गोटमार मेले में फिर बरसे पत्थर, 1330 से ज्यादा घायल; 8 गंभीर नागपुर रेफर
पांढुर्णा के गोटमार मेले में शुक्रवार को झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के बीच पत्थरबाजी हुई। 1330 से ज्यादा घायल, 8 गंभीर नागपुर रेफर।


पांढुर्णा। मध्य प्रदेश के पांढुर्णा में शुक्रवार को आयोजित प्रसिद्ध गोटमार मेले में परंपरा के नाम पर हुई पत्थरबाजी ने एक बार फिर गंभीर स्थिति पैदा कर दी। जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे को लेकर पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष आमने-सामने आ गए। दोनों ओर से जमकर पत्थरबाजी हुई, जिसमें 1330 से अधिक लोग घायल होने की जानकारी सामने आई है।
घायलों में से 8 की हालत गंभीर होने पर उन्हें नागपुर रेफर किया गया, जबकि करीब 120 घायलों को जिला अस्पताल भेजा गया। बड़ी संख्या में लोगों का उपचार मौके पर बनाए गए स्वास्थ्य शिविरों और अस्पतालों में किया गया।
झंडे पर कब्जे को लेकर हुआ मुकाबला
गोटमार मेले की वर्षों पुरानी परंपरा के अनुसार जाम नदी के बीच एक झंडा लगाया जाता है। इस झंडे पर कब्जा करने के लिए पांढुर्णा और सावरगांव के लोग आमने-सामने होते हैं।
परंपरा के तहत दोनों पक्षों के लोग एक-दूसरे पर पत्थर बरसाते हैं और नदी के बीच लगे झंडे को हासिल करने का प्रयास करते हैं।
शुक्रवार को भी इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई। देखते ही देखते नदी के आसपास का क्षेत्र पत्थरों की बौछार से घिर गया। कई लोगों को चोट लगने के बाद उपचार के लिए अस्पताल और स्वास्थ्य शिविरों में ले जाया गया।

सिर में गंभीर चोटें, एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूटी
पत्थरबाजी के दौरान कई लोगों के सिर में गंभीर चोटें आईं। वहीं एक व्यक्ति के पैर की हड्डी टूटने की भी जानकारी सामने आई है।
अचानक तेज हुई पत्थरबाजी के बीच मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। कई लोग पत्थरों से बचने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते नजर आए।
घायलों को तत्काल उपचार के लिए बनाए गए स्वास्थ्य शिविरों और अस्पतालों तक पहुंचाया गया। गंभीर घायलों को बेहतर उपचार के लिए नागपुर रेफर किया गया।
शाम 6 बजे पांढुर्णा पक्ष ने झंडा तोड़ा
कई घंटे तक चले इस पारंपरिक मुकाबले के बाद शाम करीब 6 बजे पांढुर्णा पक्ष ने नदी के बीच लगाए गए झंडे को तोड़ दिया। इसके साथ ही पांढुर्णा पक्ष ने जीत का दावा किया।
झंडा तोड़े जाने के बाद मेले में चल रहा मुकाबला समाप्त हुआ।
सुरक्षा के बावजूद नहीं रुकी पत्थरबाजी
मेले को लेकर प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। इसके बावजूद दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी को पूरी तरह रोकना प्रशासन के लिए चुनौती बना रहा।
बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अमला तैनात होने के बावजूद परंपरा के दौरान पत्थरबाजी का सिलसिला जारी रहा। घायलों की संख्या बढ़ने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीमों को भी उपचार के लिए सक्रिय किया गया।
हर साल सामने आती है चोट और मौत की चुनौती
गोटमार मेला पांढुर्णा की वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ा आयोजन है। इसमें जाम नदी के बीच लगाए गए झंडे पर कब्जे के लिए दोनों पक्षों के बीच पत्थर चलाने की परंपरा रही है।
हालांकि, इस परंपरा का हिंसक स्वरूप लंबे समय से सवालों के घेरे में रहा है। हर साल बड़ी संख्या में लोगों के घायल होने की घटनाएं सामने आती हैं और अतीत में इस आयोजन के दौरान मौतें भी हो चुकी हैं।
इस बार भी 1330 से अधिक लोगों के घायल होने की घटना ने आयोजन की सुरक्षा व्यवस्था और परंपरा के स्वरूप को लेकर बहस फिर तेज कर दी है।
परंपरा या खतरा? फिर उठे सवाल
गोटमार मेले की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान अपनी जगह है, लेकिन पत्थरबाजी के कारण बड़ी संख्या में लोगों का घायल होना गंभीर चिंता का विषय है।
हर साल प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था करता है, स्वास्थ्य शिविर लगाए जाते हैं और पुलिस बल तैनात किया जाता है। इसके बावजूद यदि हजारों लोग पत्थरबाजी के बीच घायल हो रहे हैं तो आयोजन को सुरक्षित बनाने के तरीके पर नए सिरे से विचार की जरूरत महसूस होती है।
गोटमार मेले की परंपरा को बनाए रखते हुए इसे हिंसा और गंभीर चोटों से मुक्त कैसे बनाया जाए, यह सवाल एक बार फिर सामने है। प्रशासन के सामने चुनौती अब केवल मेले को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने की नहीं, बल्कि वर्षों पुरानी परंपरा को सुरक्षित स्वरूप देने की भी है।

