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माखन नगर · 15 दिन पहले

यह कैसा विकास? माखन नगर के इकलौते खेल मैदान को ही बना दिया 'डंपिंग यार्ड'!

सड़क, संदीपनी स्कूल के निर्माण की सामग्री बनी मैदान की मुसीबत | प्रशासन ने भी जब्त रेत का स्टॉक यहीं कर दिया | बच्चों के खेलने की जगह लगातार हो रही कम

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 15 दिन पहले
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यह कैसा विकास? माखन नगर के इकलौते खेल मैदान को ही बना दिया 'डंपिंग यार्ड'!

माखन नगर। विकास का ढोल पीटना बहुत आसान है, लेकिन जब उसी विकास की आड़ में बच्चों के सपनों और भविष्य को रौंदा जाने लगे, तो जवाबदेही तय होना लाज़मी हो जाता है। माखन नगर में इन दिनों तथाकथित विकास की बयार बह रही है—कहीं चमचमाती सड़कों का निर्माण हो रहा है, तो कहीं संदीपनी स्कूल का नया ढांचा खड़ा किया जा रहा है, वहीं जनपद पंचायत में भी निर्माण कार्य जोरों पर है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा और दर्दनाक नुकसान नगर के इकलौते हाई स्कूल ग्राउंड को भुगतना पड़ रहा है।

जिस मैदान में कल तक बच्चों के ठहाके गुंजायमान होते थे, जहां खेल प्रतिभाएं अपने हुनर को निखारती थीं, उसे आज ठेकेदारों और प्रशासनिक लापरवाही ने मुफ़्त का डंपिंग ग्राउंड बनाकर रख दिया है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर के बच्चे आखिर खेलें तो खेलें कहां?

निर्माण कार्यों के लिए मैदान बना सबसे आसान ठिकाना

माखन नगर में चल रहे विभिन्न निर्माण कार्यों के लिए सामग्री रखने की जगह के रूप में हाई स्कूल ग्राउंड का इस्तेमाल किए जाने से मैदान का बड़ा हिस्सा प्रभावित हो रहा है। संदीपनी स्कूल निर्माण से संबंधित मिट्टी और रॉ मटेरियल के ढेर मैदान में दिखाई दे रहे हैं।

दूसरी ओर सड़क निर्माण कार्य से निकलने वाले मटेरियल को भी मैदान में जमा किए जाने की बात सामने आई है। सवाल उठता है कि निर्माण एजेंसियों और ठेकेदारों को अपनी सामग्री रखने के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी किसकी है?

यदि निर्माण कार्यों की योजना बनाते समय सामग्री के भंडारण की व्यवस्था नहीं की गई तो यह योजना और निगरानी दोनों पर सवाल खड़ा करता है।

मैदान में बच्चे कम, मटेरियल ज्यादा

हाई स्कूल ग्राउंड में रोजाना बच्चे और युवा खेल गतिविधियों के लिए पहुंचते हैं। लेकिन मैदान की स्थिति ऐसी होती जा रही है कि खेलने के लिए उपलब्ध स्थान लगातार कम हो रहा है। जिस मैदान में कभी दौड़, लंबी कूद और अन्य खेल गतिविधियां होती थीं, वहां अब निर्माण सामग्री के ढेर दिखाई दे रहे हैं।

मैदान का क्षेत्रफल भले ही कागज पर कम नहीं हुआ हो, लेकिन खेलने योग्य जमीन जरूर लगातार सिकुड़ रही है। बच्चों के लिए मैदान का मतलब खुली और सुरक्षित जगह है। लेकिन यहां बच्चों को खेल के बीच मिट्टी और रेत के ढेर से रास्ता निकालना पड़ रहा है।

लंबी कूद की जगह पर प्रशासन की जब्त रेत

मैदान की स्थिति का सबसे बड़ा उदाहरण बीआरसी कार्यालय के बाजू का हिस्सा है। यहां पहले बच्चे लंबी कूद का अभ्यास किया करते थे। खेल गतिविधियों के लिए उपयोग होने वाली इस जगह पर अब प्रशासन द्वारा जब्त रेत का स्टॉक किए जाने की बात सामने आई है।

यानी जिस स्थान पर बच्चों को अपनी खेल प्रतिभा दिखानी थी, वहां अब रेत का ढेर खड़ा है।

यह सवाल इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मैदान का इस्तेमाल किसी निजी निर्माण एजेंसी ने ही नहीं, बल्कि प्रशासन द्वारा भी किया जा रहा है। जब प्रशासन स्वयं खेल मैदान को सामग्री रखने की जगह के रूप में इस्तेमाल करेगा तो फिर ठेकेदारों से मैदान बचाने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

सड़क निर्माण का मटेरियल भी मैदान में

सड़क निर्माण के दौरान निकलने वाला मटेरियल कहां रखा जाए, इसकी व्यवस्था संबंधित निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी होनी चाहिए। लेकिन माखन नगर में सड़क निर्माण से संबंधित सामग्री के लिए भी हाई स्कूल ग्राउंड का इस्तेमाल किए जाने की स्थिति सामने आ रही है।

क्या नगर में ऐसी कोई दूसरी जगह नहीं थी जहां यह मटेरियल रखा जा सके?

क्या मैदान का इस्तेमाल करने से पहले अनुमति ली गई?

क्या संबंधित अधिकारियों ने इसकी अनुमति दी?

अगर अनुमति नहीं दी गई तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

विकास जरूरी, लेकिन बच्चों की कीमत पर नहीं

माखन नगर में सड़क निर्माण हो या स्कूल भवन का निर्माण, विकास कार्यों का होना जरूरी है। लेकिन विकास के नाम पर सार्वजनिक खेल मैदान की उपयोगिता खत्म करना किसी भी स्थिति में उचित नहीं कहा जा सकता।

सरकार और प्रशासन बच्चों को खेलों के प्रति प्रोत्साहित करने की बात करते हैं। खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए योजनाएं संचालित की जाती हैं। लेकिन दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर बच्चों के पास मौजूद मैदान ही सुरक्षित नहीं है।

एक तरफ खेलों को बढ़ावा देने की बात, दूसरी तरफ खेल मैदान में रेत-मिट्टी के ढेर—यह विरोधाभास आखिर क्यों?

अधिकारी क्या मैदान की स्थिति से अनजान हैं?

मैदान में निर्माण सामग्री एक-दो घंटे के लिए नहीं रखी जाती। इसके लिए वाहन आते हैं, सामग्री डाली जाती है और फिर वह कई दिनों तक वहीं पड़ी रहती है। ऐसे में यह मानना मुश्किल है कि संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी नहीं होगी।

यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं?

यदि जानकारी नहीं है तो फिर निरीक्षण व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

नगर प्रशासन और संबंधित विभागों को मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए। मैदान में रखी प्रत्येक सामग्री की जानकारी जुटाई जानी चाहिए और यह तय होना चाहिए कि उसे कब तक हटाया जाएगा।

आज रेत-मिट्टी, कल मैदान ही न बच पाए

सबसे बड़ा खतरा यह है कि यदि समय रहते इस व्यवस्था को नहीं रोका गया तो धीरे-धीरे पूरा मैदान निर्माण एजेंसियों के लिए स्थायी स्टोरेज एरिया बन सकता है।

आज एक हिस्से में रेत है, दूसरे में मिट्टी और तीसरे हिस्से में निर्माण से निकला मटेरियल। यदि यही सिलसिला जारी रहा तो कुछ समय बाद बच्चों के लिए मैदान में खेलने की पर्याप्त जगह ही नहीं बचेगी। मैदान का उपयोग बच्चों के लिए होना चाहिए, न कि ठेकेदारों और विभागों की सुविधा के लिए।

अब जवाबदेही तय करने का समय

माखन नगर के इस मामले में केवल ठेकेदारों से सवाल करना पर्याप्त नहीं होगा। संबंधित विभागों और प्रशासन की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।

किसकी अनुमति से मैदान में सामग्री रखी गई?

किस अधिकारी ने इसका निरीक्षण किया?

क्या निर्माण एजेंसियों को वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया गया था?

मैदान को नुकसान होने पर उसकी भरपाई कौन करेगा?

और सबसे महत्वपूर्ण—बच्चों के खेल मैदान को कब तक वापस खाली कराया जाएगा?

इन सवालों के जवाब अब जरूरी हैं।

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