्रो वनं रक्षेद्वनं व्याघ्रं च पालयेत्॥

इसका भावार्थ है कि जंगल के बिना बाघ सुरक्षित नहीं रह सकता और बाघ के बिना जंगल भी नष्ट हो सकता है। इसलिए दोनों की रक्षा आवश्यक है। इसी संदर्भ में न्यायाधीश ने कानून और समाज के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि जिस प्रकार बाघ जंगल की रक्षा करते हैं, उसी प्रकार कानून मनुष्य को सुरक्षा प्रदान करता है।

अदालत ने माना कि न्याय का उद्देश्य अपराध की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप दंड देना है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, अदालत ने इस मामले में अपराध की क्रूरता को देखते हुए मृत्युदंड को उचित माना।

लंदन में नौकरी कर परिवार का भविष्य संवारना चाहता था सौरभ

अदालत के आदेश में सौरभ के पारिवारिक जीवन और हत्या से पहले की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया। आदेश के अनुसार, सौरभ अपनी पत्नी मुस्कान और बेटी के बेहतर भविष्य के लिए लंदन में नौकरी करने गया था। वह वहां से परिवार के लिए पैसे भेजता था।

अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि मुस्कान ने सौरभ को धोखा दिया और साहिल के साथ संबंध बना लिए। इसके बाद दोनों ने सौरभ की हत्या की। हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में रखकर सीमेंट से बंद कर दिया गया। इसके बाद दोनों के हिमाचल प्रदेश घूमने जाने का भी मामला सामने आया था।

अभियोजन पक्ष ने इन परिस्थितियों को अपराध की गंभीरता और उसकी सुनियोजित प्रकृति के समर्थन में अदालत के सामने रखा।

दोनों बेटियों का हवाला देकर मुस्कान ने मांगी राहत

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने मुस्कान और साहिल से पूछा कि वे अपने बचाव में कुछ कहना चाहते हैं या नहीं। इस दौरान मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों के भविष्य का हवाला देते हुए रहम की अपील की।

बचाव पक्ष की वकील रेखा जैन ने भी मुस्कान के बुजुर्ग माता-पिता और उसकी दोनों बेटियों की परिस्थितियों का उल्लेख किया। सजा के प्रश्न पर अभियोजन और बचाव पक्ष के बीच करीब 45 मिनट तक बहस हुई।

अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए पारिवारिक परिस्थितियों के आधार पर सजा में राहत नहीं दी जानी चाहिए। सरकारी पक्ष के मुताबिक, दोनों दोषियों ने जेल में रहने के दौरान अपराध के प्रति पश्चाताप या सुधार के स्पष्ट संकेत नहीं दिखाए।

अभियोजन ने बताया सुनियोजित और क्रूर हत्या का मामला

जिला शासकीय अधिवक्ता के अनुसार, साहिल शुक्ला की उम्र करीब 28 वर्ष है और वह स्नातक है। वहीं मुस्कान रस्तोगी की उम्र भी करीब 28 वर्ष बताई गई है और उसकी शिक्षा आठवीं कक्षा तक है। अभियोजन ने दोनों की आय और रोजगार से संबंधित जानकारी भी अदालत के सामने रखी।

सरकारी पक्ष ने दलील दी कि हत्या के बाद शव के साथ की गई क्रूरता और साक्ष्यों से सामने आई परिस्थितियां अपराध को अत्यंत गंभीर बनाती हैं। अभियोजन ने यह भी कहा कि दोनों के कृत्य को देखते हुए समाज की सुरक्षा और न्याय की दृष्टि से कठोरतम सजा जरूरी है।

सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का दिया हवाला

मृत्युदंड की मांग के समर्थन में अभियोजन पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट के कई पुराने फैसलों का उल्लेख किया। इनमें महेश बनाम मध्य प्रदेश राज्य, बाबू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य, धनंजय चटर्जी, खुशविंदर सिंह बनाम पंजाब राज्य और बंटू बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से जुड़े मामले शामिल बताए गए।

अभियोजन ने इन फैसलों के आधार पर तर्क दिया कि अत्यंत क्रूर और दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी के अपराधों में कठोर दंड दिया जा सकता है। अदालत ने मामले के तथ्यों और प्रस्तुत दलीलों पर विचार करने के बाद दोनों दोषियों को मृत्युदंड सुनाया।

चश्मदीद गवाह नहीं, परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से साबित हुआ मामला

इस हत्याकांड में कोई प्रत्यक्ष चश्मदीद गवाह नहीं था। पुलिस ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों, डिजिटल रिकॉर्ड और गवाहों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ी तैयार की। अभियोजन के अनुसार, अदालत ने साक्ष्यों की श्रृंखला और गवाहियों पर विचार करने के बाद दोनों को दोषी माना।

जांच में मनाली, शिमला और कसौली के होटलों के प्रबंधकों ने आरोपियों के ठहरने से संबंधित रजिस्टर और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जानकारी दी। इस दौरान दोनों के घूमने और मौज-मस्ती करने से जुड़े वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए थे।

इसके अलावा, मेडिकल स्टोर संचालक, ड्रम विक्रेता और सीमेंट विक्रेता के बयान दर्ज किए गए। टेलीकॉम कंपनियों के अधिकारियों ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल टावर लोकेशन से संबंधित जानकारी भी पेश की।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, 3 मार्च की रात मुस्कान और साहिल के मोबाइल फोन ब्रह्मपुरी स्थित उस मकान के आसपास की लोकेशन में दर्ज हुए, जहां हत्या हुई थी। एक गवाह ने भी वारदात की रात साहिल को सौरभ और मुस्कान के घर जाते देखने की बात कही।

बचाव पक्ष ने चश्मदीद गवाह न होने का उठाया मुद्दा

मुकदमे की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। वकील ने पड़ोसियों से सौरभ की चीखें सुनाई नहीं देने, ड्रम विक्रेता से बिल और दुकान के सीसीटीवी फुटेज तथा पोस्टमार्टम रिपोर्ट से जुड़े पहलुओं पर सवाल किए।

पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर से शव की अत्यधिक सड़न के कारण मृत्यु के समय के अनुमान में संभावित अंतर को लेकर भी जिरह की गई। इसके अलावा, कैब चालक और होटल प्रबंधकों से आरोपियों के व्यवहार तथा उनके शरीर पर चोट के निशान नहीं होने जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे गए।

हालांकि, अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहियों का मूल्यांकन करने के बाद दोनों को दोषी करार दिया और मृत्युदंड की सजा सुनाई।

फैसले ने फिर चर्चा में लाया परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का महत्व

सौरभ हत्याकांड का फैसला इस बात को रेखांकित करता है कि किसी आपराधिक मामले में प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं होने के बावजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की मजबूत और परस्पर जुड़ी श्रृंखला के आधार पर दोषसिद्धि हो सकती है।

इस मामले में डिजिटल रिकॉर्ड, होटल के दस्तावेज, मोबाइल लोकेशन और विभिन्न गवाहों के बयानों को अभियोजन ने अपनी दलीलों का आधार बनाया। अदालत के फैसले में अपराध की गंभीरता और सजा के औचित्य पर विस्तार से चर्चा की गई है।

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