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नर्मदापुरम · 4 मिनट पहले

मीनाक्षी चौक में बाल श्रम रोकथाम के लिए संयुक्त जन-जागरूकता अभियान

संस्थानों में लगाए गए बाल श्रम रोकथाम संबंधी स्टीकर, नियोजकों को कानून के प्रावधानों की दी जानकारी

गोविंद यादव
गोविंद यादव
Reporter · 4 मिनट पहले
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मीनाक्षी चौक में बाल श्रम रोकथाम के लिए संयुक्त जन-जागरूकता अभियान

नर्मदापुरम। बाल श्रम की रोकथाम और बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के उद्देश्य से शुक्रवार को नर्मदापुरम शहर के मीनाक्षी चौक क्षेत्र में संयुक्त जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। कलेक्टर सोमेश मिश्रा के निर्देशानुसार आयोजित इस अभियान में विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण कर नियोजकों एवं कर्मचारियों को बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

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अभियान का नेतृत्व श्रम विभाग द्वारा किया गया। इसमें पुलिस विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा शिक्षा विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सहयोग किया। टीम ने मीनाक्षी चौक क्षेत्र स्थित विभिन्न संस्थानों का भ्रमण कर बाल श्रम की रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान चलाया।

संस्थानों में लगाए गए जागरूकता स्टीकर

अभियान के दौरान संबंधित संस्थानों में बाल श्रम रोकथाम संबंधी स्टीकर लगाए गए। इसके साथ ही नियोजकों को समझाया गया कि बच्चों और किशोरों को काम पर रखने से संबंधित कानूनों का पालन करना अनिवार्य है।

अधिकारियों ने संस्थान संचालकों एवं कर्मचारियों को बाल एवं किशोर श्रम अधिनियम के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बच्चों को श्रम में लगाने के बजाय उन्हें शिक्षा से जोड़ने में सहयोग करने की अपील की।

14 वर्ष तक के बच्चों से काम कराना प्रतिबंधित

अभियान के दौरान अधिकारियों ने बताया कि 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों का किसी भी प्रकार के कार्य में नियोजन पूर्णतः प्रतिबंधित है। वहीं, 14 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों को खतरनाक श्रेणी के कार्यों में नियोजित करना भी कानूनन अपराध है।

खतरनाक कार्यों की श्रेणी में खदानों, ज्वलनशील पदार्थों, विस्फोटकों तथा अन्य परिसंकटमय प्रक्रियाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं। अधिकारियों ने नियोजकों को इन प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उल्लंघन पर हो सकती है सख्त कार्रवाई

श्रम निरीक्षक ज्योति पी.ए. ने बताया कि किसी भी संस्थान में बालक का नियोजन तथा किशोर श्रमिकों का खतरनाक कार्यों में नियोजन संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है।

उन्होंने नियोजकों से अपील की कि वे बाल एवं किशोर श्रम से संबंधित कानूनी प्रावधानों का पालन करें और किसी भी बच्चे को श्रम में नियोजित न करें। उन्होंने कहा कि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए उन्हें शिक्षा से जोड़ना जरूरी है।

छह माह से दो वर्ष तक की सजा का प्रावधान

अधिकारियों ने बताया कि अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर दोषी नियोजक के विरुद्ध न्यूनतम छह माह से अधिकतम दो वर्ष तक के कारावास अथवा न्यूनतम 20 हजार रुपये से अधिकतम 50 हजार रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों दंड का प्रावधान है।

संयुक्त अभियान के माध्यम से प्रशासन ने संस्थान संचालकों को स्पष्ट संदेश दिया कि बाल श्रम की रोकथाम के लिए कानूनी प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है। साथ ही आमजन से भी अपील की गई कि वे बाल श्रम की जानकारी मिलने पर संबंधित विभाग को सूचना देकर बच्चों को श्रम से मुक्त कराने और उन्हें शिक्षा से जोड़ने में सहयोग करें।

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