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पचमढ़ी · 1 मिनट पहले

पचमढ़ी की झील के पानी में मिली भारी धातुएं, सागर विश्वविद्यालय के शोध में कैडमियम की मौजूदगी का खुलासा

सागर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के शोध में पचमढ़ी झील के पानी में कैडमियम समेत छह धातुओं की मौजूदगी सामने आई। जानें स्वास्थ्य जोखिम और जरूरी सावधानियां।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 1 मिनट पहले
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पचमढ़ी की झील के पानी में मिली भारी धातुएं, सागर विश्वविद्यालय के शोध में कैडमियम की मौजूदगी का खुलासा

पचमढ़ी। मध्यप्रदेश के सागर और पचमढ़ी के जल स्रोतों को लेकर डॉ. हरीसिंह गौर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के एक शोध में महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग के शोधकर्ताओं ने जल के नमूनों में स्ट्रॉन्शियम, कैडमियम, मैंगनीज, कॉपर, निकेल और बेरियम जैसी छह धातुओं की मौजूदगी दर्ज की है। अध्ययन में पचमढ़ी झील के पानी में कैडमियम की मात्रा को लेकर विशेष चिंता जताई गई है। शोधकर्ताओं ने जल स्रोतों की नियमित जांच और स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता बढ़ाने की सिफारिश की है।

शोध के अनुसार, पानी में मौजूद कुछ धातुएं लंबे समय तक संपर्क में रहने पर मानव स्वास्थ्य और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, इन निष्कर्षों के आधार पर किसी व्यक्ति के बीमार होने या पूरे जल स्रोत के असुरक्षित होने की पुष्टि के लिए अतिरिक्त जांच और जोखिम का आकलन जरूरी है।

ICP-MS तकनीक से की गई पानी के नमूनों की जांच

शोध दल का नेतृत्व डॉ. राजकुमार कोईरी ने किया। वैज्ञानिकों ने पानी के नमूनों में विभिन्न धातुओं की मात्रा का पता लगाने के लिए इंडक्टिवली कपल्ड प्लाज्मा मास स्पेक्ट्रोमेट्री (ICP-MS) तकनीक का इस्तेमाल किया।

अध्ययन में पचमढ़ी झील के पानी में स्ट्रॉन्शियम की मात्रा 27.54 पीपीबी और कैडमियम का स्तर 0.69 पीपीबी दर्ज किया गया। शोध में इन स्तरों को सुरक्षा मानकों के संदर्भ में चिंता का विषय बताया गया है। हालांकि, इन आंकड़ों का सही आकलन करने के लिए संबंधित जल उपयोग, लागू मानकों और जांच की परिस्थितियों को ध्यान में रखना आवश्यक है।

शोध दल में सिद्धार्थ राजपूत, सतीश सत्य बरिक, श्रुति जैन, कुलदीप गौलिया, डॉ. अदिति मेहरोत्रा, डॉ. विवेक कुमार पांडे, डॉ. संदीप कुमार और डॉ. चंद्रमा प्रकाश उपाध्याय शामिल रहे।

यह अध्ययन भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग की DBT BUILDER परियोजना, DST-SERB और ANRF-ARG के आर्थिक एवं तकनीकी सहयोग से किया गया। शोध को अंतरराष्ट्रीय जर्नल Bulletin of Environmental Contamination and Toxicology में प्रकाशित किया गया है।

जलीय पौधों पर भी दिखा रासायनिक दबाव का असर

जल स्रोतों में मौजूद धातुओं का जलीय वनस्पतियों पर प्रभाव समझने के लिए वैज्ञानिकों ने मनी प्लांट को बायोइंडिकेटर के रूप में इस्तेमाल किया। इसके लिए पानी के नमूनों में 21 दिनों तक पौधों को रखा गया और उनकी प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया का विश्लेषण किया गया।

शोध के मुताबिक, पानी में मौजूद रासायनिक तत्वों के संपर्क से पौधों की सामान्य शारीरिक प्रक्रियाओं पर तनाव का संकेत मिला। मैंगनीज और कॉपर जैसी धातुओं की अधिक मात्रा जलीय वनस्पतियों की वृद्धि को प्रभावित कर सकती है।

वैज्ञानिकों ने यह भी रेखांकित किया कि जल स्रोतों में मौजूद कुछ हानिकारक तत्व खाद्य श्रृंखला में प्रवेश कर सकते हैं। यदि ये तत्व जलीय जीवों में जमा होते हैं, तो दूषित मछलियों और अन्य खाद्य पदार्थों के सेवन के माध्यम से मानव शरीर तक पहुंचने का जोखिम हो सकता है।

कैडमियम से किडनी और हड्डियों को नुकसान का खतरा

कैडमियम एक विषैली भारी धातु है, जिसका उपयोग बैटरियों, प्लास्टिक, इलेक्ट्रोप्लेटिंग, सौर पैनलों और विभिन्न मिश्रधातुओं के निर्माण में किया जाता है। यह प्राकृतिक प्रक्रियाओं के साथ-साथ औद्योगिक कचरे, फॉस्फेट उर्वरकों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे के अनुचित निपटान से भी पर्यावरण में पहुंच सकता है। तंबाकू के धुएं के संपर्क से भी शरीर में कैडमियम प्रवेश कर सकता है।

लंबे समय तक कैडमियम के अधिक संपर्क में रहने से गुर्दों को नुकसान, हड्डियों की कमजोरी और अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में यह कैंसर के जोखिम से भी जुड़ा है। हालांकि, पचमढ़ी झील के पानी में दर्ज मात्रा से स्थानीय आबादी पर वास्तविक स्वास्थ्य प्रभाव का निर्धारण करने के लिए विस्तृत जोखिम आकलन जरूरी है।

सरकार से नियमित जांच और स्वास्थ्य शिविर लगाने की सिफारिश

अध्ययन के निष्कर्षों को ध्यान में रखते हुए शोधकर्ताओं ने मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य सरकार से प्रभावित जल स्रोतों की नियमित निगरानी कराने की सिफारिश की है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित करने और सुरक्षित पेयजल के प्रति जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया है।

नियमित जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पानी में धातुओं की मात्रा समय के साथ बदल रही है या नहीं और किन जल स्रोतों पर विशेष निगरानी की आवश्यकता है।

आम नागरिक पानी के इस्तेमाल में बरतें सावधानी

वैज्ञानिकों ने नदी और झील के पानी को बिना जांच के सीधे पीने से बचने की सलाह दी है। पानी को केवल उबालने से उसमें मौजूद भारी धातुएं दूर नहीं होतीं। इसलिए पेयजल में इनकी मौजूदगी की आशंका होने पर ऐसे प्रमाणित उपचार विकल्पों का इस्तेमाल करना चाहिए, जो संबंधित धातुओं को हटाने में सक्षम हों। इसके लिए आरओ या आयन एक्सचेंज प्रणाली का चयन पानी की जांच और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर किया जाना चाहिए।

जब तक संबंधित जल स्रोतों की सुरक्षा की पुष्टि न हो जाए, तब तक वहां से प्राप्त मछलियों के सेवन को लेकर भी स्थानीय स्वास्थ्य एवं खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सलाह पर ध्यान देना चाहिए। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करना विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।

इस शोध ने जल स्रोतों की गुणवत्ता पर नियमित निगरानी की आवश्यकता को रेखांकित किया है। अब संबंधित विभागों की जांच और आगे की कार्रवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि किन क्षेत्रों में अतिरिक्त सावधानी, जल उपचार और स्वास्थ्य संबंधी कदम उठाने की जरूरत है।

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