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माखननगर · 11 मिनट पहले

माखननगर अधिवक्ता संघ चुनाव पर विवाद, राज्य अधिवक्ता परिषद ने मांगा जवाब

माखननगर अधिवक्ता संघ चुनाव 2026-28 में कथित अनियमितताओं को लेकर रामलाल साहू की अपील पर मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद ने संबंधित पक्षों से 15 दिन में जवाब मांगा।

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दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 11 मिनट पहले
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माखननगर अधिवक्ता संघ चुनाव पर विवाद, राज्य अधिवक्ता परिषद ने मांगा जवाब

माखननगर। तहसील अधिवक्ता संघ माखननगर के द्विवार्षिक निर्वाचन 2026-28 को लेकर विवाद गहरा गया है। निर्वाचन प्रक्रिया में अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए अधिवक्ता रामलाल साहू द्वारा मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद, जबलपुर में अपील प्रस्तुत की गई है। मामले में राज्य अधिवक्ता परिषद ने 30 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर संबंधित पक्षों से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा है।

परिषद के पत्र के अनुसार, रामलाल साहू द्वारा 22 अगस्त 2026 को निर्वाचन के विरुद्ध अपील दायर की गई थी। इसके साथ प्रस्तुत अपील और संलग्न दस्तावेजों की प्रतियां संबंधित पक्षों को भेजते हुए अपना जवाब परिषद कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, परिषद के पत्र में निर्वाचन निरस्त करने अथवा अपील पर अंतिम निर्णय दिए जाने का उल्लेख नहीं है।

मतदाता सूची से लेकर निर्वाचन प्रक्रिया तक उठाए सवाल

अपीलकर्ता ने अपने अभ्यावेदन में आरोप लगाया है कि अधिवक्ता संघ माखननगर का निर्वाचन बार काउंसिल द्वारा निर्धारित बायलॉज और प्रक्रियाओं के अनुरूप नहीं कराया गया। उनका दावा है कि 30 जुलाई 2026 को आयोजित बैठक में कोरम पूरा नहीं होने के बावजूद निर्वाचन अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही, माखननगर संघ के बाहर के अधिवक्ताओं को मुख्य निर्वाचन अधिकारी और सहायक निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किए जाने पर भी आपत्ति जताई गई है।

अभ्यावेदन में यह भी कहा गया है कि 7 अगस्त 2026 को निर्वाचन कार्यक्रम घोषित कर दिया गया, लेकिन नई मतदाता सूची का प्रकाशन नहीं कराया गया और न ही सूची पर दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई। अपीलकर्ता के अनुसार, मतदाता सूची का प्रकाशन निर्वाचन की महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जिससे पात्र मतदाताओं को अपने नाम और मतदान के अधिकार से संबंधित आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए।

रामलाल साहू पूर्व सचिव, अधिवक्ता संघ माखननगर
रामलाल साहू पूर्व सचिव, अधिवक्ता संघ माखननगर

नामांकन फार्म वितरण और परिणाम घोषित करने पर भी आपत्ति

रामलाल साहू ने आरोप लगाया है कि 10 अगस्त को नामांकन फार्म वितरण के दौरान निर्वाचन अधिकारी संघ कार्यालय में उपस्थित नहीं थे, जिसके कारण कई अधिवक्ताओं को फार्म प्राप्त करने में परेशानी हुई। उन्होंने फार्म वितरण और अमानत राशि जमा करने के दौरान रसीद नहीं दिए जाने का आरोप भी लगाया है।

अपील में निर्वाचन कार्यक्रम और परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतगणना और परिणाम घोषित होने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही 13 अगस्त को कुछ प्रत्याशियों को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया, जबकि सहसचिव पद का निर्वाचन 20 अगस्त को होना शेष बताया गया था। मतदाता सूची जारी किए जाने की सूचना भी बाद में दिए जाने का आरोप लगाया गया है।

गैर-प्रैक्टिसनर अधिवक्ताओं के नामों को लेकर विवाद

अपीलकर्ता ने मतदाता सूची में गैर-प्रैक्टिसनर तथा अन्य व्यवसायों में संलग्न अधिवक्ताओं के नामों को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित निर्देशों और बायलॉज के प्रावधानों के अनुरूप मतदाता सूची की जांच और प्रकाशन नहीं कराया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

शिकायत में निर्वाचन अधिकारियों पर आपत्तियां स्वीकार नहीं करने तथा निर्वाचन से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं करने का आरोप भी लगाया गया है। अपीलकर्ता ने पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने और वर्तमान निर्वाचन को निरस्त कर स्वतंत्र समिति के माध्यम से नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की है।

“राज्य अधिवक्ता परिषद ने मांगा जवाब”
“राज्य अधिवक्ता परिषद ने मांगा जवाब”

अब संबंधित पक्षों के जवाब पर नजर

मध्यप्रदेश राज्य अधिवक्ता परिषद द्वारा जारी पत्र में निर्वाचन अधिकारियों, सहायक निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचित पदाधिकारियों सहित संबंधित पक्षों को अपील की प्रति भेजकर 15 दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। परिषद के इस कदम के बाद मामले में संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने की प्रतीक्षा है।

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फिलहाल, निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर लगाए गए आरोप अपीलकर्ता के अभ्यावेदन का हिस्सा हैं। राज्य अधिवक्ता परिषद की ओर से मामले में अंतिम निर्णय या निर्वाचन निरस्त करने संबंधी आदेश की जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आगामी कार्रवाई संबंधित पक्षों के जवाब और परिषद के निर्णय पर निर्भर करेगी।

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