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Ganesh Chaturthi 2026 · 22 मिनट पहले

गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर को गणपति स्थापना के 3 शुभ मुहूर्त, जानें मूर्ति स्थापना के नियम

Ganesh Chaturthi 2026: 14 सितंबर को गणपति स्थापना के 3 शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। जानें चतुर्थी तिथि, चौघड़िया मुहूर्त, कलश की दिशा और गणेश प्रतिमा से जुड़े नियम।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 22 मिनट पहले
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गणेश चतुर्थी 2026: 14 सितंबर को गणपति स्थापना के 3 शुभ मुहूर्त, जानें मूर्ति स्थापना के नियम

Ganesh Chaturthi 2026: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूजनीय माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने की परंपरा है। इस वर्ष गणेश चतुर्थी 14 सितंबर 2026 को मनाई जाएगी। गणपति स्थापना के लिए मध्याह्न काल को विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, जो श्रद्धालु इस अवधि में गणेश प्रतिमा स्थापित नहीं कर पाएं, वे चौघड़िया के शुभ मुहूर्त में भी स्थापना कर सकते हैं।

14 सितंबर को कब शुरू होगी चतुर्थी तिथि?

पंचांग गणना के अनुसार चतुर्थी तिथि 14 सितंबर 2026 को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह 7 बजकर 45 मिनट तक रहेगी।

गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा कर घर, प्रतिष्ठान या सार्वजनिक पंडालों में गणपति प्रतिमा की स्थापना करेंगे।

गणेश स्थापना के 3 शुभ मुहूर्त

तारीख: 14 सितंबर 2026

चर: दोपहर 1:49 बजे से 3:22 बजे तक

लाभ: दोपहर 3:22 बजे से शाम 4:55 बजे तक

अमृत: शाम 4:55 बजे से 6:28 बजे तक

इन चौघड़िया मुहूर्तों में श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार गणपति स्थापना कर सकते हैं।

गणेश स्थापना के लिए दोपहर का समय क्यों माना जाता है शुभ?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान गणेश का प्राकट्य भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के मध्याह्न काल में हुआ था। इसी कारण गणेश चतुर्थी के दिन गणपति स्थापना और पूजा के लिए दोपहर का मध्याह्न समय विशेष शुभ माना जाता है।

मान्यता है कि इस समय विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा करने से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और शुभ कार्यों में सफलता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

गणेश जी के पास कलश किस ओर रखें?

गणेश स्थापना के दौरान कलश रखने को लेकर भी कई श्रद्धालुओं के मन में सवाल रहता है। पूजा करने वाले व्यक्ति की दृष्टि से देखें तो कलश गणेश जी के बाईं ओर रखा जाता है। यानी गणेश जी की प्रतिमा आपके सामने हो और आप पूजा के लिए बैठे हों, तो कलश आपके दाईं ओर दिखाई देगा।

कलश को गणेश जी की चौकी के पास स्थापित किया जा सकता है। इसमें जल, अक्षत और सुपारी रखकर ऊपर आम या अशोक के पत्ते तथा नारियल रखा जाता है।

कैसी होनी चाहिए गणेश जी की प्रतिमा?

गणेश चतुर्थी पर प्रतिमा स्थापना से जुड़ी कुछ पारंपरिक मान्यताएं भी प्रचलित हैं।

मिट्टी की प्रतिमा को दें प्राथमिकता

पर्यावरण की दृष्टि से प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस और ऐसे रासायनिक पदार्थों से बनी प्रतिमाओं से बचने की सलाह दी जाती है।

कुछ परंपराओं में सफेद मदार की जड़, सोने, चांदी या तांबे से बनी गणेश प्रतिमा की पूजा का भी उल्लेख मिलता है।

बैठी हुई गणेश प्रतिमा को माना जाता है शुभ

गृहस्थों के लिए घर में बैठी हुई गणेश प्रतिमा स्थापित करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे घर में स्थिरता, सुख और समृद्धि बनी रहती है।

बाईं ओर मुड़ी सूंड

गृहस्थ पूजा के लिए सामान्यतः बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणेश जी की प्रतिमा को सरल और शुभ माना जाता है। हालांकि अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में प्रतिमा के स्वरूप को लेकर मान्यताएं अलग हो सकती हैं।

मूषक वाहन का होना

गणेश प्रतिमा में भगवान गणेश के साथ मूषक वाहन का स्वरूप भी पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। मूषक भगवान गणेश के वाहन के रूप में धार्मिक कथाओं और परंपराओं में वर्णित है।

पाश और अंकुश

पारंपरिक स्वरूप में भगवान गणेश के हाथों में पाश और अंकुश का उल्लेख मिलता है। इसलिए गणेश प्रतिमा में इन आयुधों का होना उनके पारंपरिक स्वरूप का प्रतीक माना जाता है।

ललाट पर चंद्रमा

भगवान गणेश को भालचंद्र भी कहा जाता है। इसलिए ललाट पर चंद्रमा वाला स्वरूप गणेश जी के प्रसिद्ध धार्मिक स्वरूप से जुड़ा माना जाता है।

जनेऊ और पारंपरिक स्वरूप

गणेश प्रतिमा में कंधे पर नाग रूपी जनेऊ को भी पारंपरिक स्वरूप का हिस्सा माना जाता है। वहीं शास्त्रीय वर्णनों में गणेश जी के धूम्रवर्ण स्वरूप का उल्लेख मिलता है। हालांकि विभिन्न क्षेत्रों और परंपराओं में अलग-अलग रंगों की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं।

गणपति स्थापना के साथ पर्यावरण का भी रखें ध्यान

गणेश चतुर्थी आस्था और उत्सव का पर्व है। ऐसे में प्रतिमा स्थापना के साथ पर्यावरण संरक्षण का ध्यान रखना भी जरूरी है। प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमा का उपयोग, पूजा सामग्री का उचित निस्तारण और स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था का पालन किया जाना चाहिए।

गणपति स्थापना के दौरान श्रद्धालु अपनी धार्मिक परंपराओं और स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय निर्धारित कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि Denvapost.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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