Harda News: हरदा के केलनपुर में स्कूल और आंगनवाड़ी जलमग्न, घुटनों तक पानी में पहुंच रहे मासूम
हरदा के केलनपुर गांव में बारिश से शासकीय प्राथमिक स्कूल और आंगनवाड़ी परिसर जलमग्न हो गया। घुटनों तक पानी के बीच बच्चों की आवाजाही से सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं।


हरदा। जिला मुख्यालय से महज 12 किलोमीटर दूर ग्राम केलनपुर में बारिश ने सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। यहां शासकीय प्राथमिक स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बारिश के पानी से जलमग्न हो गए हैं। स्कूल परिसर में घुटनों तक पानी भरने के कारण छोटे बच्चों, शिक्षकों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे गंभीर स्थिति यह है कि बच्चों को पानी से होकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में हर साल गांव में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
खेतों और सड़कों का पानी पहुंचता है स्कूल परिसर में
ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दौरान खेतों और सड़कों का पानी सीधे स्कूल परिसर में पहुंच जाता है। पानी की निकासी के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण देखते ही देखते पूरा परिसर जलमग्न हो जाता है।
बारिश थमने के बाद भी पानी लंबे समय तक जमा रहने से बच्चों और स्कूल स्टाफ को आवागमन में परेशानी होती है। ग्रामीणों का आरोप है कि समस्या नई नहीं है, बल्कि हर साल बारिश में स्कूल परिसर तालाब में तब्दील हो जाता है।
जर्जर भवन ने बढ़ाई चिंता
जलभराव के साथ स्कूल भवन की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, स्कूल की छत जर्जर होकर खराब हो रही है और दीवारों की हालत भी ठीक नहीं है।
वहीं, आंगनवाड़ी केंद्र का भवन भी जर्जर बताया जा रहा है। इसके चलते आंगनवाड़ी केंद्र को प्राथमिक शाला के बरामदे में संचालित करना पड़ रहा है।
ऐसे में छोटे बच्चों को बरामदे में बैठाकर गतिविधियां कराई जाती हैं। बारिश के दौरान जब बरामदे और आसपास के परिसर में पानी भर जाता है, तो आंगनवाड़ी का कामकाज संचालित करना भी मुश्किल हो जाता है।
कई बार शिकायत, फिर भी समस्या जस की तस
आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मंजू नागरे ने बताया कि स्कूल और आंगनवाड़ी से जुड़ी समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभाग और ग्राम पंचायत के सरपंच को जानकारी दी गई है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका।
प्रधान पाठक सुनील उइके ने बताया कि बारिश के दिनों में सड़कों और खेतों का पानी स्कूल परिसर में भर जाता है। इस संबंध में संबंधित विभाग को लिखित सूचना भी दी जा चुकी है।
ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि अधिकारियों तथा पंचायत प्रतिनिधियों से कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ।
बच्चों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
स्कूल परिसर में घुटनों तक पानी भरने से सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों को हो रही है। पानी से होकर स्कूल पहुंचने के दौरान फिसलने, चोट लगने और दूषित पानी के संपर्क में आने का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए बारिश के दौरान तत्काल जल निकासी की व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही स्कूल और आंगनवाड़ी भवन की स्थिति का तकनीकी निरीक्षण कर आवश्यक मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत है।
सरपंच ने 14 तारीख को पक्ष रखने की बात कही
इस मामले में ग्राम पंचायत सरपंच कमलेश पटेल से पक्ष जानने का प्रयास किया गया। उन्होंने बताया कि वे फिलहाल गांव से बाहर हैं और 14 तारीख को इस मामले में अपना पक्ष रखेंगे।
अब देखना होगा कि पंचायत और संबंधित विभाग जलभराव तथा जर्जर भवन की समस्या के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।
फिलहाल केलनपुर के स्कूल में जमा बारिश का पानी सिर्फ एक दिन की परेशानी नहीं, बल्कि हर साल दोहराई जाने वाली समस्या बन चुका है। सवाल यही है कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी इस समस्या का स्थायी समाधान आखिर कब होगा?