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नई दिल्ली · 14-08-2026

हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मानसून सत्र, लोकसभा में सिर्फ 19% और राज्यसभा में 39% हुआ कामकाज

संसद का मानसून सत्र भारी हंगामे के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ। लोकसभा में सिर्फ 19% और राज्यसभा में 39% कामकाज हुआ, जबकि 12 विधेयक पारित हुए।

देनवा पोस्ट
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समाचार डेस्क · 14-08-2026
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हंगामे की भेंट चढ़ा संसद का मानसून सत्र, लोकसभा में सिर्फ 19% और राज्यसभा में 39% हुआ कामकाज

नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र गुरुवार को भारी हंगामे और राजनीतिक गतिरोध के बीच अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। 20 जुलाई से शुरू हुए इस सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच कई मुद्दों पर टकराव जारी रहा। इसका सीधा असर संसदीय कामकाज पर पड़ा। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, पूरे सत्र में लोकसभा में केवल 19 प्रतिशत और राज्यसभा में करीब 39 प्रतिशत कामकाज हो सका।

सत्र के दौरान विपक्ष ने अयोध्या के राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी, दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई सहित कई मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी दल गृह मंत्री अमित शाह के बयान और इन मुद्दों पर चर्चा की मांग पर अड़े रहे, लेकिन सत्र के अंतिम दिन तक गतिरोध दूर नहीं हो सका।

लोकसभा में एक भी दिन प्रश्नकाल सुचारू नहीं

संसद के मानसून सत्र में हंगामे का सबसे ज्यादा असर लोकसभा के कामकाज पर दिखाई दिया। पूरे सत्र के दौरान एक भी दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल पूरी तरह सुचारू रूप से नहीं चल सका।

बताया गया कि केवल 28 और 29 जुलाई को सदन में अपेक्षाकृत सामान्य माहौल रहा। बाकी दिनों में विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण बार-बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

इससे सरकार से सवाल पूछने और विभिन्न मुद्दों पर सांसदों को अपनी बात रखने के लिए निर्धारित संसदीय समय का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ।

राज्यसभा में 37 घंटे 49 मिनट हुआ काम

राज्यसभा के 271वें सत्र में भी हंगामे का असर देखने को मिला। सभापति सीपी राधाकृष्णन के अनुसार, सदन में कुल 37 घंटे 49 मिनट ही कामकाज हो सका।

राज्यसभा में पूछे गए 285 तारांकित प्रश्नों में से केवल 16 प्रश्न ही सदन के पटल पर रखे जा सके। इसी तरह शून्यकाल के 380 विषयों में से 52 और विशेष उल्लेख के 380 प्रस्तावों में से केवल 93 विषय ही सदन में उठाए जा सके।

आंकड़े बताते हैं कि हंगामे और व्यवधान के कारण सांसदों को अपने क्षेत्र और राष्ट्रीय महत्व से जुड़े मुद्दे उठाने के लिए मिलने वाला निर्धारित समय भी प्रभावित हुआ।

12 विधेयक संसद से पारित

गतिरोध के बावजूद संसद के मानसून सत्र में 12 विधेयकों को मंजूरी मिली। इनमें कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्ताव शामिल रहे।

सत्र के दौरान प्रमुख रूप से सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीश संख्या) संशोधन विधेयक, 2026, विनियोग (संख्यांक 3) विधेयक, 2026, न्यायाधिकरण सुधार विधेयक, 2026, कराधान एवं अन्य विधियां संशोधन विधेयक, 2026 और जन्म एवं मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित किए गए।

इसके अलावा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026, राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (संशोधन) विधेयक, 2026, बैंककार बही साक्ष्य विधेयक, 2026, भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को भी मंजूरी मिली।

FCRA संशोधन विधेयक संयुक्त समिति के पास

सत्र की प्रमुख घटनाओं में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जाना भी रहा।

विपक्षी दलों के विरोध और सामाजिक संगठनों की ओर से उठाई गई आपत्तियों के बाद विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए संयुक्त समिति को भेजा गया। अब समिति विधेयक के प्रावधानों की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट संसद के समक्ष पेश करेगी।

NEET विवाद के बीच परीक्षा सुधार विधेयक पारित

नीट पेपर लीक विवाद की पृष्ठभूमि में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 भी संसद से पारित हुआ।

29 जुलाई को दोनों सदनों ने विधेयक को मंजूरी दी। लोकसभा में इस विधेयक पर करीब 10 घंटे चर्चा हुई। चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और सत्ता पक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस भी देखने को मिली।

विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों और पेपर लीक जैसी गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कानूनी व्यवस्था को मजबूत करना है।

'वंदे मातरम' से जुड़े विधेयक पर भी हंगामा

सत्र के दौरान राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी विपक्ष के विरोध के बीच पारित किया गया। इसमें 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर प्रावधान किए गए हैं।

इस विधेयक को लेकर भी सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला।

अंतिम दिन खान एवं खनिज विधेयक पारित

संसद के अंतिम दिन भी हंगामा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। राज्यसभा में खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के बाद इसे पारित किया गया।

इसके बाद राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12:05 बजे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई।

विधेयक पास हुए, लेकिन सवाल छोड़ गया सत्र

मानसून सत्र में सरकार महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराने में सफल रही, लेकिन विपक्ष के लगातार विरोध और सदन में बार-बार हुए व्यवधान ने संसदीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

एक तरफ 12 विधेयकों का पारित होना सरकार के विधायी एजेंडे की प्रगति को दर्शाता है, तो दूसरी तरफ लोकसभा में सिर्फ 19 प्रतिशत और राज्यसभा में 39 प्रतिशत कामकाज यह बताता है कि राजनीतिक टकराव के कारण संसद का बड़ा हिस्सा अपेक्षित तरीके से नहीं चल सका।

अब मानसून सत्र समाप्त होने के बाद राजनीतिक दलों के बीच यह बहस जारी रहने की संभावना है कि संसद में महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और राजनीतिक असहमति के बीच बेहतर संतुलन कैसे कायम किया जाए।

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