इंदौर-दाहोद रेल लाइन के स्टेशनों पर दिखेगी आदिवासी लोककला की झलक, स्थानीय कलाकार बना रहे आकर्षक पेंटिंग
इंदौर-दाहोद रेल लाइन के स्टेशनों पर स्थानीय कला और संस्कृति की झलक दिखाई देगी। पीथमपुर, सागोर, गुनावद और धार स्टेशन पर स्थानीय कलाकार वॉल पेंटिंग बना रहे हैं।


धार। इंदौर से दाहोद तक रेलवे लाइन का काम अंतिम चरण में पहुंच रहा है। इस रेल मार्ग पर स्टेशन भी बनकर तैयार हो चुके हैं। अब इन स्टेशनों को स्थानीय कला, संस्कृति और परंपराओं के रंगों से सजाया जा रहा है। धार से दाहोद तक आदिवासी अंचल के रेलवे स्टेशनों पर क्षेत्र की लोककलाओं को प्रदर्शित करने की तैयारी है। इसके लिए स्थानीय कलाकारों को वॉल पेंटिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलाकार दिन-रात मेहनत कर स्टेशनों की दीवारों को आकर्षक रूप देने में जुटे हैं।
स्टेशनों की दीवारों पर उकेरी जा रही क्षेत्र की पहचान
रेलवे स्टेशनों की बाहरी दीवारों, प्रतीक्षालयों और प्लेटफॉर्म पर स्थानीय कला एवं संस्कृति से जुड़े चित्र बनाए जा रहे हैं। इन पेंटिंग के माध्यम से क्षेत्र के इतिहास, धार्मिक परंपराओं, सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक विरासत को दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है। इसका उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को सुंदर बनाने के साथ यात्रियों को उस क्षेत्र की विशेषताओं से परिचित कराना है, जहां वे पहुंच रहे हैं।
पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने स्टेशनों पर स्थानीय कला से जुड़ी पेंटिंग कराने का निर्णय लिया है। इस काम के लिए स्थानीय कलाकारों को अवसर दिया गया है, जिससे उन्हें अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और रोजगार पाने का मंच मिल रहा है।
चार रेलवे स्टेशनों पर चल रहा पेंटिंग का काम
टीही से धार के बीच स्थित पीथमपुर, सागोर, गुनावद और धार रेलवे स्टेशनों पर वॉल पेंटिंग बनाई जा रही हैं। इन चित्रों में स्थानीय कला, संस्कृति और क्षेत्रीय विशेषताओं को प्रमुखता दी जा रही है। खास तौर पर धार और आसपास के क्षेत्रों की ऐतिहासिक, धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक और औद्योगिक पहचान को रोचक एवं सरल तरीके से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है।
आदिवासी लोककला और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा मंच
धार जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के साथ अपनी आदिवासी परंपराओं और लोककला के लिए भी जाना जाता है। वहीं, पीथमपुर क्षेत्र अपनी औद्योगिक पहचान के कारण महत्वपूर्ण है। ऐसे में रेलवे स्टेशनों पर बनाई जा रही पेंटिंग के जरिए क्षेत्र की विविध पहचान को एक साथ सामने लाने की पहल की जा रही है।
इस पहल से यात्रियों को स्थानीय संस्कृति और विरासत को करीब से जानने का अवसर मिलेगा। साथ ही, स्थानीय कलाकारों की कला को पहचान मिलने और क्षेत्रीय सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। रेलवे स्टेशन अब केवल यात्रियों के आने-जाने का स्थान ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की कला, संस्कृति और इतिहास को प्रदर्शित करने वाले केंद्र के रूप में भी नजर आएंगे।

