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भोपाल · 20 मिनट पहले

MP Weather Update: मध्यप्रदेश के 20 जिलों में 15 से 17 अक्टूबर तक आंधी-बारिश के आसार, जानें मौसम का हाल

मध्यप्रदेश में 15 से 17 अक्टूबर तक 20 जिलों में आंधी-बारिश के आसार हैं। जानें किन जिलों में बदलेगा मौसम और इस साल मानसून में कितनी बारिश हुई।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 20 मिनट पहले
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MP Weather Update: मध्यप्रदेश के 20 जिलों में 15 से 17 अक्टूबर तक आंधी-बारिश के आसार, जानें मौसम का हाल

भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी मौसम का मिजाज बदल रहा है। दिन में तेज धूप और रात में हल्की ठंडक के बीच अब प्रदेश के कई जिलों में एक बार फिर आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, 15 से 17 अक्टूबर के बीच प्रदेश के करीब 20 जिलों में मौसम बदल सकता है। शुरुआत ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग से होगी, जबकि 17 अक्टूबर को जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग के कुछ जिलों में भी बारिश के आसार हैं।

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मौसम में इस बदलाव की वजह उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती मौसम प्रणाली को माना जा रहा है। इसके प्रभाव से कुछ इलाकों में तेज हवाएं चलने के साथ गरज-चमक और बारिश हो सकती है। हालांकि, भोपाल और इंदौर समेत कुछ प्रमुख शहरों के लिए फिलहाल कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है।

तीन दिन इन जिलों में बदल सकता है मौसम

मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार, 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल तथा सागर संभाग के कुछ जिलों में बारिश की संभावना है। इसके बाद 17 अक्टूबर को बारिश का असर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग तक पहुंच सकता है।

इन जिलों में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है:

ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट।

मौसम में होने वाले इस बदलाव के कारण लोगों को दिन की गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। वहीं, तेज हवाओं और गरज-चमक के दौरान सतर्क रहने की जरूरत होगी।

अक्टूबर में गर्मी, बारिश और ठंड का असर

मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का प्रभाव देखने को मिला है। इस बार भी प्रदेश में मौसम का मिला-जुला रूप नजर आ रहा है।

अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ रहने से दिन के तापमान में बढ़ोतरी हुई और धूप के कारण गर्मी महसूस की गई। दूसरी ओर, रात के तापमान में गिरावट से हल्की ठंडक का अहसास होने लगा। अब सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ जिलों में दोबारा बारिश होने की संभावना है।

प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को विदा हो गया था। इस साल मानसून करीब 100 दिनों तक सक्रिय रहा। मानसून की विदाई के बाद भी पूर्वी मध्यप्रदेश के कई इलाकों में पिछले सप्ताह आंधी और बारिश का असर देखने को मिला था। हालांकि, रविवार, सोमवार और मंगलवार को प्रदेश में कहीं भी आंधी-बारिश दर्ज नहीं की गई।

चार महीने में सामान्य से करीब 1.5 इंच कम बारिश

इस साल जून से सितंबर तक मध्यप्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। इसके मुकाबले प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी लगभग 37.3 इंच है। इस तरह पूरे मानसूनी सीजन में सामान्य से करीब 4 प्रतिशत कम बारिश हुई।

बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के बीच अंतर भी सामने आया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य से 12 प्रतिशत कम पानी बरसा।

पश्चिमी क्षेत्र के कई जिलों में बारिश की कमी अधिक रहने से खेती पर असर पड़ने की आशंका है। आंकड़ों के अनुसार, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश हुई। इन जिलों में बारिश की कमी 9 से 51 प्रतिशत तक दर्ज की गई।

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वहीं, भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडोरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में सामान्य बारिश का कोटा पूरा हो गया।

जून में कम बारिश का असर पूरे सीजन पर पड़ा

मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, जून में प्रदेश में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश होने से स्थिति में सुधार आया, लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने के कारण कई दिनों तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई।

मानसून सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत मौसम सिस्टम ने बारिश के आंकड़ों को सहारा जरूर दिया, लेकिन जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में हुई बारिश के बावजूद पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से नीचे रहा।

यही वजह है कि मध्यप्रदेश से मानसून की विदाई के समय कुल बारिश में करीब 4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। अब मानसून की विदाई के बाद सक्रिय मौसम प्रणालियों के चलते अगले तीन दिनों में प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर बारिश देखने को मिल सकती है।

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