मध्यप्रदेश में पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध, मूंग की फसल सुखाने में होता था इस्तेमाल
मध्यप्रदेश सरकार ने मूंग की फसल सुखाने में इस्तेमाल होने वाले जहरीले पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगाया। कंपनियों को स्टॉक वापस लेने और नष्ट करने के निर्देश।


भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने मूंग की फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले बेहद जहरीले रसायन पैराक्वेट डाइक्लोराइड पर प्रतिबंध लगा दिया है। यह रसायन इंसानों और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। राज्य सरकार ने संबंधित कीटनाशक निर्माता कंपनियों को इसका उत्पादन और बिक्री रोकने, बचे हुए स्टॉक को वापस लेने तथा नियमानुसार नष्ट करने के निर्देश दिए हैं।
यह कार्रवाई केंद्र सरकार की ओर से इस कीटनाशक के पंजीकरण को रद्द करने और इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के बाद की गई है। राज्य सरकार ने जिन कंपनियों के पास इसके पंजीकरण प्रमाणपत्र हैं, उन्हें केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति (CIBRC) को प्रमाणपत्र लौटाने के निर्देश भी दिए हैं।
मूंग की फसल जल्दी सुखाने के लिए होता था इस्तेमाल
पैराक्वेट डाइक्लोराइड एक गैर-चयनात्मक खरपतवारनाशी रसायन है, जो पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आने पर उन्हें तेजी से नुकसान पहुंचाता है और सुखा देता है। इसे ग्रामोक्सोन जैसे व्यापारिक नामों से भी जाना जाता है।
मूंग की कटाई से पहले कुछ क्षेत्रों में किसान फसल को जल्दी सुखाने के लिए इसका इस्तेमाल करते रहे हैं। इसके छिड़काव से पौधों और पत्तियों के सूखने की प्रक्रिया तेज हो सकती है, जिससे कटाई और दाने अलग करने यानी थ्रेसिंग में आसानी होती है। इससे समय और मजदूरी की बचत होने की उम्मीद रहती है।
हालांकि, मूंग की फसल को सुखाने के लिए इसका इस्तेमाल अनुमत नहीं था। इसके बावजूद जल्दी कटाई के उद्देश्य से इसके अवैध इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं। अब प्रतिबंध के बाद इस रसायन की बिक्री और उपलब्धता पर रोक लगाने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है।
इंसानों और पशुओं के लिए बेहद जहरीला है रसायन
पैराक्वेट डाइक्लोराइड अत्यधिक विषैला रसायन है। इसके निगलने या शरीर में पहुंचने से गंभीर विषाक्तता हो सकती है। इसके संपर्क में आने से त्वचा और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है, जबकि इसे निगलने पर मुंह, गले, पाचन तंत्र, फेफड़ों, लिवर और किडनी को गंभीर क्षति पहुंचने का खतरा रहता है। गंभीर मामलों में यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।
इस रसायन के संपर्क में आने की आशंका होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। इसे गलती से निगलने पर उल्टी कराने या घरेलू उपचार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
कंपनियों को स्टॉक वापस लेकर नष्ट करने के निर्देश
राज्य सरकार ने संबंधित कंपनियों को पैराक्वेट डाइक्लोराइड का उत्पादन और बिक्री रोकने के साथ उपलब्ध स्टॉक वापस लेने तथा निर्धारित नियमों के अनुसार उसका निपटान करने के निर्देश दिए हैं। पंजीकरण प्रमाणपत्र रखने वाली कंपनियों को उन्हें केंद्रीय कीटनाशी बोर्ड एवं पंजीकरण समिति को लौटाना होगा।
सरकार की इस कार्रवाई का उद्देश्य प्रतिबंधित रसायन की उपलब्धता और उसके अनधिकृत इस्तेमाल पर रोक लगाना है। किसानों को भी सलाह दी जाती है कि वे फसल सुखाने के लिए किसी भी रसायन का इस्तेमाल करने से पहले उसकी वैधानिक अनुमति और कृषि विभाग के दिशा-निर्देशों की जानकारी जरूर लें।

