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नई दिल्ली · 54 मिनट पहले

BRICS Summit 2026: डॉलर के दबदबे को चुनौती, स्थानीय मुद्रा में व्यापार पर जोर; मोदी-पुतिन की अहम बैठक

BRICS Summit 2026 से पहले स्थानीय मुद्रा में व्यापार और BRICS Pay पर जोर बढ़ा है। मोदी-पुतिन बैठक, जिनपिंग की भारत यात्रा और UPI पर पीएम मोदी के बयान की पूरी जानकारी।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 54 मिनट पहले
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BRICS Summit 2026: डॉलर के दबदबे को चुनौती, स्थानीय मुद्रा में व्यापार पर जोर; मोदी-पुतिन की अहम बैठक

नई दिल्ली। वैश्विक कारोबार में अमेरिकी डॉलर के दबदबे को कम करने की दिशा में ब्रिक्स देशों ने स्थानीय मुद्राओं में व्यापार और भुगतान को बढ़ावा देने पर जोर दिया है। नई दिल्ली में शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को आयोजित ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भारत, रूस और ईरान इस मुद्दे पर एक राय नजर आए।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने ब्रिक्स देशों के बीच आपसी व्यापार को डॉलर के बजाय स्थानीय मुद्राओं में बढ़ाने की वकालत की। वहीं भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देने के लिए ब्रिक्स देशों की डिजिटल भुगतान प्रणालियों को आपस में जोड़ा जाना चाहिए।

इस पहल को वैश्विक व्यापार व्यवस्था में वैकल्पिक भुगतान तंत्र विकसित करने और डॉलर पर निर्भरता कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

ब्रिक्स पे पर बन सकती है सहमति

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शनिवार को BRICS Pay जैसी नई भुगतान प्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण चर्चा होने की संभावना है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा है कि इस संबंध में जल्द जानकारी सामने आएगी।

BRICS Pay की अवधारणा का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सीमा-पार भुगतान को आसान बनाना है। इसके जरिए पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों पर निर्भरता कम करते हुए स्थानीय मुद्राओं में भुगतान को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

इसके समर्थकों के अनुसार, ऐसी प्रणाली से कारोबारियों के लिए दूसरे ब्रिक्स देशों में भुगतान और व्यापार करना आसान हो सकता है। यात्रियों के लिए भी स्थानीय भुगतान व्यवस्था का इस्तेमाल सुविधाजनक बनाने की कोशिश की जा रही है।

शनिवार से शुरू होगा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन

नई दिल्ली में शनिवार को ब्रिक्स सदस्य देशों के नेताओं का शिखर सम्मेलन शुरू होगा। कार्यक्रम के अनुसार दोपहर करीब ढाई बजे बंद कमरे में बैठक शुरू होगी। इसके बाद सदस्य देशों के प्रतिनिधिमंडल भारत इनोवेट्स प्रदर्शनी का दौरा करेंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिक्स नेताओं के लिए रात्रिभोज का भी आयोजन करेंगे।

इस सम्मेलन में वैश्विक व्यापार, आर्थिक सहयोग, डिजिटल भुगतान, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

जिनपिंग-मोदी की मुलाकात पर भी नजर

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को नई दिल्ली पहुंचेंगे। ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है।

गलवां संघर्ष के बाद जिनपिंग की भारत यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चीन ने यात्रा से पहले कहा है कि भारत और चीन को अपने मतभेदों को उचित तरीके से सुलझाना चाहिए और द्विपक्षीय संबंधों को दीर्घकालिक दृष्टिकोण से आगे बढ़ाना चाहिए।

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि चीन भारत के साथ अच्छे पड़ोसी की तरह संबंध विकसित करने के लिए काम करेगा।

पीएम मोदी ने बताया भारत के स्टार्टअप और UPI की ताकत

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले शुक्रवार को आयोजित बिजनेस फोरम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स के बढ़ते आर्थिक प्रभाव का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि 2006 में चार देशों से शुरू हुआ यह समूह अब दुनिया की करीब 50 प्रतिशत आबादी, 25 प्रतिशत कारोबार और 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी का प्रतिनिधित्व करता है।

प्रधानमंत्री ने भारत की स्टार्टअप क्रांति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में करीब दो लाख स्टार्टअप काम कर रहे हैं और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

मोदी ने UPI को भारत की बड़ी डिजिटल ताकत बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से दुनिया के करीब 50 प्रतिशत रियल-टाइम भुगतान किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में ऐसा इकोसिस्टम तैयार किया है, जिसे दूसरे देश भी अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। ब्रिक्स के सदस्य देश भारत के अनुभव से सीखकर अपने देशों के लिए नए डिजिटल समाधान विकसित कर सकते हैं।

'मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया, स्केल फॉर द वर्ल्ड'

प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स देशों के कारोबारी समुदाय के सामने 'मेक इन इंडिया, इनोवेट विद इंडिया, स्केल फॉर द वर्ल्ड' का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भारत ने ऊर्जा से लेकर तकनीक तक अपनी आपूर्ति शृंखलाओं को अधिक विविध और विश्वसनीय बनाया है।

भारत में सड़क, रेलवे, बंदरगाह और हवाईअड्डों के बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार हो रहा है। इसके साथ ही सेमीकंडक्टर, जहाज निर्माण, क्वांटम तकनीक, महत्वपूर्ण खनिज और जैव प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में नई क्षमताएं विकसित की जा रही हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत विकास और स्थायित्व का भरोसा देने वाला प्रमुख केंद्र बन रहा है।

समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर मोदी का जोर

प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक व्यापार के लिए समुद्री मार्गों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार तभी आगे बढ़ सकता है जब समुद्री रास्ते सुरक्षित हों, आपूर्ति की श्रृंखलाएं खुली रहें और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

मोदी ने आवागमन की स्वतंत्रता और समुद्री यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भारत के समर्थन की बात कही।

इस दौरान ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन भी मौजूद थे। मोदी ने अपने संबोधन में होर्मुज जलडमरूमध्य का सीधे नाम नहीं लिया, लेकिन समुद्री सुरक्षा और निर्बाध व्यापार के महत्व पर जोर दिया।

मोदी-पुतिन की 45 मिनट अहम बैठक

ब्रिक्स बिजनेस फोरम से अलग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच करीब 45 मिनट की द्विपक्षीय बैठक हुई।

बैठक में दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर से अधिक करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।

भारत और रूस के बीच मौजूदा सालाना व्यापार करीब 65 अरब डॉलर बताया जा रहा है। दोनों नेताओं ने व्यापार के अलावा रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, कौशल विकास और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने सहित कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की।

मोदी ने पुतिन का रूस आने का निमंत्रण स्वीकार किया

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने प्रधानमंत्री मोदी को 24वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए रूस आने का निमंत्रण दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने निमंत्रण स्वीकार कर लिया है।

बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने रूस के सामने काला सागर में भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया। हाल में व्यापारिक जहाजों पर हुए हमलों में भारतीय नागरिकों के मारे जाने की घटनाओं को लेकर भारत की चिंता सामने रखी गई।

दोनों देशों ने रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर भी चर्चा की। इसमें ब्रह्मोस मिसाइल के अपग्रेड, सुखोई-57 लड़ाकू विमान और एस-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति जैसे मुद्दे शामिल रहे।

पुतिन का G7 पर निशाना

ब्रिक्स बिजनेस फोरम में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों और विशेष रूप से G7 पर निशाना साधा।

उन्होंने सवाल उठाया कि जी-7 खुद को 'ग्रेट' क्यों कहता है, जबकि उसके देशों की अर्थव्यवस्था का वैश्विक जीडीपी में हिस्सा करीब 18 प्रतिशत बताया जाता है। इसके मुकाबले उन्होंने ब्रिक्स देशों की वैश्विक जीडीपी में हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत बताई।

पुतिन ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था बदल रही है और आर्थिक विकास के नए केंद्र उभर रहे हैं। उनके अनुसार पश्चिमी देशों का वैश्विक आर्थिक दबदबा पहले जैसा नहीं रहा है।

उन्होंने ब्रिक्स देशों को दुनिया की ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा में योगदान देने की क्षमता वाला समूह बताया।

नए व्यापार मार्गों पर रूस का जोर

रूस ने वैश्विक व्यापार के लिए नए लॉजिस्टिक्स रूट विकसित करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

पुतिन ने उत्तर-दक्षिण परिवहन कॉरिडोर जैसे वैकल्पिक व्यापार मार्गों के विकास में सहयोग की बात कही। इसके अलावा एशिया और यूरोप के बीच व्यापार के लिए आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को संभावित विकल्प के तौर पर विकसित करने की बात भी सामने आई।

इसका उद्देश्य लंबी और जोखिमपूर्ण समुद्री व्यापारिक राहों के विकल्प तैयार करना और एशिया-यूरोप के बीच माल परिवहन को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

पेजेश्कियन ने डॉलर निर्भरता खत्म करने की वकालत की

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्राओं पर अत्यधिक निर्भरता के कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार राजनीतिक दबाव और प्रतिबंधों से प्रभावित होता है। उनके अनुसार ब्रिक्स देशों को इस निर्भरता को कम करने के लिए अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना चाहिए।

पेजेश्कियन ने ब्रिक्स को व्यापार, निवेश और संयुक्त वित्तपोषण का अधिक एकीकृत नेटवर्क बनाने की जरूरत बताई।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मुद्राओं का अधिक इस्तेमाल और जोखिम प्रबंधन के मजबूत तंत्र से ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार बाहरी आर्थिक झटकों से अधिक सुरक्षित हो सकता है।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी कहा कि ब्रिक्स के सदस्य देशों के बीच व्यापार राष्ट्रीय मुद्राओं में बढ़ाने को लेकर सहमति है।

यूएन महासचिव से भी पीएम मोदी की मुलाकात

ब्रिक्स बिजनेस फोरम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से भी मुलाकात की।

दोनों नेताओं के बीच विभिन्न क्षेत्रों में जारी संघर्ष, समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता, सतत विकास, मानव-केंद्रित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

ब्रिक्स सम्मेलन में क्या होगा सबसे अहम?

नई दिल्ली में होने वाले इस सम्मेलन में तीन मुद्दों पर खास नजर रहेगी—स्थानीय मुद्राओं में व्यापार, डिजिटल भुगतान व्यवस्था और ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग का विस्तार।

यदि ब्रिक्स देश स्थानीय मुद्राओं और आपस में जुड़ी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को बड़े स्तर पर लागू करने में सफल होते हैं, तो इससे सीमा-पार व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने का रास्ता खुल सकता है।

भारत के लिए UPI और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा इस चर्चा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। वहीं रूस और ईरान पहले से ही डॉलर आधारित वित्तीय व्यवस्था और प्रतिबंधों से प्रभावित होने के कारण वैकल्पिक भुगतान तंत्र को लेकर सक्रिय रहे हैं।

अब सबकी नजर शनिवार को होने वाले ब्रिक्स शिखर सम्मेलन पर है, जहां इन प्रस्तावों को लेकर सदस्य देशों के बीच किस स्तर की सहमति बनती है, यह महत्वपूर्ण होगा।

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