MSME संशोधन विधेयक 2026: 6 महीने से ज्यादा भुगतान अटका तो 50% राशि देनी होगी, छोटे कारोबारियों को बड़ी राहत
MSME Development (Amendment) Bill 2026 संसद में पेश। TReDS से भुगतान, आसान डिजिटल रजिस्ट्रेशन, 6 महीने से ज्यादा विवाद पर 50% भुगतान जैसे बड़े प्रावधान शामिल।


नई दिल्ली। देश के करोड़ों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को राहत देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने MSME Development (Amendment) Bill, 2026 संसद में पेश किया है। प्रस्तावित विधेयक का उद्देश्य छोटे कारोबारियों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना, सरकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच आसान बनाना, भुगतान विवादों का तेजी से समाधान करना और कारोबार से जुड़े नियमों को सरल बनाना है।
यदि यह विधेयक पारित होता है, तो विशेष रूप से सरकारी कंपनियों के साथ कारोबार करने वाले MSME उद्यमों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
TReDS प्लेटफॉर्म से होगा इनवॉइस प्रोसेस
विधेयक के अनुसार, सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (Central PSUs) को MSME से प्राप्त होने वाले इनवॉइस अब Trade Receivables Discounting System (TReDS) प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रोसेस करने होंगे। इससे छोटे कारोबारियों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा और आवश्यकता होने पर उन्हें जल्दी वर्किंग कैपिटल भी उपलब्ध हो सकेगी।
साथ ही, राज्य सरकारों को भी अपनी सरकारी कंपनियों के लिए इसी तरह की व्यवस्था लागू करने का विकल्प दिया गया है।
डिजिटल MSME रजिस्ट्रेशन होगा आसान
सरकार पूरे देश के लिए निःशुल्क राष्ट्रीय डिजिटल MSME रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म शुरू करने का प्रस्ताव भी लेकर आई है। इसके माध्यम से MSME पंजीकरण की प्रक्रिया सरल होगी, सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान बनेगी और विभिन्न विभागों की प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम होगा। इससे छोटे उद्यमियों को कागजी औपचारिकताओं से भी काफी राहत मिलने की संभावना है।
भुगतान विवादों का होगा त्वरित समाधान
प्रस्तावित विधेयक में भुगतान संबंधी विवादों के शीघ्र निपटारे पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए राज्यों को अतिरिक्त MSME Facilitation Councils गठित करने होंगे ताकि लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण किया जा सके।
विधेयक में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह भी है कि यदि किसी MSME के पक्ष में निर्णय आता है और खरीदार उस निर्णय को अदालत में चुनौती देता है, लेकिन मामला 6 महीने से अधिक समय तक लंबित रहता है, तो खरीदार को पुरस्कार (Award) की कम से कम 50 प्रतिशत राशि जारी करनी पड़ सकती है। साथ ही अदालत को यह अधिकार भी होगा कि अपील के दौरान जमा राशि में से भुगतान करने का निर्देश दे सके। इससे छोटे कारोबारियों की नकदी (Cash Flow) की समस्या कम होने की उम्मीद है।
नियमों में अन्य बड़े बदलाव
विधेयक में कुछ मामलों में आपराधिक दंड के स्थान पर चेतावनी और निर्धारित आर्थिक दंड (Monetary Penalty) का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, यदि किसी कारोबारी पर जुर्माना लगाया जाता है तो उसे उस निर्णय के खिलाफ अपील करने का अधिकार भी मिलेगा।
MSME Facilitation Council की संरचना में भी बदलाव प्रस्तावित है। प्रत्येक परिषद में 3 से 5 सदस्य होंगे तथा एक विधिक विशेषज्ञ (Legal Expert) को शामिल करना अनिवार्य किया जाएगा, जिससे विवादों के समाधान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और पारदर्शी बन सके।
छोटे कारोबारियों को मिलेगा सीधा लाभ
सरकार का मानना है कि इस संशोधन विधेयक से MSME क्षेत्र को समय पर भुगतान, आसान वित्तीय उपलब्धता और सरल प्रशासनिक प्रक्रियाओं का लाभ मिलेगा। इससे देश के करोड़ों छोटे उद्योगों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) मजबूत होगी, कारोबार करने में आसानी बढ़ेगी और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, यह विधेयक अभी संसद में पेश किया गया है। इसके प्रावधान लागू होने से पहले इसे संसद के दोनों सदनों से पारित होकर राष्ट्रपति की मंजूरी प्राप्त करनी होगी। इसके बाद ही नए नियम प्रभावी होंगे।
