ब्रेकिंग
शुक्रवार, 11 सितंबर 2026
नए स्थान तलाशें
Denva Post
सभी खबरें
इंदौर · 13 मिनट पहले

25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ, 2030 तक 75 प्रतिशत गांवों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य

इंदौर में दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन समिट-2026 का शुभारंभ, PPP मॉडल पर विकसित होगी आधुनिक सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 13 मिनट पहले
शेयर
25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का शुभारंभ, 2030 तक 75 प्रतिशत गांवों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य

इंदौर। मध्यप्रदेश में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को आधुनिक, सुरक्षित, सुलभ और तकनीक-सक्षम बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि प्रदेश में 25 सितंबर 2026 से ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का शुभारंभ किया जाएगा। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 के अंत तक प्रदेश के 75 प्रतिशत गांवों तक बस सेवा पहुंचाना है।

नए स्थान तलाशें

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में लगभग 5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है और प्रदेश में 15 हजार से अधिक बसें चलाने की संभावनाएं हैं। ग्रामीण क्षेत्रों, अंतर्जिला और अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने के साथ यात्रियों को सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय ‘यात्री परिवहन विजन समिट-2026’ के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा

‘देश के लिए उदाहरण बनेगी मध्यप्रदेश की बस सेवा’

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में ऐसी सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है, जो पूरे देश के लिए उदाहरण बने। उन्होंने निजी बस ऑपरेटरों, बस निर्माता कंपनियों, इंडस्ट्री पार्टनर्स और अन्य हितधारकों से प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा आधुनिक तकनीक, यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखकर विकसित की जा रही है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों को शहरों से जोड़ने के साथ अंतर्जिला और अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी को भी मजबूत किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में मजबूत सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की आवश्यकता और बढ़ गई है।

2030 तक 75 प्रतिशत गांवों तक बस पहुंचाने का लक्ष्य

राज्य सरकार ने वर्ष 2030 के अंत तक प्रदेश के 75 प्रतिशत गांवों तक बस सेवा पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए रूट प्लानिंग, आधुनिक बस संचालन, डिजिटल निगरानी और परिवहन अधोसंरचना को एकीकृत करने की योजना बनाई गई है।

परिवहन विभाग के अनुसार प्रदेश के 55 जिलों का रूट सर्वे पूरा किया जा चुका है। डेटा आधारित योजना के तहत लगभग 150 सिटी, 450 इंटरसिटी और 436 इंटरस्टेट मार्ग विकसित किए जाने प्रस्तावित हैं।

PPP मॉडल पर विकसित होगा बस परिवहन सिस्टम

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल को प्रमुख आधार बनाया गया है। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) के माध्यम से बस संचालन, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) और परिवहन अधोसंरचना को एकीकृत रूप से विकसित किया जाएगा।

व्यवस्था के तीन प्रमुख स्तंभ होंगे—

PPP मॉडल के माध्यम से बस संचालन

ITMS के जरिए तकनीक आधारित निगरानी और प्रबंधन

आधुनिक बस टर्मिनल, बस स्टैंड, डिपो और बस स्टॉप जैसी अधोसंरचना का विकास

बसों में CCTV, GPS, पैनिक बटन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी सुविधाओं को शामिल किया जाएगा। इलेक्ट्रिक और CNG बसों को भी प्राथमिकता देने की योजना है।

भोपाल और इंदौर में Rapido के साथ पायलट प्रोजेक्ट

सार्वजनिक परिवहन तक आम नागरिकों की पहुंच को आसान बनाने और फर्स्ट एवं लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए MPYPIL और Rapido के बीच एमओयू हुआ।

इस समझौते के तहत बस स्टैंड, बस स्टॉप और मेट्रो स्टेशनों जैसे प्रमुख परिवहन केंद्रों की जानकारी रैपिडो के तकनीकी प्लेटफॉर्म से एकीकृत की जाएगी।

इस सेवा को शुरुआती चरण में भोपाल और इंदौर में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा।

इसके साथ महिलाओं द्वारा संचालित ‘रैपिडो पिंक’ बाइक-टैक्सी सेवा को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

‘एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज-2026’ की शुरुआत

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में परिवहन क्षेत्र की वास्तविक समस्याओं के तकनीकी और नवाचार आधारित समाधान खोजने के लिए ‘एमपी मोबिलिटी इनोवेशन चैलेंज-2026’ का भी शुभारंभ किया।

इस पहल में AI और डेटा आधारित इंटेलिजेंट मोबिलिटी, वित्तीय एवं परिचालन स्थिरता, समावेशी मोबिलिटी, अधोसंरचना एवं लास्ट-माइल कनेक्टिविटी तथा ग्रीन मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों पर फोकस किया जाएगा।

इसमें स्टार्टअप, MSME, शोधकर्ता, शैक्षणिक संस्थान और नवप्रवर्तक भाग ले सकेंगे।

15 हजार से अधिक बसों की संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में करीब 5 लाख किलोमीटर का सड़क नेटवर्क है। प्रदेश में 15 हजार से अधिक बसें चलाने की क्षमता और आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बेहतर बस सेवा से आम नागरिकों के साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी लाभ मिलेगा।

नए स्थान तलाशें

उन्होंने कहा कि लंबे समय से बंद राज्य परिवहन बस सेवा की जगह नई व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप में विकसित करने का अवसर मिला है। नई सुगम परिवहन सेवा यात्रियों, बस ऑपरेटरों, सरकार और नई तकनीक विकसित करने वाले संस्थानों के लिए अवसर पैदा करेगी।

2004-05 में बंद हुई राज्य परिवहन सेवा के बाद नई पहल

परिवहन मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि वर्ष 2004-05 में पुरानी राज्य परिवहन सेवा बंद होने के बाद अब मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में नई सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार निजी बस संचालकों के साथ सहभागी बनकर संगठित और पारदर्शी व्यवस्था तैयार करेगी। आधुनिक बस टर्मिनल, डिजिटल ट्रैकिंग, चालक-परिचालकों की निगरानी और सड़क सुरक्षा को व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रदूषण-मुक्त परिवहन के साथ सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों को भी शहरों से सुरक्षित और बेहतर बस सेवाओं से जोड़ना है।

ई-बस और ग्रीन मोबिलिटी पर जोर

इंदौर के महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि PPP मॉडल से विकसित क्लीन और सेफ बस सिस्टम गांवों को शहरों से जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

इसी दिशा में एका मोबिलिटी के संस्थापक एवं अध्यक्ष श्री सुधीर मेहता ने बताया कि पीथमपुर में इलेक्ट्रिक बस निर्माण संयंत्र स्थापित किया जा रहा है। संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 5 हजार ई-बसों की होगी।

‘सही बस, सही मार्ग और सही समय’ पर फोकस

परिवहन विभाग के सचिव श्री मनीष सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक, किफायती और आधुनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

उन्होंने बताया कि डिजिटल टिकटिंग, रियल टाइम बस ट्रैकिंग, यात्री सुरक्षा और स्वच्छ मोबिलिटी तकनीकों को व्यवस्था में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि लक्ष्य है कि प्रदेशवासियों को ‘सही बस, सही मार्ग और सही समय’ के अनुरूप विश्वसनीय परिवहन सेवा उपलब्ध हो।

समिट में 2 हजार से अधिक प्रतिनिधि ले रहे हिस्सा

11 और 12 सितंबर को आयोजित दो दिवसीय यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में 2 हजार से अधिक प्रतिनिधियों और करीब 100 प्रमुख उद्योग विशेषज्ञों की भागीदारी है।

समिट में ई-बस एवं वाहन निर्माता, सॉफ्टवेयर कंपनियां, ITMS एजेंसियां, वित्तीय संस्थान, ऊर्जा कंपनियां, निजी बस संचालक तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

समिट का उद्देश्य सार्वजनिक परिवहन के आधुनिकीकरण, ग्रामीण एवं अंतरराज्यीय कनेक्टिविटी, डिजिटल टिकटिंग, रियल टाइम यात्री सूचना प्रणाली, ग्रीन मोबिलिटी और PPP आधारित परिवहन मॉडल पर रोडमैप तैयार करना है।

MPYPIL के लोगो प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मान

कार्यक्रम में MPYPIL की ‘लेट्स क्रिएट ए लोगो’ प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।

सासाराम, बिहार के श्री सुधाकर कुमार को प्रथम पुरस्कार के रूप में 5 लाख रुपये, दिल्ली के श्री चयन वोहरा को द्वितीय पुरस्कार के रूप में 2 लाख रुपये और भोपाल की सुश्री गौरांगी शर्मा को तृतीय पुरस्कार के रूप में 1 लाख रुपये एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।

प्रतियोगिता में देशभर से कुल 135 प्रविष्टियां प्राप्त हुई थीं।

गांव से शहर और जिले से दूसरे राज्यों तक मजबूत होगी कनेक्टिविटी

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के जरिए सरकार का फोकस केवल शहरों तक सीमित नहीं रहेगा। योजना के तहत ग्रामीण, अंतर्जिला और अंतरराज्यीय बस कनेक्टिविटी को मजबूत करने की तैयारी है।

नई व्यवस्था में आधुनिक तकनीक, डिजिटल टिकटिंग, GPS आधारित ट्रैकिंग, यात्री सुरक्षा, ग्रीन मोबिलिटी और आधुनिक बस अधोसंरचना को एक साथ जोड़ा जाएगा।

सरकार का दावा है कि इससे प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन अधिक सुरक्षित, सुलभ, किफायती, पारदर्शी और तकनीक-सक्षम बनेगा।

नर्मदापुरम समेत पूरे प्रदेश को मिल सकता है फायदा

नए स्थान तलाशें

मध्यप्रदेश के बड़े सड़क नेटवर्क और ग्रामीण क्षेत्रों की व्यापक भौगोलिक स्थिति को देखते हुए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा का असर नर्मदापुरम जैसे जिलों पर भी पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों को जिला मुख्यालय, प्रमुख शहरों और अंतरजिला मार्गों से जोड़ने में नई व्यवस्था महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

25 सितंबर से सेवा के शुभारंभ के बाद वास्तविक रूट, बसों की संख्या और संबंधित क्षेत्रों में संचालन का स्वरूप चरणबद्ध तरीके से स्पष्ट होगा।

यह खबर शेयर करें
शेयर