वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का गांव-गांव अभियान, 25 अक्टूबर से चौपाल; दिल्ली कूच की भी तैयारी
मध्यप्रदेश में कांग्रेस 25 अक्टूबर से ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान चलाएगी। गांवों में चौपाल, बूथ स्तर पर मतदाता सूची की पड़ताल और नवंबर में दिल्ली कूच की तैयारी।


भोपाल। मध्यप्रदेश में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर कांग्रेस ने अपना अभियान गांवों और बूथ स्तर तक ले जाने की तैयारी की है। पार्टी ‘वोट बचाओ-देश बचाओ’ अभियान के तहत गांव-गांव चौपाल लगाएगी, लोगों से संवाद करेगी और मतदाता सूची में नाम हटने या प्रविष्टियों में गड़बड़ी की आशंका से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाएगी। इसके साथ ही नवंबर में दिल्ली में प्रस्तावित रैलियों और कार्यक्रमों के जरिए इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति बनाई गई है।
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, प्रदेश, जिला और ब्लॉक स्तर पर अभियान चलाया जाएगा। पार्टी का जोर बूथ लेवल एजेंटों के माध्यम से मतदाता सूची की पड़ताल करने और सामने आने वाले मामलों का रिकॉर्ड तैयार करने पर रहेगा।
25 अक्टूबर से गांव-गांव लगेंगी चौपाल
कांग्रेस का अभियान 25 अक्टूबर से शुरू होकर 25 नवंबर तक चलाने की योजना है। अभियान के पहले दिन प्रदेश और जिला मुख्यालयों पर वरिष्ठ नेताओं तथा जिला कांग्रेस अध्यक्षों की प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रस्तावित हैं। इसके बाद जिला स्तर पर समन्वय बैठकें और ब्लॉक स्तर पर बूथ लेवल एजेंटों के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी।
इन बैठकों में मतदाता सूची की जांच पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। बूथ लेवल एजेंट उन मतदाताओं से जुड़ी जानकारी जुटाएंगे, जिनके नाम सूची से हटाए जाने या उनकी प्रविष्टियों में गड़बड़ी होने की आशंका है। संबंधित मामलों की जांच के बाद सत्यापित जानकारी और मतदाता डोजियर ब्लॉक कांग्रेस कार्यालयों में जमा किए जाएंगे।
चारपाई पर चौपाल, लोगों को बांटे जाएंगे पर्चे
अभियान के दौरान कांग्रेस गांवों में पारंपरिक अंदाज में चारपाई पर चौपाल लगाएगी। इन चौपालों में स्थानीय नागरिकों, बुजुर्गों, पंचायत प्रतिनिधियों और मतदाता सूची में गड़बड़ी से प्रभावित होने की आशंका जताने वाले लोगों से संवाद किया जाएगा।
पार्टी की योजना मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को आम लोगों के बीच ले जाने और अपने आरोपों के समर्थन में जानकारी जुटाने की है। इसके लिए पर्चे भी बांटे जाएंगे। कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों को मतदाता सूची में अपना नाम और संबंधित विवरण जांचने के लिए प्रेरित करेंगे।
एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली
अभियान के राष्ट्रीय चरण के तहत एक नवंबर को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़ी रैली प्रस्तावित है। इसमें सांसदों, विधायकों, प्रदेश और जिला पदाधिकारियों, विभिन्न संगठनों तथा जमीनी कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की तैयारी है। विपक्षी गठबंधन इंडिया के सहयोगी दलों के साथ समन्वय की भी योजना है।
रैली के माध्यम से कांग्रेस मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर उठाना चाहती है। पार्टी की रणनीति प्रदेश में चल रहे जनसंपर्क अभियान को दिल्ली के कार्यक्रम से जोड़ने की है, ताकि इस विषय पर राजनीतिक चर्चा तेज हो सके।
25 नवंबर को ग्वालियर में जुटेंगे कार्यकर्ता
अभियान के अगले चरण में संविधान दिवस के अवसर पर 25 और 26 नवंबर को ‘दिल्ली चलो’ कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके तहत विभिन्न राज्यों से कांग्रेस कार्यकर्ता छह प्रमुख मार्गों से दिल्ली पहुंचेंगे। इनमें ग्वालियर मार्ग भी शामिल बताया गया है।
कार्यक्रम के अनुसार, मध्यप्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ता 25 नवंबर को ग्वालियर में जुटेंगे। इसके बाद 26 नवंबर को वाहनों से दिल्ली रवाना होने की तैयारी है। प्रदेश, जिला और ब्लॉक कांग्रेस इकाइयों को वाहनों, यात्रियों और रूट कैप्टन का विवरण केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बूथ स्तर पर मामलों का रिकॉर्ड जुटाने पर जोर
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने अभियान की निगरानी और समीक्षा के लिए कनेक्ट सेंटर तथा केंद्रीय नियंत्रण कक्ष को जिम्मेदारी सौंपी है। इनके माध्यम से विभिन्न चरणों के कार्यक्रमों की जानकारी जुटाने और उनकी प्रगति की समीक्षा करने की व्यवस्था की गई है।
कांग्रेस की रणनीति मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के आरोपों को बूथ स्तर पर दर्ज मामलों और दस्तावेजों के साथ सामने रखने की है। पार्टी चौपालों, बैठकों और जनसंपर्क कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को इस मुद्दे से जोड़ना चाहती है।
हालांकि, अभियान के दौरान सामने आने वाले प्रत्येक मामले की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। मतदाता सूची में नाम हटने या विवरण में त्रुटि होने का हर मामला अपने आप में जानबूझकर की गई गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है। ऐसे में अभियान की दिशा और उसके प्रभाव का आकलन सामने आने वाले सत्यापित तथ्यों के आधार पर ही किया जा सकेगा।
