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मैहर · 16 मिनट पहले

मैहर में शारदीय नवरात्रि मेले का शुभारंभ, लाल परिधान में सजीं मां शारदा; सुबह 3 बजे खुले मंदिर के पट

मैहर के मां शारदा मंदिर में शारदीय नवरात्रि मेले की शुरुआत हुई। सुबह 3 बजे मंदिर के पट खुले और लाल परिधान में सजीं मां शारदा के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचे।

अशोक शर्मा
अशोक शर्मा
Sub Editor · 16 मिनट पहले
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मैहर में शारदीय नवरात्रि मेले का शुभारंभ, लाल परिधान में सजीं मां शारदा; सुबह 3 बजे खुले मंदिर के पट

मैहर। धार्मिक नगरी मैहर में रविवार को मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना के साथ शारदीय नवरात्रि मेले का शुभारंभ हुआ। त्रिकूट पर्वत पर विराजमान मां शारदा देवी के दरबार में नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धालुओं की आस्था और उत्साह देखने को मिला। मंदिर के पट सुबह 3 बजे खोले गए, जिसके बाद दर्शन-पूजन का सिलसिला शुरू हो गया। पहले दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के माता के दरबार में पहुंचने की उम्मीद जताई गई।

नवरात्रि मेले की शुरुआत के साथ ही मैहर में भक्तिमय माहौल छा गया। मंदिर परिसर से लेकर त्रिकूट पर्वत तक मां शारदा के जयकारे गूंजते रहे। देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मैहर पहुंच रहे हैं। भक्त मां के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना कर रहे हैं।

लाल परिधान में मां शारदा का भव्य श्रृंगार, सुबह की आरती में उमड़ी श्रद्धा

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां शारदा का लाल रंग के परिधान में भव्य श्रृंगार किया गया। माता के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह नजर आया। सुबह की आरती के दौरान भक्तों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और माता का आशीर्वाद प्राप्त किया।

लाल परिधान में सजीं मां शारदा के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने अपने परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की प्रार्थना की। नवरात्रि के दौरान मां शारदा के दरबार में विशेष धार्मिक आयोजन और दर्शन-पूजन का सिलसिला जारी रहता है। यही वजह है कि इन नौ दिनों में मैहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।

मां शैलपुत्री की आराधना से शुरू हुई नवरात्रि की साधना

हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शारदीय नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार, माता अपने पूर्व जन्म में राजा दक्ष की पुत्री सती थीं।

मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ यानी बैल है। उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल सुशोभित रहता है। मान्यता है कि विधि-विधान से मां शैलपुत्री की आराधना करने से साधक को शक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। इसी पूजा के साथ नवरात्रि की नौ दिवसीय आध्यात्मिक साधना का आरंभ होता है।

नौ दिनों तक मैहर में रहेगा आस्था और भक्ति का माहौल

मां शारदा मंदिर में नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस दौरान मध्यप्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मैहर पहुंचते हैं। नवरात्रि मेले के शुभारंभ के साथ ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में धार्मिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

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श्रद्धालु माता के दर्शन कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति और परिवार की मंगलकामना के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। अगले नौ दिनों तक मैहर में भक्ति, आस्था और धार्मिक उत्साह का माहौल बने रहने की उम्मीद है। मां शारदा के जयकारों से गूंजती धार्मिक नगरी में नवरात्रि का पर्व श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था और विश्वास का केंद्र बना हुआ है।

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