MP EOW का बड़ा एक्शन प्लान: हर जांच अधिकारी को हर महीने निपटाने होंगे 2 मामले
मध्यप्रदेश EOW ने 3900 लंबित मामलों के निराकरण के लिए कार्ययोजना बनाई। हर जांच अधिकारी को हर महीने दो मामले निपटाने होंगे। डीजी उपेंद्र जैन करेंगे साप्ताहिक समीक्षा।


भोपाल। मध्यप्रदेश में आर्थिक अपराधों से जुड़े लंबित मामलों के निराकरण में तेजी लाने के लिए आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने सख्त और समयबद्ध कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत प्रत्येक जांच अधिकारी को हर महीने दो मामलों का निराकरण करना अनिवार्य किया गया है। अभियान की निगरानी ईओडब्ल्यू के डीजी उपेंद्र जैन कर रहे हैं। विभाग का उद्देश्य लंबे समय से लंबित शिकायतों और आपराधिक प्रकरणों की संख्या कम करना तथा जांच प्रक्रिया को गति देना है।
हर महीने दो मामलों का निराकरण अनिवार्य
ईओडब्ल्यू मुख्यालय के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक जांच अधिकारी को हर महीने दो मामलों का निराकरण करना होगा। इनमें एक प्रारंभिक शिकायत और दूसरा दर्ज आपराधिक प्रकरण शामिल होना अनिवार्य है। इस व्यवस्था के जरिए जांच अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और मामलों के निपटारे में होने वाली देरी को कम करने पर जोर दिया जा रहा है।
विभाग की कार्ययोजना में मामलों की नियमित निगरानी और निर्धारित समयसीमा के भीतर कार्रवाई पूरी करने को प्राथमिकता दी गई है। इससे जांच की प्रगति पर मुख्यालय की सीधी नजर बनी रहेगी।
प्रदेशभर में करीब 3,900 मामले लंबित
वर्तमान में मध्यप्रदेश ईओडब्ल्यू के पास करीब 3,900 मामले लंबित बताए जा रहे हैं। विभाग में लगभग 100 जांच अधिकारी तैनात हैं। निर्धारित लक्ष्य के अनुसार, यदि प्रत्येक अधिकारी हर महीने दो मामलों का निराकरण करता है, तो विभाग स्तर पर प्रतिमाह करीब 200 मामलों का निपटारा संभव हो सकता है।
हालांकि, वास्तविक प्रगति मामलों की प्रकृति, जांच की जटिलता और उपलब्ध साक्ष्यों पर निर्भर करेगी। विभाग की कोशिश है कि लंबित मामलों के बोझ को धीरे-धीरे कम करते हुए जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जाए।
डीजी उपेंद्र जैन करेंगे साप्ताहिक समीक्षा
लंबित मामलों के निराकरण अभियान की निगरानी मुख्यालय स्तर से की जा रही है। प्रत्येक जांच अधिकारी को अपने मामलों की स्थिति की रिपोर्ट हर सप्ताह मुख्यालय को सौंपनी होगी। डीजी ईओडब्ल्यू उपेंद्र जैन स्वयं मामलों की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा कर रहे हैं।
जांच के दौरान आने वाली तकनीकी और कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। इसका उद्देश्य केवल मामलों की संख्या घटाना ही नहीं, बल्कि जांच को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आगे बढ़ाना भी है।
पिछले महीने के परिणामों के बाद अभियान जारी
अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने लागू किए गए निर्देशों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। इसी के मद्देनजर चालू महीने में भी अभियान को सख्ती से जारी रखा गया है। विभाग का जोर लंबित शिकायतों और आपराधिक प्रकरणों के समयबद्ध निराकरण पर है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्धारित मासिक लक्ष्य और साप्ताहिक समीक्षा की व्यवस्था से करीब 3,900 लंबित मामलों के निपटारे में कितनी तेजी आती है। अभियान की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मामलों का निराकरण गुणवत्ता, साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए किया जाए।
