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इंदौर · 8 मिनट पहले

इंदौर का मास्टर प्लान पांच साल से अटका, शहर बढ़ता गया लेकिन प्लानिंग पीछे रह गई

इंदौर का नया मास्टर प्लान पांच साल से अटका है। 2035 के हिसाब से बनने वाले प्लान का प्रारूप अभी तक तैयार नहीं हुआ। 79 गांवों को शामिल करने की योजना के बीच शहर का विस्तार जारी है।

अशोक शर्मा
अशोक शर्मा
Sub Editor · 8 मिनट पहले
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इंदौर का मास्टर प्लान पांच साल से अटका, शहर बढ़ता गया लेकिन प्लानिंग पीछे रह गई

इंदौर। प्रदेश की औद्योगिक राजधानी और तेजी से विस्तार कर रहे इंदौर शहर के विकास की सबसे अहम रूपरेखा ही अब सवालों के घेरे में है। भोपाल का नया मास्टर प्लान जहां प्रारूप के स्तर तक पहुंच चुका है, वहीं इंदौर के नए मास्टर प्लान का प्रारूप अभी तक तैयार नहीं हो पाया है। पिछले करीब पांच वर्षों से नए मास्टर प्लान की कवायद चल रही है, लेकिन अब तक इसकी तस्वीर साफ नहीं हो सकी है।

स्थिति यह है कि शहर लगातार अपनी सीमाओं से बाहर फैल रहा है। शहरी सीमा से लगे क्षेत्रों में नई कॉलोनियां और निर्माण तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन भविष्य के विकास को दिशा देने वाला नया मास्टर प्लान अभी कागजों में ही उलझा हुआ है। जानकारों के मुताबिक इंदौर का मास्टर प्लान मेट्रोपॉलिटन सिटी की कवायद में अटक गया है। नए प्लान में आसपास के कई नए क्षेत्रों को शामिल किया जाना है और इसी प्रक्रिया के कारण इसकी तैयारी में लगातार देरी हो रही है।

2035 के हिसाब से तैयार होना है प्लान

इंदौर के लिए नया मास्टर प्लान वर्ष 2035 को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना है। इसके तहत शहर के मौजूदा विकास के साथ-साथ भविष्य में बढ़ने वाली आबादी, आवासीय क्षेत्र, औद्योगिक गतिविधियां, परिवहन व्यवस्था, सड़क नेटवर्क, हरित क्षेत्र और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए जमीन का नियोजन किया जाना है।

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मास्टर प्लान तैयार होने में ही वर्षों लग रहे हैं, तब तेजी से बढ़ते शहर को नियंत्रित और नियोजित विकास की दिशा कौन देगा?

मेट्रोपॉलिटन सिटी के दायरे को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ने का इंतजार भी मास्टर प्लान की तैयारी पर भारी पड़ा। नए क्षेत्रों को शामिल करने के कारण योजना का दायरा बढ़ गया और प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया लंबी होती चली गई।

2008 का मास्टर प्लान अब हो चुका है पुराना

इंदौर का मौजूदा मास्टर प्लान वर्ष 2008 में लागू हुआ था। इसे वर्ष 2023 को ध्यान में रखकर तैयार किया गया था। यानी जिस विकास की रूपरेखा के आधार पर शहर को आगे बढ़ना था, उसकी निर्धारित अवधि समाप्त हो चुकी है।

नियमानुसार नए मास्टर प्लान को समय रहते लागू हो जाना चाहिए था, लेकिन नए प्लान की प्रक्रिया में देरी के कारण शहर पुराने प्लान और नई जरूरतों के बीच फंस गया है।

पिछले कुछ वर्षों में इंदौर की आबादी, यातायात, आवासीय विस्तार और आसपास के क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियां तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में 2008 की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया प्लान वर्तमान जरूरतों के अनुरूप कितना प्रभावी रह गया है, यह भी बड़ा सवाल है।

79 गांवों को शहर की नई योजना में किया गया शामिल

नए मास्टर प्लान के तहत इंदौर के आसपास के 79 गांवों को शामिल करने की अधिसूचना जारी की गई है। इन क्षेत्रों के विकास को नए नियोजन के तहत नियंत्रित किया जाना है।

हालांकि मास्टर प्लान के अंतिम रूप में आने में हो रही देरी का असर इन क्षेत्रों पर भी दिखाई दे रहा है। कई जगह निर्माण और विकास की गतिविधियों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। दूसरी ओर, शहर की सीमा से लगे क्षेत्रों में बसाहट लगातार बढ़ती जा रही है।

यही वजह है कि विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि इंदौर जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहर में भूमि उपयोग, सड़क, आवास, औद्योगिक क्षेत्र और सार्वजनिक सुविधाओं की योजना पहले से स्पष्ट होना जरूरी है।

पुराने मास्टर प्लान की कई योजनाएं भी अधूरी

सवाल केवल नए मास्टर प्लान में देरी का नहीं है। पुराने मास्टर प्लान में प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण काम भी अब तक पूरी तरह जमीन पर नहीं उतर पाए हैं।

मास्टर प्लान में प्रस्तावित कई सड़कों को अब तक अपेक्षित चौड़ाई नहीं मिल सकी है। कई मार्ग आज भी पुराने स्वरूप में हैं, जबकि शहर का यातायात और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ी है।

इसी तरह मास्टर प्लान में प्रस्तावित सिटी फॉरेस्ट भी अपेक्षित रूप से आकार नहीं ले सके। बढ़ते शहरीकरण के बीच हरित क्षेत्रों का महत्व और बढ़ गया है, लेकिन पुराने प्लान के प्रावधानों को ही पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका।

वर्ष 2008 के मास्टर प्लान में नए ट्रेंचिंग ग्राउंड का भी प्रावधान किया गया था। इसके बावजूद यह योजना भी लंबे समय बाद पूरी तरह साकार नहीं हो सकी। इससे यह सवाल उठता है कि जब पुराने मास्टर प्लान के कई अहम प्रावधान अधूरे हैं, तो नए मास्टर प्लान के प्रावधानों को जमीन पर उतारने की व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी।

इंदौर के साथ उज्जैन और क्षेत्रीय विकास का दबाव

आने वाले वर्षों में मालवा-निमाड़ क्षेत्र में शहरी और धार्मिक गतिविधियों का दबाव भी बढ़ना है। दो वर्ष बाद उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होना है। इसके चलते इंदौर सहित आसपास के शहरों और प्रमुख मार्गों पर यातायात एवं आवागमन का दबाव बढ़ने की संभावना है।

ऐसे समय में इंदौर के भविष्य के विकास को लेकर स्पष्ट मास्टर प्लान की जरूरत और महत्वपूर्ण हो जाती है। शहर की नई बसाहट, परिवहन नेटवर्क, बाहरी क्षेत्रों से कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नियोजन किया जाना जरूरी होगा।

भोपाल आगे, इंदौर अभी भी इंतजार में

प्रदेश सरकार ने भोपाल के मास्टर प्लान का प्रारूप जारी कर दिया है। ऐसे में राजधानी के मुकाबले इंदौर की स्थिति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

इंदौर प्रदेश का प्रमुख औद्योगिक, व्यावसायिक और आर्थिक केंद्र है। यहां लगातार नए निवेश, आवासीय विस्तार और यातायात का दबाव बढ़ रहा है। बावजूद इसके शहर के लिए वर्ष 2035 की विकास योजना का प्रारूप अब तक सामने नहीं आ पाया है।

मास्टर प्लान केवल जमीन के उपयोग का दस्तावेज नहीं होता। यह आने वाले वर्षों में सड़क, आवास, उद्योग, हरित क्षेत्र, परिवहन, सार्वजनिक सुविधाओं और शहर के विस्तार की दिशा तय करता है। ऐसे में इसमें देरी का असर आने वाले वर्षों के शहरी विकास पर पड़ सकता है।

सांसद ने कहा—कवायद जारी, मुख्यमंत्री से भी हुई चर्चा

इंदौर के सांसद शंकर लालवानी ने कहा है कि नया मास्टर प्लान वर्ष 2035 को ध्यान में रखकर तैयार किया जाना है और इसकी कवायद चल रही है। उन्होंने बताया कि मास्टर प्लान को लेकर मुख्यमंत्री से भी चर्चा हुई है।

अब निगाह इस बात पर है कि वर्षों से चल रही कवायद कब प्रारूप का रूप लेती है और कब इंदौर को नया मास्टर प्लान मिलता है।

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