जांच पहुंची तो अटक गया हिसाब!
सांगाखेड़ाकला पंचायत में विकास कार्यों और जल प्रदाय योजना की शिकायत की जांच के दौरान भुगतान और निर्माण कार्य का मिलान नहीं । अब तीन साल का रिकॉर्ड मांगा गया


माखन नगर। ग्राम पंचायत सांगाखेड़ाकला में विकास कार्यों और जल प्रदाय योजना को लेकर लगाए गए अनियमितता, भ्रष्टाचार और शासकीय धन के दुरुपयोग के आरोपों ने अब पंचायत के रिकॉर्ड पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के बाद जब जांच दल पंचायत के रिकॉर्ड और निर्माण कार्यों की पड़ताल करने पहुंचा, तो भुगतान और कराए गए कार्यों का स्पष्ट मिलान नहीं हो सका। इसके बाद पंचायत से वित्तीय वर्ष 2024-25, 2025-26 और 2026-27 में कराए गए तमाम निर्माण कार्यों की नस्तियां और खर्च का स्पष्ट ब्योरा मांगा गया है।
शिकायत गंभीर थी, इसलिए बैठी जांच
दस्तावेज के मुताबिक ग्राम पंचायत सांगाखेड़ाकला निवासी नरेन्द्र सैनी ने सामाजिक सतर्कता समिति, पुराना सचिवालय भोपाल के माध्यम से शिकायत की थी। शिकायत में पंचायत के विकास कार्यों एवं जल प्रदाय योजना में अनियमितता, भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए थे।
शिकायत को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कार्यालय द्वारा 27 जुलाई 2026 को जांच दल गठित किया गया। इसके बाद 30 जुलाई को टीम ने पंचायत में निर्माण कार्यों और अभिलेखों का निरीक्षण किया।
सबसे बड़ा सवाल—पैसा गया कहां और काम कौन-सा हुआ?
जांच के दौरान शिकायत के बिंदु क्रमांक 01 और 02 की पड़ताल में जांच दल को ऐसा रिकॉर्ड नहीं मिला, जिससे किए गए भुगतान और संबंधित निर्माण कार्य का स्पष्ट मिलान किया जा सके।
यही वह बिंदु है जिसने पूरी जांच को रोक दिया।
पत्र में साफ कहा गया है कि निर्माण कार्य पर खर्च की गई राशि का मिलान नहीं होने के कारण जांच प्रतिवेदन तैयार नहीं हो पा रहा है।
अब तीन साल का पूरा हिसाब खंगालने के निर्देश
मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। पंचायत सचिव को निर्देश दिए गए हैं कि जांच दल के सामने व्यय का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत किया जाए।
साथ ही वित्तीय वर्ष:
2024-25
2025-26
2026-27
में कराए गए सभी निर्माण कार्यों की नस्तियां उपलब्ध कराने को कहा गया है।
यानी अब जांच सिर्फ एक-दो कामों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तीन वित्तीय वर्षों के निर्माण कार्य और उनसे जुड़े खर्च का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा।
यहां सवाल पंचायत द्वारा कराए गए कार्यो का नहीं, बल्कि उसकी भूमिका जानने का है।
1. जिस निर्माण कार्य पर भुगतान हुआ, उसका रिकॉर्ड स्पष्ट क्यों नहीं मिला?
2. भुगतान की गई राशि और मौके पर कराए गए निर्माण कार्य का मिलान क्यों नहीं हो पाया?
3. शिकायत के दो बिंदुओं की जांच में ही रिकॉर्ड अधूरा क्यों सामने आया?
4. तीन वित्तीय वर्षों के निर्माण कार्यों की नस्तियों में क्या सामने आएगा?
5. यदि रिकॉर्ड और मौके के काम में अंतर मिलता है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
जांच अभी बाकी, लेकिन रिकॉर्ड ने बढ़ाई बेचैनी
यह ध्यान रखना जरूरी है कि उपलब्ध दस्तावेज में भ्रष्टाचार या सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों को अभी जांच में सिद्ध नहीं बताया गया है। लेकिन जांच दल द्वारा भुगतान और निर्माण कार्य का मिलान नहीं कर पाना और इसके बाद तीन साल की नस्तियां तलब किया जाना मामले को गंभीर जरूर बनाता है।

